इस को क्या कह सकते हैं जिंदगी में दोस्तों का साथ होना कितना जरूरी होता है. हम सभी अपने काम में बिजी होने के कारण अपने दोस्तों को समय नहीं दे पाते हैं. जिन्होंने हमारे कठिन मोड़ पर हमारा साथ दिया था उन सबको भूल जाते हैं. जिंदगी की उड़ान में दोस्त उन पंखों सरीखे होते हैं जिनके बिना कोई भी उड़ान पूरी नहीं की जा सकती है. शब्द कम पड़ सकते हैं लेकिन उस दोस्ती को किसी भी चीज़ से तौला नहीं जा सकता है...
मंगलवार, 25 मई 2010
कागज की खपत में बढ़ोतरी
सचिन यादव नई दिल्लीचावड़ी बाजार स्थित एशिया का सबसे बड़ा कागज बाजार आर्थिक मंदी के खराब दौर से उबर आया है। आजकल बाजार में २० फीसदी से अधिक की तेजी दिखाई पड़ रही है जोकि आने वाले ५ से ६ महीनों तक लगातार जारी रहने की संभावना है। साथ की रिकवर्ड पेपर के कारोबार में भी तेजी आई है। इस समय अरब देशों के साथ-साथ पड़ोसी देश श्रीलंका को भी कागज का निर्यात किया जा रहा है।पेपर मर्चेंट एसोसिएशन के महासचिव पदम चंद जैन कहते हैं कि पेपर के कारोबार में तेजी का एक प्रमुख कारण ग्लोबल वार्मिंग भी है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण लोगों ने पॉलीथीन को प्रयोग करना कम किया है। आज लोगों में जागरूकता के कारण इको फे्रंडली बैग का प्रयोग करने वालों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है। इसलिए व्यापरियों ने भी इको फें्र डली बैग के उत्पादन को बढ़ाया है।पदम चंद कहते हैं कि २००८ में भारत में ९ मिलियन टन कागज का उत्पादन हुआ था जबकि उसी वर्ष १०।२ मिलियन टन कागज का उपभोग लोगों की जरूरतों को पूरा करने में खर्च हो गया ,जिसके लिए बाकी कागज आयात किया गया था। भारत में पेपर का उपभोग बढ़ता जा रहा है। २००८ के ९ मिलियन टन से बढ़कर २०२० में कागज का उत्पादन १८.५ मिलियन टन पहुंच जाने की संभावना है।सबसे अधिक पेपर मैगजीन, पोस्टर और कलेण्डर बनाने में खर्च होता है। भारत में पैकजिग में ४.५ मिलियन टन कागज, न्यूज प्रिंट में १.७ मिलियन टन , प्रिटिंग एंड राइटिंग में ३.६ मिलियन टन कागज की खपत हो जाती है। जोकि लगातार बढ़ती ही जा रही है। उन्होंने साफ किया बाजार में महंगाई है फिर भी कागज की खपत लगातार बढ़ती जा रही है।रिकवर्ड पेपर के विषय में पदम चंद कहते हैं कि भारत में सबसे अधिक रिकवर्ड पेपर का आयात अमेरिका से किया जाता है। भारत अमेरिका से ३४ प्रतिशत से अधिक रिकवर्ड कागज का आयात करता है। जबकि ६६ फीसदी से अधिक रिकवर्ड कागज यूएई, यूके, और यूरोप से आयात किया जाता है।पदम चंद जैन कहते है कि चावड़ी बाजार पेपर का मुख्यत वितरण केन्द्र है। यहां पर पेपर टेड्रर्स की १३५० से अधिक दुकानें हैं और सालाना करीब २५०० करोड़ से अधिक का कारोबार हो जाता है। गौरतलब है कि एशिया की सबसे बड़ी कागज वितरण बाजार से प्रत्यक्ष रूप से १० हजार से भी अधिक परिवार जुड़े हुए हैं।
धंधा है पर मंदा है ये
सचिन यादव नई दिल्ली
