शनिवार, 30 जून 2012

बोतलबंद पानी से खूब बुझ रही है मुनाफे की प्यास







8,000 - करोड़ रुपये का है फिलहाल देश में बोतलबंद पानी का कारोबार
10,000 - करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा यह चालू वित्त वर्ष के अंत तक
15,000 - करोड़ रुपये होगा इस बाजार का आकार वर्ष 2015 तक
36,000 - करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है वर्ष 2020 तक

देश में बोतलबंद पानी के बाजार को लेकर मैं काफी उत्साहित हूं। स्वच्छ पेयजल की बढ़ती कमी, बदलती जीवनशैली और इस बाजार में मौजूद ब्रांड्स का आक्रामक विस्तार आने वाले दशकों में इस उद्योग को तेल उद्योग के बाद सबसे बड़ी इंडस्ट्री बना सकता है।
एजाज मोतीवाला संस्थापक एवं प्रमुख सलाहकार आइकॉन मार्केटिंग कंसल्टेंट्स

बाजार के बड़े खिलाड़ी
आसान उपलब्धता और जेब के मुताबिक होने के कारण फिलहाल एक लीटर जैसे छोटे पैक की बाजार हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। बिसलरी 36 फीसदी बाजार हिस्सेदारी के साथ बोतलबंद पानी के कारोबार में सबसे आगे है। किनले और एक्वाफिना भी तेजी से बढ़ रहे हैं। किनले की 25 और एक्वाफिना की करीब 15 फीसदी हिस्सेदारी बाजार में है। पार्ले एग्रो की बेली की करीब 6 फीसदी हिस्सेदारी है। किंगफिशर, ऑक्सीरिच आदि बाकी सभी संगठित ब्रांड्स की हिस्सेदारी करीब 18 फीसदी है।

देश में बोतलबंद पानी का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है और इस बिजनेस में उतर चुकी कंपनियों के लिए खूब मुनाफा उगल रहा है। प्रमुख मार्केटिंग कंसल्टिंग फर्म आइकॉन मार्केटिंग कंसल्टेंट्स की ओर से घरेलू बाजार में बोतलबंद पानी के कारोबार पर जारी ताजा रिपोर्ट में यह बात कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक चालू वित्त वर्ष (2012-13) में बोतलबंद पानी का कारोबार 10,000 करोड़ रुपये रह सकता है। यह बिजनेस सालाना 19 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रहा है।

'द इंडियन बोटल्ड वाटर मार्केट : अनवीलिंग इट्स थस्र्ट' नाम से जारी इस रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि फिलहाल देश में बोतलबंद पानी का कारोबार करीब 8,000 करोड़ रुपये का है जो चालू वित्त वर्ष के अंत तक 10,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। यह कारोबार 19 फीसदी सालाना की रफ्तार से बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में यह रफ्तार बरकरार रह सकती है।

देश में बोतलबंद पानी का बाजार 2015 तक 15,000 करोड़ रुपये होगा और 2020 तक इस बाजार का आकार 36,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। बोतलबंद पानी के वैश्विक बाजार का विस्तार और भी तेजी से हो रहा है और यह पिछले पांच साल में 40-45 फीसदी की रफ्तार से बढ़कर 85 से 90 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।

बोतलबंद पानी के इस बाजार में तीन तरह के खिलाड़ी हैं। देशभर में मौजूदगी रखने वाले नेशनल ब्रांड्स की हिस्सेदारी करीब 4,000 करोड़ रुपये की है। क्षेत्रीय बाजारों में काम कर रहे लोकल ब्रांड्स की हिस्सेदारी 2400 करोड़ रुपये की है। असंगठित लोकल ब्रांड्स की हिस्सेदारी भी करीब 1600 करोड़ रुपये की है। बोतलबंद पानी के कारोबार में देश में करीब 2500 ब्रांड्स हैं, जिनमें से 80-85 फीसदी लोकल हैं। गैर परंपरागत (जैसे 5 लीटर से ज्यादा के बल्क पैक) वाली श्रेणी की हिस्सेदारी बाजार में 44 फीसदी है।

आइकॉन के मुताबिक 20 लीटर वाले जार में पानी का बिजनेस करने वालों की हिस्सेदारी 3,500 करोड़ रुपये है और यह 28 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रहा है। घरों और संस्थागत क्षेत्र में बल्क पैक की मांग लगातार जोर पकडऩे से अगले 4-5 साल में बोतलबंद पानी का कारोबार और भी तेजी से बढ़ेगा। बाजार में ग्रामीण और शहरी भारत की हिस्सेदारी को देखें तो इसमें शहरी क्षेत्र की 84 फीसदी और ग्रामीण बाजार की 16 फीसदी हिस्सेदारी है।

http://business.bhaskar.com/article/there-is-plenty-of-bottled-water-out-of-the-thirst-for-profits-3448763.html

