शनिवार, 11 मई 2013

जाति न पूछो अपराधी की

 Photo-Courtesy(TOI)

आप काम अच्छा करें या फिर बुरा। आप का नाम नहीं आप की जाति ही मायने रखती है। ये हम नहीं कह रहे हैं। आज हमने जितने अखबार पढ़े हैं उनमे सिर्फ दो को छोड़ दें तो सभी ने अपनी लीड खबर की हैडिंग में पवन बंसल को सिर्फ बंसल बताने की कोशिश की है। आज कम से कम दिल्ली में आने वाले बीस से अधिक हिंदी और अंग्रेजी अख़बारों में ये हुआ है. मानिए सारे बंसल ही चोर हो गए हो. कुछ अख़बारों में अश्वनी को कुमार से पहचाना गया है। ऐसे में लोग देश में रह रहे अन्य बंसल और कुमार के बारे में क्या राय बनाते है, इसकी जवाबदेही किसकी होगी। लोगों को उनके नाम से ना जानकार जानकर उनकी जात से पहचानना लोगों की आदत बनती जा रही है  इस पर बस इतना ही कहना चाहूँगा किसी के कर्म को उसके नाम से पहचाना जाए न की जात से।