चावड़ी बाजार स्थित कागज के व्यापरियों में जहां खुशी का माहौल है वहीं दूसरी ओर ग्रीटिंग कार्ड का व्यापार करने वाले व्यापरियों का धंधा काफी मंदा चल रहा है। नए टेक्रोलाजी और मोबाइल क्रांति ने पूरी तरह से लोगों को अपना दिवाना बना लिया है जिससे ग्रीटिंग कार्ड की तरफ किसी का ध्यान भी नहीं है। ग्रीटिंग कार्ड का कारोबार करने वाले रंजन कहते हैं कि अब कौन कार्ड खरीदना चाहता है, लोग अपनी उंगलियों को मोबाइल या कंप्यूटर में खटपटा कर और थोड़ा सा कष्ट देकर कुछ ही समय में लोग अपनों से बातें कर रहे हैं। आखिर कौन ऐसे में धूप में बाजार आएगा, कौन ग्रीटिंग कार्ड का पोस्ट करने के झंझट में पड़ेगा। व्यापारी लक्ष्मी जैन कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि लोग ग्रीटिंग कार्ड खरीद नहीं रहे हैं लेकिन आजकल लोगों को ब्रांड पंसद आता है। इसलिए लोग ग्रीटिंग कार्ड की खरीदारी कर भी रहे हैं तो पहले उसकी कंपनी देख रहे हैं। व्यापारी सुंदर लाल कहते हैं कि ग्रीटिंग कार्ड के कारोबार में इतनी गिरावट है कि पिछले कई सालों से ही कार्डों के उत्पादन को कम कर दिया गया है।मॉडल टाउन के निवासी तरुण चौहान कहते हैं कि कार्ड लाओ, फिर चिपकाओ, पोस्ट आफिस जाओ, लाइन लगाओ और घंटों के बाद एक कार्ड पोस्ट करने के झंझट में अब कौन पडऩा चाहेगा। जब मोबाइल और ईमेल है तो कौन इस मुसीबत में पड़े। मीडियाकर्मी सिम्पल कहती हैं कि हमारा इतना बड़ा नेटवर्क है और सभी को कार्ड भेजना संभव नही है। जबकि मोबाइल और ईमेल से एक बार में एक निश्चित संख्या में लोगों को अपनी कोई भी बात पहुचाई जा सकती है। आप पैसे के साथ-साथ अपना बेशकीमती समय भी बचा सकते हैं।
चावड़ी बाजार स्थित कागज के व्यापरियों में जहां खुशी का माहौल है वहीं दूसरी ओर ग्रीटिंग कार्ड का व्यापार करने वाले व्यापरियों का धंधा काफी मंदा चल रहा है। नए टेक्रोलाजी और मोबाइल क्रांति ने पूरी तरह से लोगों को अपना दिवाना बना लिया है जिससे ग्रीटिंग कार्ड की तरफ किसी का ध्यान भी नहीं है। ग्रीटिंग कार्ड का कारोबार करने वाले रंजन कहते हैं कि अब कौन कार्ड खरीदना चाहता है, लोग अपनी उंगलियों को मोबाइल या कंप्यूटर में खटपटा कर और थोड़ा सा कष्ट देकर कुछ ही समय में लोग अपनों से बातें कर रहे हैं। आखिर कौन ऐसे में धूप में बाजार आएगा, कौन ग्रीटिंग कार्ड का पोस्ट करने के झंझट में पड़ेगा। व्यापारी लक्ष्मी जैन कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि लोग ग्रीटिंग कार्ड खरीद नहीं रहे हैं लेकिन आजकल लोगों को ब्रांड पंसद आता है। इसलिए लोग ग्रीटिंग कार्ड की खरीदारी कर भी रहे हैं तो पहले उसकी कंपनी देख रहे हैं। व्यापारी सुंदर लाल कहते हैं कि ग्रीटिंग कार्ड के कारोबार में इतनी गिरावट है कि पिछले कई सालों से ही कार्डों के उत्पादन को कम कर दिया गया है।मॉडल टाउन के निवासी तरुण चौहान कहते हैं कि कार्ड लाओ, फिर चिपकाओ, पोस्ट आफिस जाओ, लाइन लगाओ और घंटों के बाद एक कार्ड पोस्ट करने के झंझट में अब कौन पडऩा चाहेगा। जब मोबाइल और ईमेल है तो कौन इस मुसीबत में पड़े। मीडियाकर्मी सिम्पल कहती हैं कि हमारा इतना बड़ा नेटवर्क है और सभी को कार्ड भेजना संभव नही है। जबकि मोबाइल और ईमेल से एक बार में एक निश्चित संख्या में लोगों को अपनी कोई भी बात पहुचाई जा सकती है। आप पैसे के साथ-साथ अपना बेशकीमती समय भी बचा सकते हैं।
शनिवार, 22 मई 2010
डेनिम की बढती मांग