शुक्रवार, 29 जून 2012

खाओ मक्खन लगाओ मक्खन"- मक्खनबाज़

इश्क को बढ़ाने के साथ दुश्मनी को कम करने का काम भी मक्खन ही करता है 
छोटी सी जिन्दगी है यारोंदुश्मनों को भी दोस्त बनाओ.
"
खाओ कम लगाओ ज्यादा"- मक्खनबाज़

अधिक मक्खन खाने से स्वस्थ्य को नुकसान हो सकता है!
लेकिन मक्खन लगाने से फायदे के सिवा कुछ नही होता,
मक्खन लगाओ फायदा ही फायदा पाओ!
"
खाओ कम लगाओ ज्यादा" मक्खनबाज़

लगातार दो टेस्ट सीरीज में सफाया होने के बाद टीम इंडिया की चौतरफा आलोचना हो रही है। कोई भी उनका साथ देने को तैयार नहीं है। ऐसे में मक्खनबाज़ से उम्मीद की जा रही है। मकखनबाजों के बोर्ड ऑफ डाइरेक्टर्स ने फैसला किया है कि न सिर्फ सीनियर टेस्ट खिलाड़ियों को रिसीव करने मक्खनबाजों को भेजेंगे। बल्कि मकखनबाजों का एक दल वन डे सीरीज में टीम इंडिया का मनोबल बढ़ाने के लिए स्टेडियम में भी मौजूद रहगा।
"
खाओ कम लगाओ ज्यादा" मक्खनबाज़

मक्खनबाज़ ब्यूरो ऑफ इनवेस्टीगेशन(एमबीआई) सू़त्रों के मुताबिक आर्मी चीफ जनरल वी़.के. सिंह द्वारा 10 किलो मक्खन खरीदने का मामला प्रकाश में आया है। मक्खनबाज़ जांच एंजेसी के मुताबिक वी.के. सिंह ने जिंदगी में पहली बार इतनी बड़ी मात्रा में मक्खन खरीदा और वो भी 26 जनवरी से ठीक पहले। एमबीआई के मुताबिक 10 किलो मक्खन लेकर जनरल साहब 26 जनवरी को परेड देखने पहुंच थे लेकिन वापस लौटते समय उनका सारा मक्खन खत्म हो गया। मक्खनबाज़ एजेंसी के अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि जनरल साहब ने सारा मक्खन कहां खत्म कर दिया। इस बात की भी जांच की जा रही है कि जनरल ने सारा मक्खन खिलाने में या फिर लगाने में खर्च किया ।
"
खाओ कम लगाओ ज्यादा" मक्खनबाज़

अशिकी में भी मक्खन ही काम आता है 
जब गर्लफ्रेंड रूठ जाए, 
मक्खन लगाओउसे मनाओ. 
"
खाओ कम लगाओ ज्यादा"-मक्खनबाज़

अभी-अभी मक्खनबाजों ने एक मक्खनबाज़ शहर बनाने की घोषणा की है.
"
खाओ कम लगाओ ज्यादा"- मक्खनबाज़


मक्खनबाज़ी में सुनहरा भविष्य देखते हुए
कैम्ब्रिजऑक्सफोर्डएमआईटी यूनिवर्सिटी
यहाँ तक कि लदंन स्कूल ऑफ इॅकानमिक्स
ने अपने सभी नियमों को तोड़कर 
"
मास्टर प्रोग्राम इन मक्खनबाजी" कोर्स को 
जल्द ही शुरू करने का फैसला किया है.
अब सभी मक्खनबाजों को पढ़ने और पढ़ाने का मौका मिलेगा.
"
खाओ कम लगाओ ज्यादा"-मक्खनबाज

देश के पांच राज्यों में विधान सभा चुनाव है.
कई मक्खन बनाने वाली कंपनियों ने
राजनीतिक पार्टियों से संपर्क किया है कि 
अपने राज्य कि जनता को हमारी कंपनी का मक्खन लगायें.
"
खाओ कम लगाओ ज्यादा"-मक्खनबाज़


