गुरुवार, 11 अक्टूबर 2012

यूजीसी के जॉब पोर्टल के सहारे छात्रों को नौकरी

सचिन यादव नई दिल्ली | Oct 08, 2012,
 

 

523 विश्वविद्यालयों की कुल संख्या इस वक्त देश में
43 संख्या है केंद्रीय विश्वविद्यालयों की
265 संख्या है राज्यों के विश्वविद्यालयों की संख्या
130 डीम्ड विश्वविद्यालय की संख्या इस वक्त
80 संख्या राज्यों में स्थित निजी विश्वविद्यालयों की
33,024 कुल कॉलेज हैं उच्च शिक्षा क्षेत्र में फिलहाल

मंत्रालय का था जोर - इस जॉब पोर्टल पर विवि या कॉलेज के छात्र-छात्राएं अपने एकेडमिक प्रोफाइल जॉब पोर्टल पर अपलोड कर सकेंगे। नौकरी देने वाले संस्थान भी नौकरियों से संबंधित जानकारी भी  पोर्टल पर डाल सकेंगे। पढ़ाई के बाद नौकरी पाने में आसानी हो, ऐसेवेब पोर्टल को डेवलप  करने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने पहले ही जोर डाला था।

विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से हर साल पास होने वाले लाखों छात्रों के रोजगार पाने की समस्या को आसान बनाने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने एक जॉब पोर्टल डेवलप किया है। इस जॉब पोर्टल की सहायता से विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के छात्र-छात्राएं अपने एकेडमिक प्रोफाइल को जॉब पोर्टल पर अपलोड कर सकेंगे। साथ ही नौकरी प्रदान करने वाले संस्थान भी नौकरियों से संबंधित सारी जानकारी को पोर्टल पर डाल सकेंगे। पढ़ाई के बाद नौकरी पाने में आसानी हो, ऐसे वेब पोर्टल को डेवलप करने के लिए केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ने पहले ही काफी जोर दिया था।

यूजीसी के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस पोर्टल की मदद से नौकरी प्रदान करने वाले और नौकरी ढूंढने वाले दोनों पक्षों की पूरी जानकारी होगी। इसके अलावा यह जॉब पोर्टल छात्र-छात्राओं को अपने एकेडमिक प्रोफाइल बनाने में मदद करेगा। वहीं संबंधित विश्वविद्यालय, कॉलेज और नौकरी देने संस्थान भी अपने प्रोफाइल बना सकेंगे।

नौकरी देने वाले संस्थान को एक ही स्थान पर योग्यतम अभ्यर्थी का चुनाव कर सकेंगे। इस पोर्टल के सहारे नेट-जेआरफ उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थियों के बारे में सूचना प्राप्त की जा सकेगी। यूजीसी के इस जॉब पोर्टल के बारे में अभी लोगों जानकारी नहीं है।

इसके लिए यूजीसी के कार्यवाहक चेयरमैन वेद प्रकाश ने सभी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और संस्थानों से जॉब पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन करने के लिए कहा है। उन्होंने विश्वविद्यालयों समेत सभी संस्थानों से छात्रों के बीच और इस पोर्टल को जानकारी देने के लिए कहा है। जिससे योग्य छात्र-छात्राएं अपने एकेडमिक प्रोफाइल को वेबसाइट पर अपडेट करके सही सूचना नौकरियां पा सकें। साथ ही सभी विश्वविद्यालय, कॉलेज व संस्थान अपने यहां निकलने वाली नौकरियों की जानकारी भी पोर्टल पर अपलोड करें।http://business.bhaskar.com/article/support-students-of-ugc-job-portal-job-3891808-NOR.html

नया कलेक्शन मंगाने में कारोबारी खासे सतर्क

सचिन यादव नई दिल्ली | Oct 08, 2012,

 

पिछले साल सर्दियां कम पडऩे से काफी स्टॉक बचा था बाजार में

बाजार में खरीदारों की कमी को देखते हुए सर्दी के मौसम मे वूलन और गर्म कपड़ों के व्यापार में कारोबारी बहुत ज्यादा तेजी की संभावना नहीं देख रहे हैं। पिछले साल के सीजन से सबक लेते हुए उन्होंने इस बार बहुत अधिक मात्रा में सर्दी के कपड़ों का स्टॉक नहीं किया है। कारोबारियों के मुताबिक पिछले वर्ष सर्दी कम पडऩे से बहुत अधिक मात्रा में स्टॉक बच गया था। तब डिस्काउंट के जरिये बिक्री की गई थी।

