रविवार, 3 जून 2012

कानून तोड़ा तो प्लेसमेंट एजेंसियों पर 50,000 जुर्माना


बिल अगले सत्र में
द दिल्ली प्राइवेट प्लेसमेंट एजेंसीज (रेग्युलेशन बिल) 2012 का ड्राफ्ट तैयार है। दिल्ली सरकार के श्रम विभाग ने यह ड्राफ्ट तैयार किया है। श्रम विभाग के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक यह बिल मानसून सत्र में पेश होने की उम्मीद है।

प्लेसमेंट एजेंसियों की मनमानी रोकने और घरेलू नौकरों को उनके अधिकार को दिलाने वाला द दिल्ली प्राइवेट प्लेसमेंट एजेंसीज (रेग्युलेशन बिल) 2012 का ड्राफ्ट तैयार हो गया है। दिल्ली सरकार में श्रम विभाग ने यह ड्राफ्ट तैयार किया है।

श्रम विभाग के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक यह बिल मानसून सत्र में पेश हो जाने की उम्मीद है।  दिल्ली प्राइवेट प्लेसमेंट एजेंसीज (रेग्युलेशन बिल) 2012  कानून के पास होने के बाद तीन महीने के भीतर सभी प्लेसमेंट एजेंसियों को लेना होगा है। सरकार ने 16 पेज का जो ड्राफ्ट तैयार किया है, उसके मुताबिक बिना लाइसेंस लिए कोई प्लेसमेंट एजेंसी अपना कारोबार नहीं कर सकेगी।

प्लेसमेंट एजेंसियों के लिए लाइसेंस फीस  5,000 रुपये होगी। प्लेसमेंट एंजेसियों को लाइसेंस पांच वर्ष के लिए जारी होगा। लाइसेंस की अवधि समाप्त होने पर 45 दिन के भीतर ही लाइसेंस को फिर से पंजीकरण कराना होगा।

ड्राफ्ट के मुताबिक एक कंट्रोलिंग अथॉरिटी को भी नियुक्त किया जा जाएगा जिसमें श्रम विभाग के संयुक्त आयुक्त पद के अधिकारी को नियुक्त किया जाएगा। प्लेसमेंट एजेंसियां कंट्रोलिंग अथॉरिटी की मंजूरी के बगैर घरेलू नौकरों को विदेश नहीं भेज सकेंगी। प्लेसमेंट एजेंसियां घरेलू वर्कर्स से किसी भी प्रकार की फीस वसूल नहीं कर सकेंगी।

तैयार किए गए ड्राफ्ट के मुताबिक सरकारी नौकरी से निकाले गए, निजी कंपनी में किसी कार्य में दोषी पाए गए, महिलाओं के खिलाफ अपराधी लोगों को प्लेसमेंट एजेंसियों के लाइसेंस नहीं दिए जाएंगे।

प्लेसमेंट एजेंसियों को एक रजिस्टर बनाना होगा जिसमें घरेलू नौकर का नाम व पता होगा। प्लेसमेंट एजेंसी को सुनिश्चित करना होगा कि सभी घरेलू नौकरों को फोटो पहचान पत्र उपलब्ध कराएं।  किसी भी विदेशी बच्चे को घरेलू नौकर के तौर पर रखने पर प्लेसमेंट एजेंसी पर कार्रवाई होगी। इस कानून का उल्ल्घंन करने पर प्लेसमेंट एजेंसियों के मालिक पर 50,000 रुपये का जुर्माना या दो वर्ष तक की कैद हो सकती है।

पूर्व में दिल्ली सरकार के श्रम विभाग ने प्लेसमेंट एजेंसियों को लेकर एक सर्वे किया था जिसमें प्लेसमेंट एजेंसियों पर कानून के उल्ल्घंन के मामले सामने आए थे। श्रम विभाग के अधिकारी के मुताबिक  राजधानी दिल्ली में 300 से कुछ अधिक प्लेसमेंट एजेंसियां ही पंजीकृत हैं जबकि दिल्ली के अंदर 5,000 से अधिक प्लेसमेंट एजेंसियां अवैध रूप से कारोबार कर रही है।
http://business.bhaskar.com/article/broken-the-law-on-the-placement-agencies-50000-fine-3363441.html