खाते और लगाते समय 
सही मक्खन का चुनाव ज़रूरी है 
क्योकि बाज़ार में मक्खन तो बहुत हैं
पर 'अमूलकी बात ही कुछ और है
"
खाओ मक्खन लगाओ मक्खन"- मक्खनबाज़

जिन्दगी जीने के सिर्फ दो ही तरीके हैं
पहला गधे के बारे में सोचे बिना
मेहनत करते जाओ
या फिर चुपचाप होले-होले मक्खन लगाओ
"
खाओ मक्खन लगाओ मक्खन"- मक्खनबाज़

बहुत से जीरो भी हीरो बन गए हैं मक्खनबाज़ी से 
"
खाओ कम लगाओ ज्यादा"  मक्खनबाज़

सभी मक्खन बाज़ एक दूसरे को मक्खन लगा रहे हैं.
"
खाओ कम लगाओ ज्यादा" :- मक्खनबाज़

रविवार, 3 जून 2012

कानून तोड़ा तो प्लेसमेंट एजेंसियों पर 50,000 जुर्माना


बिल अगले सत्र में
द दिल्ली प्राइवेट प्लेसमेंट एजेंसीज (रेग्युलेशन बिल) 2012 का ड्राफ्ट तैयार है। दिल्ली सरकार के श्रम विभाग ने यह ड्राफ्ट तैयार किया है। श्रम विभाग के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक यह बिल मानसून सत्र में पेश होने की उम्मीद है।

प्लेसमेंट एजेंसियों की मनमानी रोकने और घरेलू नौकरों को उनके अधिकार को दिलाने वाला द दिल्ली प्राइवेट प्लेसमेंट एजेंसीज (रेग्युलेशन बिल) 2012 का ड्राफ्ट तैयार हो गया है। दिल्ली सरकार में श्रम विभाग ने यह ड्राफ्ट तैयार किया है।

श्रम विभाग के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक यह बिल मानसून सत्र में पेश हो जाने की उम्मीद है।  दिल्ली प्राइवेट प्लेसमेंट एजेंसीज (रेग्युलेशन बिल) 2012  कानून के पास होने के बाद तीन महीने के भीतर सभी प्लेसमेंट एजेंसियों को लेना होगा है। सरकार ने 16 पेज का जो ड्राफ्ट तैयार किया है, उसके मुताबिक बिना लाइसेंस लिए कोई प्लेसमेंट एजेंसी अपना कारोबार नहीं कर सकेगी।

प्लेसमेंट एजेंसियों के लिए लाइसेंस फीस  5,000 रुपये होगी। प्लेसमेंट एंजेसियों को लाइसेंस पांच वर्ष के लिए जारी होगा। लाइसेंस की अवधि समाप्त होने पर 45 दिन के भीतर ही लाइसेंस को फिर से पंजीकरण कराना होगा।

ड्राफ्ट के मुताबिक एक कंट्रोलिंग अथॉरिटी को भी नियुक्त किया जा जाएगा जिसमें श्रम विभाग के संयुक्त आयुक्त पद के अधिकारी को नियुक्त किया जाएगा। प्लेसमेंट एजेंसियां कंट्रोलिंग अथॉरिटी की मंजूरी के बगैर घरेलू नौकरों को विदेश नहीं भेज सकेंगी। प्लेसमेंट एजेंसियां घरेलू वर्कर्स से किसी भी प्रकार की फीस वसूल नहीं कर सकेंगी।

तैयार किए गए ड्राफ्ट के मुताबिक सरकारी नौकरी से निकाले गए, निजी कंपनी में किसी कार्य में दोषी पाए गए, महिलाओं के खिलाफ अपराधी लोगों को प्लेसमेंट एजेंसियों के लाइसेंस नहीं दिए जाएंगे।

प्लेसमेंट एजेंसियों को एक रजिस्टर बनाना होगा जिसमें घरेलू नौकर का नाम व पता होगा। प्लेसमेंट एजेंसी को सुनिश्चित करना होगा कि सभी घरेलू नौकरों को फोटो पहचान पत्र उपलब्ध कराएं।  किसी भी विदेशी बच्चे को घरेलू नौकर के तौर पर रखने पर प्लेसमेंट एजेंसी पर कार्रवाई होगी। इस कानून का उल्ल्घंन करने पर प्लेसमेंट एजेंसियों के मालिक पर 50,000 रुपये का जुर्माना या दो वर्ष तक की कैद हो सकती है।