बाकी बचे हुए उत्पादों को इस साल निकाला जाएगा। वहीं, कुछ कारोबारियों के मुताबिक  बहुत अधिक माल का स्टॉक नहीं किया गया है। उन्हें अंदेशा है कि ज्यादा स्टॉक कहीं उनके लिए मुसीबत न बन जाए। गांधीनगर में गर्म जैकेट के कारोबार से जुड़े नरेश सरबालिया ने बताया कि गर्म कपड़ों की मैन्युफैक्चरिंग जुलाई से पहले से ही शुरू हो जाती है।

चार महीनों में तैयार किए गए माल को दो-तीन माह में निकालने की कोशिश होती है। कारोबारियों को जितने भी खरीद के ऑर्डर मिलने थे, अधिकतर मिल चुके हैं। यहां के कारोबारी भी सीजन के हिसाब से माल की डिलीवरी कर देते हैं। पिछले वर्ष सर्दियां कम पडऩे के कारण माल की खपत बहुत अधिक नहीं हुई। कोशिश होगी कि पुराने माल को रिफ्रेश करके बाजार में उतारा जाए। मार्केट में अधिक खरीदार न होने की वजह से इस तरह के निर्णय कारोबारियों को लेने पड़ते हैं।

लुधियाना से लाकर यहां उत्पादों की बिक्री करने वाले राजीव अग्रवाल ने बताया कि पिछले साल सर्दियां कम पडऩे के कारण काफी मात्रा में पुराना स्टॉक जमा है। इसके बावजूद सिर्फ १०-१५ फीसदी पुराना माल ही इस बार इस्तेमाल किया जा पाएगा। हर साल फैशन में आने वाले बदलाव के कारण डिजाइन में बदलाव करना पड़ता है जिसकी वजह से हमें नया माल मंगाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि फिर भी पिछले साल की तुलना में इस वर्ष ५० फीसदी तक काम माल मंगाया है।

अगर नवरात्र के बाद मांग बढ़ती है तो दोबारा माल मंगाया जा सकता है। गांधीनगर मार्केट के प्रधान कंवल कुमार बल्ली ने बताया कि हमारे यहां बाजार में छोटे उत्पाद ही अधिक मात्रा में बनते हैं। उन उत्पादों की मैन्युफैक्चरिंग भी इस बार बंद है। अधिकतर वूलन उत्पादों की आपूर्ति लुधियाना से ही कर ली जाती है।

बुधवार, 3 अक्टूबर 2012

हिट फिल्मों से 6 माह में मिला 90% राजस्व

हिट फिल्मों से 6 माह में मिला 90% राजस्व

  Sachin Yadav | Oct 04, 2012, 01:37AM IST
 
 

अभी 25 महत्वपूर्ण फिल्में आनी वाली हैं

योगदान - अप्रैल मे विकी डोनर, मई में इशकजादे, जून में राउडी राठौड़, शंघाई, गैंग ऑफ वासेपुर, फरारी की सवारी, जुलाई में बोल बच्चन, कॉकटेल, क्या सुपर कूल हैं हम, अगस्त में जिस्म-२ और एक था टाइगर, सितंबर में राज-३, बर्फी, हीरोइन व ओह माइ गॉड ने अधिकतम योगदान दिया है।

एक था टाइगर, विकी डोनर, इशकजादे, राउडी राठौड़, शंघाई, बोल बच्चन समेत 15 फिल्मों के अच्छे बिजनेस की बदौलत  दिल्ली सरकार के मनोरंजन कर विभाग ने शुरूआती छह महीनों में ही अपने अपने लक्षित राजस्व के 90 फीसदी की वसूली कर ली है।

मनोरंजन कर विभाग ने एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ३० सितंबर तक प्राप्त आकड़ों के मुताबिक विभाग ने ६२ करोड़ रुपये की राजस्व मनोरंजन कर के रूप में वसूल किया है, जबकि वित्त वर्ष २०१२-१३ में मनोरंजन कर के लिए जरिए राजस्व में वसूली का लक्ष्य ६७ करोड़ रुपये रखा गया है।