सचिन यादव बिजनेस भास्कर नई दिल्लीडेनिम की मांग से टैंक रोड स्थित डेनिम का थोक कपड़ा बाजार गर्मी के मौसम गुलजार है। ग्राहकों के लगातार बढ़ती खरीदारी करने से डेनिम के व्यापरियों में भी काफी उत्साह है। युवाओं का फैशन को लेकर किए जाने वाले नए प्रयोग और डेनिम के प्रति बढ़ती चाहत ने डेनिम के कारोबार में इस मौसम में भी जान फंूक दी है। भारत में ९० फीसदी से अधिक डेनिम की खरीदारी अंसगठित क्षेत्र से होती हैं और ब्रांडेड कंपनियों को ये सेक्टर काफी अधिक टक्कर दे रहा है। लोगों में टैंक रोड स्थित मार्केट के प्रति लगाव बढऩे का एक कारण सस्ते दामों पर अच्छी और टिकाऊ जींस का मिलना है। क्योंकि २५० से ३०० रूपये में अच्छी जींस मिल जाती है। शादीपुर से जींस की खरीदारी करनें आए आईटी प्रोफेशनल रवि कुमार बताते हैं कि इतने कम दामों में तो आज पैंट का कपड़ा भी नहीं मिलता है जबकि कई दूसरी डेनिम की जींस देने वाली कंपनियां सिर्फ टैग लगाकर ऐसे ही डेनिम जींस प्रति पीस हजार या उससे भी अधिक के दामों पर बैच रही हैं। गर्मी की छुट्टी में अपनी पॉकेट मनी बचाकर खरीदारी करनें आई बारहवीं की छात्रा मीनाक्षी इस मार्केट को अपनें बजट के हिसाब से फिट मानती हैं और कहती हैं कि यहां अब लड़कियों के लिए डेनिम की जींस की वैरायटी बहुत अधिक मात्रा में आ गई है। अब अपनें बजट के हिसाब और अपनी पंसद की जींस खरीदने में मुझे कोई दिक्कत नहीं होती है।डेनिम व्यवसायी अंकुल भल्ला बताते हैं कि पिछले साल तक गर्मी में यहां ग्राहकों की काफी कमी थी और हम लोग जल्द से जल्द शादी-ब्याह और जाड़े के मौसम का इंतजार करते थे। लेकिन इस बार उम्मीद के उलट सारे परिणाम देखने को मिल रहे हैं। साथ ही इस गर्मी के साथ इस महंगाई के मौसम भी लोग खरीदारी करने आ रहे हैं। डेनिम का एक्सपोर्ट और इम्पोर्ट का कारोबार करने वाले अजीत सिंह दूसरे राज्यों से व्यापरियों के इस मौसम में आने से काफी खुश हैं। अजीत कहते हैं कि गर्मी के मौसम में मुख्यत लोग व्यापार के लिए नहीं आते हैं। लेकिन इस बार व्यापरियों के आने से सभी व्यापरियों में काफी उत्साह है।
सोमवार, 12 अप्रैल 2010
ये आग कब ठंडी पड़ेगी
हर साल हर मौसम के कई रंग देखने को मिलते हैं.पर इस साल दिल्ली में कुछ नया ही रंग देखने को मिल रहा है. और ये रंग है आग की तेज लपटों का थोडा सा नीला और थोडा सा लाल. इस आग के रंगों में बहुतों की रोजी रोटी जल रही है. कई लोगों के आशियाँ उजड़ रहे हैं. आखिर ये आग अपना रंग क्यों दिखा रही है. २ अप्रैल को पूर्व केन्द्रीय मंत्री रामबिलास पासवान के घर आग लग जाती और गाड़ियाँ खड़े खड़े खाक हो जाती हैं. उसी दिन इन कम टैक्स विभाग में आग लगती है और कई ज़रूरी कागज आग की गर्मी मेंभस्म हो जाते हैं. ये आग अभी ठंडी होने का नाम नही लेती है और फिर ८ अप्रैल को गाजीपुर फलाई ओवर के पास गरीबों की १००० झुग्गियों को निशाना बना लेती है. आग अब हर तरफ दहक रही है और हर किसी को अपनी चपेट में लेने के लिए तैयार है. उसका अगला निशाना बनती हैं नेहरु प्लेस में खड़ी दो बसें. जिनमे अपने आप आग लग जाती है, वही दूसरी और एक आदमी की कार उसकी आखों के सामने जल जाती है. और वो कुछ नही करता, भगवन का शुक्रिया अदा करता है आग तब लगी जब वो कार में नही बैठा था. आग थापर हाउस में भी पहुँचती है. और अब आगे बढ़ते हुए. 9 अप्रैल को तुगलकाबाद के कंटेनर डिपो में करोडो रुपये का नुक्सान कर देती हैं. इसके बाद बारी थी उत्तर पाश्चिम दिल्ली की प्लास्टिक इस्क्रेप मार्केट में आग लग जाती है. ये आग बुझने का नाम नही ले रही. और लोगों की जुबान पर इतना ही भर है की ये आग कब ठंडी पड़ेगी
