गुरुवार, 11 अक्तूबर 2012

नया कलेक्शन मंगाने में कारोबारी खासे सतर्क

सचिन यादव नई दिल्ली | Oct 08, 2012,

 

पिछले साल सर्दियां कम पडऩे से काफी स्टॉक बचा था बाजार में

बाजार में खरीदारों की कमी को देखते हुए सर्दी के मौसम मे वूलन और गर्म कपड़ों के व्यापार में कारोबारी बहुत ज्यादा तेजी की संभावना नहीं देख रहे हैं। पिछले साल के सीजन से सबक लेते हुए उन्होंने इस बार बहुत अधिक मात्रा में सर्दी के कपड़ों का स्टॉक नहीं किया है। कारोबारियों के मुताबिक पिछले वर्ष सर्दी कम पडऩे से बहुत अधिक मात्रा में स्टॉक बच गया था। तब डिस्काउंट के जरिये बिक्री की गई थी।

बाकी बचे हुए उत्पादों को इस साल निकाला जाएगा। वहीं, कुछ कारोबारियों के मुताबिक  बहुत अधिक माल का स्टॉक नहीं किया गया है। उन्हें अंदेशा है कि ज्यादा स्टॉक कहीं उनके लिए मुसीबत न बन जाए। गांधीनगर में गर्म जैकेट के कारोबार से जुड़े नरेश सरबालिया ने बताया कि गर्म कपड़ों की मैन्युफैक्चरिंग जुलाई से पहले से ही शुरू हो जाती है।

चार महीनों में तैयार किए गए माल को दो-तीन माह में निकालने की कोशिश होती है। कारोबारियों को जितने भी खरीद के ऑर्डर मिलने थे, अधिकतर मिल चुके हैं। यहां के कारोबारी भी सीजन के हिसाब से माल की डिलीवरी कर देते हैं। पिछले वर्ष सर्दियां कम पडऩे के कारण माल की खपत बहुत अधिक नहीं हुई। कोशिश होगी कि पुराने माल को रिफ्रेश करके बाजार में उतारा जाए। मार्केट में अधिक खरीदार न होने की वजह से इस तरह के निर्णय कारोबारियों को लेने पड़ते हैं।

लुधियाना से लाकर यहां उत्पादों की बिक्री करने वाले राजीव अग्रवाल ने बताया कि पिछले साल सर्दियां कम पडऩे के कारण काफी मात्रा में पुराना स्टॉक जमा है। इसके बावजूद सिर्फ १०-१५ फीसदी पुराना माल ही इस बार इस्तेमाल किया जा पाएगा। हर साल फैशन में आने वाले बदलाव के कारण डिजाइन में बदलाव करना पड़ता है जिसकी वजह से हमें नया माल मंगाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि फिर भी पिछले साल की तुलना में इस वर्ष ५० फीसदी तक काम माल मंगाया है।

अगर नवरात्र के बाद मांग बढ़ती है तो दोबारा माल मंगाया जा सकता है। गांधीनगर मार्केट के प्रधान कंवल कुमार बल्ली ने बताया कि हमारे यहां बाजार में छोटे उत्पाद ही अधिक मात्रा में बनते हैं। उन उत्पादों की मैन्युफैक्चरिंग भी इस बार बंद है। अधिकतर वूलन उत्पादों की आपूर्ति लुधियाना से ही कर ली जाती है।