वित्त वर्ष २०११-१२ में सुपर हिट फिल्मों की वजह से राजस्व में ७० फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी हुई थी। वित्त वर्ष २०११-१२ में दिल्ली सरकार के मनोरंजन कर विभाग ने ५८ करोड़ रुपये के मनोरंजन कर की वसूली का लक्ष्य रखा था जबकि सुपरहिट फिल्मों की वजह से मनोरंजन कर विभाग का राजस्व १०२ करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।

मनोरंजन कर विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अप्रैल मे विकी डोनर, मई में इशकजादे, जून में राउडी राठौड़, शंघाई, गैंग ऑफ वासेपुर, फरारी की सवारी, जुलाई में बोल बच्चन, कॉकटेल, क्या सुपर कूल हैं हम, अगस्त में जिस्म-२ और एक था टाइगर, सितंबर माह में राज-३, बर्फी, हीरोइन व ओह माइ गॉड जैसी फिल्मों ने मनोरंजन कर में अपना अधिकतम योगदान दिया है।

अधिकारी ने कहा कि अभी पूरे वित्त वर्ष में करीब २५ महत्वपूर्ण फिल्में आनी वाली हैं जिनसे विभाग के राजस्व में और अधिक बढ़ोतरी होगी। इसके अलावा डीटीएच कंपनियों और केबल नेटवर्क, एंटरटेनमेंट शो के जरिए भी विभाग का राजस्व बढ़ेगा।
http://business.bhaskar.com/article/received-a-90-revenue-from-hits-in-6-months-3873922.html

सोमवार, 1 अक्टूबर 2012

सात दिनों के अंदर पूरा देश बेच दिया- Mamta Banerji

तृणमूल कांग्रेस ला सकती है संसद में अविश्वास प्रस्ताव

  Sachin Yadav दिल्ली | Oct 02, 2012, 01:05AM IST
 
 

यूपीए-2 सरकार ने सात दिनों के अंदर पूरा देश बेच दिया है। सरकार लोगों को सिर्फ बेरोजगारी-भ्रष्टाचार दे रही है। जो उसके खिलाफ बोलता है उसे सीबीआई का डर दिखाती है। हम कांग्रेस और सीबीआई से नहीं डरते हैं। केन्द्र हमें जेल में डाल कर दिखाए। देश चलाने के लिए 120 करोड़ लोगों को साथ लेना होगा।  -ममता बनर्जी, अध्यक्ष, तृणमूल कांग्रेस

शरद यादव ने कहा, विरोध का आया वक्त

यूपीए-2 सरकार ने सात दिनों के अंदर पूरा देश बेच दिया है। सरकार लोगों को सिर्फ बेरोजगारी, भ्रष्टाचार दे रही है जो उसके खिलाफ बोलता है उसे सीबीआई का डर दिखाती है। यह बात तृणमूल कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष ममता बनर्जी ने राजधानी में एफडीआई, महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए कही। हम कांग्रेस और सीबीआई ने नहीं डरते हैं। केन्द्र सरकार हमें जेल में डाल कर दिखाए। खाली दिल्ली से देश नहीं चलने वाला है। देश चलाने के लिए 120 करोड़ लोगों को साथ लेना होगा।

ममता बनर्जी ने शायराना अंदाज में केन्द्र सरकार पर व्यंग्य करते हुए अपने लहजे में कहा कि हम चर्चा करते हैं तो हो जाते हैं बदनाम, वो कत्ल करते हैं तो बदनाम नहीं होते। उन्होंने कहा कि मल्टीब्रांड रिटेल में एफडीआई के खिलाफ एक फेडरल फ्रंट बनाएंगे। पूरे देश में जाएंगे और लोगों को समर्थन हासिल करेंगे।

इसके लिए 2 नवंबर को हरियाणा में, 17 नवंबर को लखनऊ , 19-20 नवंबर को दिल्ली में प्रदर्शन किया जाएगा। लखनऊ में प्रदर्शन के दौरान समाजवादी प्रमुख मुलायम सिंह यादव को भी आमंत्रित किया जाएगा। यह सरकार विदेशों मे जमा काला धन वापस लाए। अगर जरूरी हुआ तो संसद में सहयोगियों के साथ मिलकर केन्द्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी लाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि हम देश को बंद करने में विश्वास नहीं रखते हैं। काम भी करेंगे और प्रदर्शन भी करेंगे। इस देश को लुटने नहीं दिया जाएगा। सरकारी नौकरियों में काम करने वाले लोगों को पेंशन बिल के खिलाफ लडऩे के लिए कहा है। नवंबर में सरकार इस बिल को पास करके आपकी पेंशन को भी आप से छीन लेगी। समय आ गया है कि सब इस सरकार के खराब निर्णयों के खिलाफ आवाज बुलंद करें।