गुरुवार, 18 मार्च 2010
सोमवार, 15 मार्च 2010
राजस्थान का बजट 2010
राजस्थान बजट
आज के समय में आई0टी0 (सूचना तकनीकी ) का अधिकाधिक उपयोग नितांत आवश्यक है। राजकीय विभागों एवं निकायों में शिकायतों अभाव अभियोगों के पंजीकरण एवं निराकरण हेतु।राजकीय भुगतान नकद में नहीं किए जाकर बैंक अथवा डाकघर के खातों के माघ्यम से किया जाना। डिलिवरी आफ सर्विसेज में नवाचार के लिए 5 करोड़ रूपये का कोष गठित करना। सरकारी कर्मचारियों के लिए स्थानान्तरण हेतु एक स्पष्ट नीति बनाना। जनअभाव अभियोग निराकरण आयोग गठन करना जिससे लोकसेवकों से संबंधित शिकायतों पर निश्चित समयावधि में कार्रवाई हो सके। 2010-11 में योजना का आकार 23 हजार 822 करोड़ रूपये है जो कि योजना आयोग की तरफ से अनुमोदित आकार से 37 प्रतिशत अधिक है। सड़को के लिए- बी0ओ0टी0, पी0पी0पी0, टोल, वी0जी0एफ0 एवं सूओमोटो की योजना से सड़को के बनाए जाने की योजना। आरएसआरडीसी 1हजार 350 किलोमीटर की 19 सड़के बनायी जायेंगी जिसकी अनुमानित लागत 2हजार 100 करोड़ रूपये आयेगी।आरआईडीसीओआर 263 किमी की 6 सड़क बनाएगा जिसकी अनुमानित लागत 750 करोड़ आएगी।नाबार्ड के सहयोग से 160 किमी ग्रामीण सड़क बनाई जाएगी जिसकी लागत 76 करोड़ 75 लाख।ऊर्जा 2010-11 में इस क्षेत्र में 12हजार 434 करोड़ रूपये योजनागत प्रस्तावित है, जो राज्य की वार्षिक योजना का 52 प्रतिशत है।बायोमास नीति -2010 को लागू करने की योजना प्रस्तावित।
जल संसाधनजल संसाधन के लिए 777 करोड़ 58 लाख रूपये प्रस्तावित नागौर जिले के छोटे कस्बों में 40 तालाबों के पनुरूद्धार की बात।राज्य के 164 ब्लॉक ओवर एक्सप्लाईटेड , 34 ब्लॉक क्रिटीकल एवं 8ब्लॉक सेमी क्रिटीकल है। केवल 30 ब्लॉक सुरक्षित बचे हैं । इससे निपटने के लिए एक जल नीति बनाएगी जाएगी। पेयजल के लिए 2010-11 में 1 हजार 231 करोड़ रूपये प्रस्तावित।पानी में सल्फाइट और फ्लोराइड को दूर करने के लिए योजना। कलस्टर वितरण प्रणाली।
चिकित्सा और स्वास्थ्य मुख्यमंत्री बी0पी0एल0 जीवन रक्षा कोष योजना पर 65 करोड़ खर्च होने को अनुमान। वृद्धजनों के लिए जेरियाट्रिक केन्द्र स्थापित किए जायेंगे। राजस्व गांवों में 43 हजार 353 ग्राम स्वास्थय समितियां स्थापित की जायेंगी। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थय मिशन के अंतर्गत संविदा पर कार्यरत नर्सों का परिश्रमिक 4500 से बढ़ाकर 7500 किया जाएगा। एएनएम का 3500 से 5500 और टेक्निशियन 3000 से 5500 किया जाएगा। 2010 में 3 हजार 838 करोड़ रूपये की आयुर्वेद दवाइंया उपलब्ध कराई जायेगी। 1000 चिकित्सा शयाओं की मेडिकल कालेजों में बढ़ोत्तरी की जाएगी।
