इस को क्या कह सकते हैं जिंदगी में दोस्तों का साथ होना कितना जरूरी होता है. हम सभी अपने काम में बिजी होने के कारण अपने दोस्तों को समय नहीं दे पाते हैं. जिन्होंने हमारे कठिन मोड़ पर हमारा साथ दिया था उन सबको भूल जाते हैं. जिंदगी की उड़ान में दोस्त उन पंखों सरीखे होते हैं जिनके बिना कोई भी उड़ान पूरी नहीं की जा सकती है. शब्द कम पड़ सकते हैं लेकिन उस दोस्ती को किसी भी चीज़ से तौला नहीं जा सकता है...
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रविवार, 2 मार्च 2014
शनिवार, 1 मार्च 2014
Samvidhaan: The making of the Constitution of India
कल सुबह 10 बजे का इंतज़ार कर रहा हूँ और राज्यसभा टीवी पर आने वाले प्रोग्राम 'सविंधान' का.
श्याम बेनेगल 79 साल के युवा हैं. जो ज़ज्बा उनका अंकुर मूवी बनाते समय रहा होगा, ठीक वैसा ही आज भी बरक़रार है. संविधान की मेकिंग को देखते समय लग रहा है कि जैसे श्याम बेनेगल खुद ही बहुत समय से इस पल का इंतज़ार कर रहे थे कि कब उन्हें कुछ नया करने को मिलेगा। उनकी वेलकम टू सज्जनपुर और वेलडन अब्बा ज़ेहन में बसी हुई हैं
श्याम बेनेगल ने उम्दा कलाकारों का एक गुच्छा तैयार किया है. उम्मीद करता हूँ बहुत कुछ नया जानने को मिलेगा। बिना किसी प्रमोशन के बना है और न ही कोई मार्केटिंग हुई है.
वैसे आप 11 बजे का इंतज़ार कर रहे होंगे। आमिर खान के सत्यमेव जयते का. आप से एक गुज़ारिश है कि अगर समय हो तो एक घंटे पहले ही अपना टीवी ऑन कर ले और राज्यसभा टीवी पर 'संविधान' देखकर श्याम बेनेगल और उनकी टीम की मेहनत को सार्थक बनाएं
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