इस मौके पर जदयू प्रमुख शरद यादव ने कहा कि हमारे देश का व्यापार 2,500 वर्ष पुराना है और यह सरकार इसी कारोबार को तबाह कर देना चाहती है। सरकार ईमानदारी से काम करने वाले लोगों को अब कारोबार नहीं करने देना चाहती है। यह वो वर्ग है जो सरकार से कभी नौकरी मांगने नहीं जाता, कभी नहीं कहता है कि हमारे भत्तों में बढ़ोतरी करो। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ईमान वाली नेता है और जब उनके जरिए ईमानदारी जनता में फैलेगी तो लोकतंत्र भी ईमानदार होगा।

http://business.bhaskar.com/article/trinamool-congress-may-move-a-motion-in-parliament-3864233-NOR.htmlपिछली बार भी देश में एफडीआई लाने के केन्द्र सरकार के निर्णय को ममता बनर्जी ने ही खारिज किया था। पूर्व केन्द्रीय राज्य शहरी विकास मंत्री और तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत राय ने कहा कि अमेरिका में दो माह चुनाव होने जा रहे हैं और देश के प्रधानमंत्री अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा को यह चुनावी तोहफा दे रहे हैं।

खादी उत्पाद मिलेंगे 10 फीसदी महंगे

सचिन यादव नई दिल्ली | Oct 02, 2012, 01:09AM IST
 






ऊनी खादी उत्पादों पर छूट 1 नंवबर से शुरू

फैसला - दिल्ली सरकार अगर अपनी तरफ से छूट देती है तो यह छूट 20% से बढ़कर 30% के स्तर पर पहुंच जाती लेकिन दिल्ली सरकार ने अभी तक छूट देने का फैसला नहीं किया है। वहीं यूपी सरकार ने 10% छूट सरकार की तरफ से देने का फैसला किया है।

दिल्ली सरकार की तरफ से खादी वस्त्रों पर छूट ने देने से पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश की तुलना में दिल्ली में खादी उत्पाद 10 फीसदी महंगे मिलेंगे। दिल्ली सरकार अगर अपनी तरफ से छूट देती है तो यह छूट 20 फीसदी से बढ़कर 30 फीसदी के स्तर पर पहुंच जाती लेकिन दिल्ली सरकार ने अभी तक छूट देने का फैसला नहीं किया है।

वहीं उत्तर प्रदेश सरकार ने 108 दिनों के लिए खादी वस्त्रों पर 10 फीसदी छूट सरकार की तरफ से देने का फैसला किया है। वहीं खादी व ग्रामोद्योग आयोग पिछले वर्षों की भांति इस वर्ष भी गांधी जयंती पर खादी वस्त्रों पर छूट का सिलसिला जारी रखेगा। खादी व ग्रामोद्योग आयोग इस बार खादी (सूती), सिल्क खादी, पॉली खादी व खादी से बने रेडीमेड गारमेंट पर 20 फीसदी की छूट दी जाएगी।

यह छूट 3 अक्टूबर से शुरू होगी और आगामी 90 दिनों तक जारी रहेगी। ऊनी खादी उत्पादों पर छूट 1 नंवबर से शुरू होगी और 90 दिनों तक जारी रहेगी। खादी व ग्रामोद्योग आयोग के सूत्रों के मुताबिक, खादी उत्पादों पर यह छूट मार्केटिंग डेवलपमेंट असिस्टेंट के जरिए दी जा रही है। आयोग के मुताबिक जिन संस्थाओं से हम माल खरीदते हैं उनसे जो छूट हमें प्राप्त होती है।

उस छूट को सीधे ग्राहकों को दे दिया जाता है। वर्ष 2009-10 के बाद वर्ष 2011-12 में दिल्ली सरकार ने 10 फीसदी की छूट दी थी तब खादी उत्पादों पर 30 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई थी। सूत्रों ने बताया कि हमारे पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश सरकार से मदद मिलने के बाद खादी उत्पादों पर छूट 30 फीसदी रहेगी। अगर दिल्ली में शीला दीक्षित सरकार चाहे तो खादी उत्पादों पर छूट बढ़ सकती है।