पूर्व में दिल्ली सरकार के श्रम विभाग ने प्लेसमेंट एजेंसियों को लेकर एक सर्वे किया था जिसमें प्लेसमेंट एजेंसियों पर कानून के उल्ल्घंन के मामले सामने आए थे। श्रम विभाग के अधिकारी के मुताबिक  राजधानी दिल्ली में 300 से कुछ अधिक प्लेसमेंट एजेंसियां ही पंजीकृत हैं जबकि दिल्ली के अंदर 5,000 से अधिक प्लेसमेंट एजेंसियां अवैध रूप से कारोबार कर रही है।
http://business.bhaskar.com/article/broken-the-law-on-the-placement-agencies-50000-fine-3363441.html

मंगलवार, 29 मई 2012

पानी के लिए कब बंद होगा भारत

Photo-Google


पेट्रोल की कीमतें बढ़ती हैं तो आप की जान निकल जाती है। आप पूरा देश बंद कराने निकल पड़ते हो, गली-गली पुतले जलाते हो। लेकिन पानी की कीमतें बढ़ती हैं तो आप ऊफ तक नहीं करते हैं, क्यों? क्योंकि सरकार के हर निर्णय में आप को कमी दिखती है। पर निजी क्षेत्र की कंपनियों के किसी निर्णय पर आप की कोई प्रतिक्रिया नहीं होती है । निजी क्षेत्र की पैकेज्ड ड्रिकिंग वाटर बेचने वाली कंपनी बिसलेरी ने एक लीटर पानी की कीमत में ३७ फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी की है। बिसलेरी का एक लीटर पानी अब १५ रुपये की बजाय २० रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। वहीं एक अन्य ब्रांड किनली ने अपनी कीमत १५ रुपये से बढ़ाकर १७ रुपये प्रतिलीटर कर दी है। अब आप तर्क दोगे कि हम पैकेज्ड ड्रिकिंग वाटर खरीदते ही नहीं है। तो हम इसका विरोध क्यों करें। आप खरीदते नहीं हैं, मै खरीदता नहीं हूं और तुमने तो कभी पैकेज्ड ड्रिकिंग वाटर का नाम तक नहीं सुना होगा।  फिर तो एलियंस ही इन निजी कंपनियों का पानी पीते होंगे और इनका कारोबार हर साल करोड़ो रुपये की दर से बढ़ा रहे हैं.
पता नहीं कब आप हकीकत में जिदंगी जीना सीखेंगे। शायद आप पेट्रोल पीकर जिंदगी जी रहे होंगे, पानी का तो आप से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं होगा। इस देश में हर चीज का माहौल का बनाया जाता है और लोगों की मानसिकता को उसी के हिसाब से ढाल दिया जाता है। हर बार पेट्रोल की कीमतें बढऩे पर ही क्यों सारा बवाल शुरू हो जाता है। खाद्य पदार्थो से प्राकृतिक संसाधानों तक की कीमतें बढ़ती हैं तो आप कुछ नहीं करते।
निजी कंपनियां पहले विशेष क्षेत्रों में पानी की कमी का माहौल बनाती है और फिर पानी की बढ़ती किल्लत को देखकर पानी की कीमतें घटा देती हैं। आप और हम पेट्रोल की कीमतें बढऩे पर तो बार-बार भारत बंद करते हैं लेकिन क्या कभी पानी की कीमतें  बढऩे पर हमनें भारत बंद किया है। सभी प्रकार के प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा और फिर धीरे-धीरे प्रोडेक्ट को मार्केटिंग के सहारें जनता को बेचने का अच्छा तरीका मल्टीनेशनल कंपनियों ने शुरू किया है। मल्टीनेशनल कंपनियां सिर्फ इस नाम पर प्राकृतिक संसाधनों की लूट नहीं कर सकती हैं कि वह लोगों को रोजगार मुहैया करा रही हैं। सिर्फ शुद्ध और मिनरल वाटर के नाम पर लोगों को बेवकूफ बनाती, इन कंपनियों के व्यवहार पर केन्द्र और राज्य सरकारों का रूख भी लचीला है। पेट्रोल की बढ़ती कीमतें सभी राजनीतिक पार्टियों के लिए एक मुद्दा बन जाता है लेकिन पानी की बढ़ती कीमतें कभी भी किसी राजनीतिक पार्टी का मुद्दा नहीं बनता, आखिर ऐसा क्यों है? आखिर पानी को लेकर पूरा देश अभी भारत बंद क्यों नहीं कर रहा है। क्या ये पैकेज्ड ड्रिकिंग वाटर का कारोबार करने वाली कंपनियों  में  देश की राजनीतिक पार्टियों की कुछ हिस्सेदारी है। अभी समय रहते अगर हम और आप संभल गए तो आगे ठीक से खड़े भी हो सकेंगे और आगे भी बढ़ पाएंगे लेकिन अगर अभी नहीं संभले तो हमारी हालत भी धोबी का कुत्ता न घर का  न घाट का वाली हो जाएगी।  

