सोमवार, 2 जुलाई 2012

देश के फायदे से मेरा घर नहीं चलता है...


शिष्य, गुरू से - गुरू जी जेआरएफ की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली, अब तो अपने अंडर में पीएचडी करा दीजिए
गुरू, शिष्य से - शिष्य मेरे पास अभी सीट नहीं बची है, सारी सीटों पर पहले से ही शिष्य पीएचडी कर रहे हंैं,
शिष्य, गुरू से-  गुरू जी लेकिन आपके सारे शिष्य तो नौकरी कर रहे हैं, ऐसे में वो पीएचडी कैसे कर सकते हैं.
गुरू, शिष्य से-  मैं चाहता हूं इसलिए वो कर सकते हैं.
शिष्य,गुरू से- गुरू जी आप मुझे दाखिला दे दो, मैं १८ महीने में पीएचडी पूरी कर लूंगा.
गुरू, शिष्य से- मुझे १८ महीने में ५-७ साल में पीएचडी पूरे करने वाले होनहार शिष्य चाहिए. जो लंबे समय तक मेरे स्वार्थों को पूरा करते रहें.
शिष्य, गुरू से - तो क्या मैं फिर ५ साल के बाद आऊं पीएचडी करने.
गुरू,शिष्य से- नहीं, तुम पीएचडी मत करो, मैं तुम्हें पीएचडी क्यों कराऊं , इसमें मेरा क्या फायदा है।
शिष्य, गुरू से- गुरू जी इसमें आप का नहीं, देश का फायदा है।
गुरू , शिष्य से - देश के फायदे से मेरा घर नहीं चलता है, मेरे फायदे से मेरा घरा चलता है।