आयोग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, खादी उत्पादों पर दी जाने वाली छूट देश में सबसे अधिक दिनो तक चलने वाला ऑफर है। सूत्रों के मुताबिक, पहले यह छूट 60 दिन तक रहती थी जिसे बाद में 90 दिन कर दिया गया है।

अगर आयोग चाहे तो इस छूट को बढ़ाकर को 108 दिन तक किया जा सकता है।  खादी के उत्पादों को लोगों की तरफ से काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। युवाओं का रुझान भी खादी की तरफ बढ़ा है। उन्होंने पड़ोसी राज्य हरियाणा से भी खादी के उत्पादों की अच्छी मांग आ रही है।
http://business.bhaskar.com/article/khadi-product-will-meet-10-per-cent-more-expensive-3864240-NOR.html

शुक्रवार, 28 सितंबर 2012

वोकेशनल कोर्स से 50 करोड़ लोग होंगे स्किल्ड

वोकेशनल कोर्स से 50 करोड़ लोग होंगे स्किल्ड http://business.bhaskar.com/article/vocational-courses-will-be-50-million-skilled-3851749-NOR.html

सचिन यादव नई दिल्ली | Sep 29, 2012,
 
 

50 करोड़ स्किल्ड लोग तैयार होंगे एनवीईक्यूएफ कार्यक्रम में 2022 तक
10 क्षेत्रों का चुनाव हुआ है एआईसीटीई ने वोकेशनल कोर्सेज के लिए
1-7 लेवल तक सर्टिफिकेशन देने की योजना है फ्रेमवर्क में छात्रों को

नेशनल वोकेशनल एजुकेशन क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क के तहत वर्ष 2013-14 में वोकेशनल कोर्सेज को बढ़ावा देने के लिए 200 इंस्टीट्यूट खोलने की योजना है। यह जानकारी उच्च शिक्षा में वोकेशनल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए यूजीसी चेयरमैन वेद प्रकाश ने सभी राज्य और केन्द्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को पत्र लिखकर बताया है उन्होंने कहा कि वोकेशनल कोर्सेज के बारे में छात्रों को जागरूक किया जाए और इस शिक्षा से होने वाले लाभ के विषय में बताएं।   

यूजीसी चेयरमैन ने अपने पत्र में लिखा है कि केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय नेशनल वोकेशनल एजुकेशन क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क के वर्ष 2022 तक 50 करोड़ स्किल्ड लोगों की तादाद को तैयार करना चाहता है जिससे उद्योग जगत और अन्य क्षेत्रों जिनमें रोजगार पैदा होते है कि भविष्य की जरूरतों को पूरा किया जा सके।

इस प्रोग्राम के तहत अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा समिति (एआईसीटीई) ने वोकेशनल कोर्सेज के लिए 10 क्षेत्रों का चुनाव किया है। इन क्षेत्रों में ऑटोमोबाइल, एंटरटेनमेंट, इंफॉरमेशन टेक्नोलॉजी, टेलीकम्युनिकेशन, मार्केटिंग, एग्रीकल्चर, कंस्ट्रक्शन, एप्लाइड आर्ट, टूरिज्म, प्रिंटिंग और पब्लिकेशन सेक्टर के हर एक क्षेत्र में विभिन्न स्तरों पर विशेषज्ञता दी जाएगी।

यूजीसी ने वोकेशनल शिक्षा को उच्च शिक्षा में शामिल करने के लिए एक योजना भी बनाई है। यूजीसी इसके लिए बैचलर ऑफ वोकेशनल देने की योजना भी बनाई है। यह डिग्री उन छात्रों को दी जाएगी जो सर्टिफिकेशन लेवल 5,6,7 को पास कर लेंगे। बैचलर ऑफ वोकेशनल डिग्री के दौरान प्रस्तावित वोकेशनल प्रोग्राम में एआईटीसीई द्वारा मान्यता प्राप्त स्किल नॉलेज प्रोवाइडर की मदद से इसका पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा।

इस फ्रेमवर्क में छात्रों को 1-7 लेवल तक सर्टिफिकेशन देने की योजना है। वोकेशनल प्रोग्राम के सर्टिफिकेशन लेवल 1-4 तक को स्कूली शिक्षा में शामिल किए जाने का प्रस्ताव है। यूजीसी चेयरमैन वेद प्रकाश ने अपने सभी कुलपतियों को निर्देश दिया है कि सभी विश्वविद्यालयों अपने यहां वोकेशनल शिक्षा को उच्च शिक्षा महत्वपूर्ण अंग बनाकर अपने छात्रों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं। इसके अलावा, हर विश्वविद्यालय एनवीईक्यूएफ कार्यक्रम को अपने तरीके से लागू करके खुद एक नया ट्रेंड तय कर सकते हैं।