शनिवार, 26 मई 2012

RTI-Paid News


भारतीय निर्वाचन आयोग से सूचना के अधिकार के तहत मैनें पेड न्यूज, विज्ञापन पर खर्च और  पेड न्यूज से संबंधित मामलों पर कार्रवाई के विषय में कुछ सूचनाएं मांगी थी। जिनका जवाब ये मिला है-  

वर्ष 2012 मंे पांच राज्यों उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा, एवं मणिपुर, में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान भारतीय निर्वाचन आयोग को पेड न्यूज से संबंधित 765 मामलों की शिकायत मिली। सबसे ज्यादा पेड न्यूज के मामलें 523 पंजाब में सामने आए, मणिपुर में हुए विधानसभा चुनावों में एक भी पेड न्यूज का मामला सामने नहीं आया। पंजाब के बाद उत्तर प्रदेश में 112, गोवा में 70 और उत्तराखंड में 60 पेड न्यूज के मामले सामने आए। 

पेड न्यूज से संबंधित मामलों में भारतीय निर्वाचन आयोग संबंधित उम्मीदवारों के खिलाफ कार्रवाई करता है नाकि मीडिया संस्थानों के खिलाफ। उपरोक्त पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में भारतीय निर्वाचन आयोग ने विज्ञापन पर कोई भी पैसा खर्च नहीं किया। ईसीआई के मुताबिक विज्ञापन पर खर्च राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी करते हैं और विज्ञापन पर खर्च राशि का ब्यौरा उनके ही पास होता है।

ACTING QUOTES from Filmacharya Anand Sharma's wall post.

ACTING QUOTES

quotations about acting

Acting is the least mysterious of all crafts. Whenever we want something from somebody or when we want to hide something or pretend, we're acting. Most people do it all day long.

MARLON BRANDO, New York Times, Jul. 2, 2004

For an actress to be a success she must have the face of Venus, the brains of Minerva, the grace of Terpsichore, the memory of Macaulay, the figure of Juno, and the hide of a rhinoceros.

ETHEL BARRYMORE, George Jean Nathan's The Theatre in the Fifties

I was terrorized by the emotional requirements of being an actor. Acting is like letting your pants down; you're exposed.

PAUL NEWMAN, Time Magazine, Dec. 6, 1982

There are always going to be more actors than anybody can ever use.

EDWARD ALBEE, WNBC TV interview, Jan. 9, 1966

A defective voice will always preclude an artist from achieving the complete development of his art, however intelligent he may be.... The voice is an instrument which the artist must learn to use with suppleness and sureness, as if it were a limb.

SARAH BERNHARDT, The Art of the Theatre

Film is a time capsule. If I have a lack of dedication or focus, it's permanently there as a negative reminder.

ADRIEN BRODY, Men's Health, Dec. 2005

For almost every character I’ve played in the 43 years I’ve been working as a professional actor, I’ve found parts of myself. We are all bipolar in the tiniest essence of what it is. We are all multiple personalities, in a sense, and to be healthy mentally, I think, learning what those multiple personalities are and inviting them in your life is really important.

SALLY FIELD, Ability Magazine, Feb. 2009

The actor is an athlete of the heart.

ANTONIN ARTAUD, The Theatre and Its Double

Life's what's important. Walking, houses, family. Birth and pain and joy. Acting's just waiting for the custard pie.

KATHARINE HEPBURN, Colin Jarman's The Book of Poisonous Quotes

When I connect to my soul, project it into another character, and then bring it to the stage or to a film--that has always been for me the great joy of acting. It's been as if my soul kind of leaps out of my body and is able to be free and dance around.

KYRA SEDGWICK, Newsweek, Oct. 15, 2007

Work was never about wanting fame or money. I never thought about that. I loved getting the job, going to rehearsal, playing someone else, hanging around with a bunch of actors. I needed that, the way you need water.

SARAH JESSICA PARKER, Sam Magazine, 2005

I find that’s one of the great things about acting—you have the opportunity to stand in somebody else’s shoes, whether it’s someone with mental health problems or someone who lives and works in a small town. Each character faces a dilemma in her life, and as an actor you’re able to step into that character’s skin, look through her eyes. You leave transformed, a different person, because once you live a little bit of someone’s life, it changes you.