Key Words UGC 
 

रविवार, 16 सितंबर 2012

छतों पर भी होगा सौर ऊर्जा का उत्पादन

छतों पर भी होगा सौर ऊर्जा का उत्पादन

सचिन यादव नई दिल्ल� | Sep 17, 2012, 02:35AM IST
 
 

प्रोजेक्ट - एक किलोवाट का ऑफ ग्रिड बिना बैटरी का सौर ऊर्जा पैनल लगाने पर 2 लाख रुपये का खर्च आता है जबकि बैटरी वाले पैनल पर खर्च50,000 रुपये और बढ़ जाता है। इस पॉयलट प्रोजेक्ट का खर्च करीब 15  करोड़ रुपये है। इसमें से 30 फीसदी पैसा सब्सिडी के जरिए केंद्र देगा जबकि बाकी पैसा दिल्ली सरकार को देना होगा।

सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली सरकार के एनर्जी एफिशिएंसी एंड रिन्यूवल एनर्जी मैनेजमेंट (आरईएम) विभाग ने दिल्ली सरकार को रूफ टॉप पॉलिसी के सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने का प्रस्ताव भेजा है। इस प्रस्ताव के तहत दिल्ली सरकार के 25 स्कूलों में 250 किलोवाट, 10 हॉस्पिटल में 250 किलोवाट का, विकास भवन-2 में 100 किलोवाट और दिल्ली सचिवालय में 30 किलोवाट का सौर ऊर्जा प्लांट लगाने का प्रस्ताव भेजा है।

दिल्ली सरकार के एनर्जी एफिशिएंसी एंड रिन्यूवल एनर्जी विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह प्रस्ताव दिलली सरकार के पर्यावरण विभाग को भेजा जा चुका है। जल्द ही इस पर काम शुरू होगा। अधिकारी ने बताया कि अभी यह पॉयलट प्रोजेक्ट है और इस प्रोजेक्ट के तहत 630 किलोवाट से ज्यादा सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए पैनल लगाने होंगे।

अधिकारी ने बताया कि एक किलोवाट का ऑफ ग्रिड बिना बैटरी का सौर ऊर्जा पैनल लगाने पर 2 लाख रुपये का खर्च आता है। जबकि बैटरी वाला पैनल लगाने पर इसकी लागत 50,000 रुपये और बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि इस पॉयलट प्रोजेक्ट की लागत करीब 15 करोड़ रुपये आएगी। इसमें से 30 फीसदी पैसा सब्सिडी के जरिए केन्द्र सरकार देगी जबकि बाकी पैसा दिल् ली सरकार को देना होगा।

सौर ऊर्जा के जरिए उत्पादन होने वाली सारी बिजली को संबंधित विभाग खुद के प्रयोग में लाएंगे। सौर ऊर्जा उत्पादन की लागत 16 रुपये से घटकर 12 रुपये प्रति यूनिट के स्तर पर आ गई है। पेट्रोलियम पदार्थ और कोल पदार्थ जिस तरह से महंगे हो रहे हैं, आने वाले समय में सौर ऊर्जा के  से मिलने वाली बिजली और अन्य तरीकों से मिलने वाली बिजली के कीमतों में काफी समानता आ जाएगी।

इसके अलावा ईईआरईएम ने दिल्ली राज्य औद्योगिक और अवसंरचना विकास निगम को दिल्ली में रूफ टॉप पॉलिसी के लिए कितनी छत उपलब्ध हैं इसका अध्ययन करने को कहा है। इस अध्ययन के बाद ही दिल्ली में रूफ टॉप के  जरिए कितनी सौर ऊर्जा का उत्पादन हो सकेगा। उन्होंने बताया कि इंडो जर्मन एनर्जी प्रोग्राम के तहत जीआईजेड ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि दिल्ली में 700 वर्ग किलोमीटर बिल्टअप एरिया है और अगर कुल क्षेत्रफल में से सिर्फ 25 फीसदी क्षेत्र का ही प्रयोग किया जाए तो बहुत अधिक मात्रा में बिजली का उत्पादन हो सकता है।