SALLY FIELD, Ability Magazine, Feb. 2009

Good actors, never use the script unless it's amazing writing. All the good actors I've worked with, they all say whatever they want to say.

JESSICA ALBA, Elle Magazine, Dec. 2010

The fame of an actor is won in minutes and seconds, not in years.

BRAM STOKER, Personal Reminiscences of Henry Irving

Acting is a marvelous profession ... If you can spend enough time playing other people, you don't have to think too much about your own character and motivations.

DEAN KOONTZ, Odd Hours

Acting is all about honesty. If you can fake that, you've got it made.

GEORGE BURNS

To be an actor, you have to be a child.

PAUL NEWMAN, attributed, Paul Newman: A Life in Pictures

from Filmacharya Anand Sharma's wall post.


मंगलवार, 15 मई 2012

बिक्री कर समाधान के लिए अपैक्स एडवाइजरी कमेटी


कौन-कौन
बिक्री कर विभाग की अपेक्स एडवाइजरी कमेटी में 19 सदस्य होंगे जिसकी अध्यक्षता वैट आयुक्त करेंगे। वहीं अन्य दस जोनल कमेटियों की अध्यक्षता संयुक्त आयुक्त व अतिरिक्त आयुक्त करेंगे। जोनल कमेटियों में सदस्यों की संख्या 11 रहेगी।

दिल्ली सरकार के बिक्री कर विभाग ने व्यापार व कर कानून से संबंधित मुद्दों को और अधिक आसान बनाने के लिए अपैक्स एडवाइजरी कमेटी और 10 जोनल एडवाइजरी कमेटी का गठन करने का फैसला किया है। बिक्री कर विभाग के मुताबिक अपेक्स एडवाइजरी कमेटी में 19 सदस्य होंगे जिसकी अध्यक्षता वैट आयुक्त करेंगे। वहीं अन्य दस जोनल कमेटियों की अध्यक्षता संयुक्त आयुक्त व अतिरिक्त आयुक्त करेंगे। जोनल कमेटियों में सदस्यों की संख्या 11 रहेगी।

विभाग के मुताबिक अपैक्स एडवाइजरी कमेटी का कार्य दिल्ली सरकार को वैट को और अधिक सरल तरीके के साथ लागू किया जा सके, वैट कानून से संबंधित प्रशासनिक मामलों में सलाह देगी। अपैक्स एडवाइजरी कमेटी की बैठक हर तीन महीने में होंगी।

अपैक्स एडवाइजरी कमेटी में अध्यक्ष वैट आयुक्त के अलावा विशेष सचिव (वित्त विभाग), तीन सदस्य प्रवर्तन, नीति विभाग से, दो सदस्य कर सलाहकार, दो सदस्य बार एसोसिएशन से, ऑयल कंपनी, इलेक्ट्रॉनिक, मोटर व्हीकल, आईएमएफएल और कंट्री लिकर, ड्राई फ्रूट, किराना उद्योगों से एक-एक व अन्य छह सदस्य विभिन्न उद्योगों से अपैक्स एडवाइजरी कमेटी के अध्यक्ष नामित करेंगे। 

जोनल एडवाइजरी कमेटी का कार्य अपने क्षेत्र के ट्रेडर्स की परेशानियों को चिन्हित करना होगा और कर संग्रह को किस तरह बढ़ाया जाए, क्षेत्र के गुड डीलरों के अलग सूची बनाना। इसके अलावा जोनल कमेटी का कार्य अपने क्षेत्र के टैक्स डिफॉल्टरों की सूची तैयार करना होगा जिससे उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके। सभी दसों जोनल कमेटियों की बैठक तीन माह में एक बार होगी। जोनल कमेटियों को तीन महीने के दौरान अपने कार्य का विवरण, सुझाव व सलाह अपैक्स एडवाइजरी कमेटी को देने होंगे।


जोनल एडवाइजरी कमेटी में भी 11 सदस्य होंगे जिसमें अध्यक्ष की भूमिका संयुक्त आयुक्त या अतिरिक्त आयुक्त निभाएंगे। वैट के रूप में दो सदस्य, ऑडिट व प्रवर्तन विभाग से दो सदस्य, विभिन्न उद्योगों के प्रतिनिधि के तौर पर पांच सदस्य और दो सदस्यों को जोनल एडवाइजरी कमेटी के चेयरमैन नामित करेंगे।