सामजिक न्याय अधिकारिता - निशक्तजन नीति 75 वर्ष से अधिक - 750 रूपये प्रतिमाह 75 वर्ष से कम - 500 रूपये प्रतिमाह पति और पत्नी की उम्र 75 वर्ष से अधिक होने पर 1500 रूपये और कम होने पर 1000 रूपये पेंशन दिए जाने की योजना। सामान्य श्रेणी के उत्तर मेैट्रिक के छात्रों को छात्रवृत्ति के रूप में फीस पुनर्भरण । एससी व एसटी को दिए जाने वाली पोस्टमैट्रिक योजना के अनुरूप विशेष पिछड़ेे वर्ग गुुर्जर, बंजारा, गाड़ियालुहार एवं रेबारी के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए प्रांरम्भ की जायेंगी जिसमें राज्य अधीनस्थ परीक्षओं के लिए 50,000 और अखिल भारतीय सेवाओं की परीक्षा की तैयारी के लिए एक लाख रूपये दिए जायेंगे।अल्पसंख्यक कल्याणअल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में 5 नए आईटीआई खोलनें की योजना ।दस्तकार योजना।जनजाति विकास
जनजाति के कल्याणनिधि के लिए 124 करोड़ रूपये की राशि दी जाएगी।कथोड़ी समुदाय के लिए परिवारों के लिए नाबार्ड 200 पक्के आवासों का निर्माण करेगा।
दसवीं कक्षा में 65 प्रतिशत लानें पर छात्राओं को स्कूटी।बारहवीं कक्षा में 65 प्रतिशत और स्नातक में प्रवेश के समय 20,000 रूपये और दूसरे व तृतीय वर्ष में 10,000 रूपये दिए जाएंगे। विज्ञान में रूचि पैदा करने के उद्देश्य से उदयपुर में सांईस पार्क की स्थापना की जाएगी। अंग्रेजी भाषा में अभिव्यक्ति को बेहतर बनाने के लिए 1 करोड़ 50 लाख की लागत से लिंग्वालैब की स्थापना की जाएगी। महिला एवं बाल विकास प्रसव कराने वाली महिलाओं के गरम भोजन कराने के लिए 10 करोड़ रूपये वार्षिक की योजना। रोजगार स्थापित करने के लिए 10 हजार गैर-अनुदानित महिला स्वयं सहायता समूहों (नजीओ) के ऋणों के ब्याज पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। वनक्लीन डेवलपमेंट मैकेनिज्म सेल स्थापित किया जाएगा। कुछ प्रमुख बिंदु
केन्द्र सरकार द्वारा गठित वैधनाथन कमेटी की सिफारिशों के आधार पर आवश्यक संशोधन कर दिए गए हैं। जिसके फलस्वरूप 241 करोड़ रूप्ये की राशि सहकारी बैंको को प्राप्त हो गई है। कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत 4 करोड़ की लागत से एक फिशरइज कालेज स्थापित किया जाएगा। वर्तमान में लगभग 24 हजार 500 मैट्रिक टन मत्स्य उत्पादन होता है। इस क्षेत्र में प्रशिक्षित तथा योग्य तकनीकी मानव संसाघन की कमी।
खाद्य पदार्थो की आपूर्ति के लिए शु़द्ध के लिए युद्ध अभियान ।प्रत्येक जिले में मोबाइल टेस्टिंग लैब। राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम की स्थापना। 1 मई से बीपीएल कार्डधारकों को 4.70 पैसे प्रतिकिलो की बजाए 2 रूपये प्रतिकिग्रा। इसमें कूपन व्यवस्था लागू की जाएगी और सरकार 170 करोड़ रूपये का अनुदान देगी।
सेंटर आफ एक्सीलेंस के रूप में राज्य के प्रत्येक संभाग में एक आईटीआई की स्थापना । घेरलु श्रमिक सुरक्षा अधिनियम बनाना प्रस्तावित है। चाईल्ड टेªकिंग योजना को लागू करना।
आठ नए राजकीय विधि महाविद्यालयों के निर्माण के लिए 7 करोड़, 73 लाख का बजट।
ई- सचिवालय, ई संचार पॉयलेट योजना जयपुर में लागू की जाएगी। राजस्थान इंफास्ट्रकचर डेवलपमेंट एक्ट निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए लाया जाएगा। करौली जिला पत्थर के व्यवसाय के लिए प्रसि़द्ध है। जिले में रोजगार के साधन विकसित करने की दृष्टि से मासलपुर कस्बे में स्टोन मार्ट स्थापित करना प्रस्तावित है। राज्य शहरीकरण आयोग का गठन किया जाएगा। जयपुर मेट्रो रेेल कारपोरेशन का गठन। शुरूआती बजट मंें 179 करोड़ रूपये का प्रावधान। 400 करोड़ रूपये से राजस्थान अरबन डेवलपमेंट फण्ड की स्थापना। म्ेाला अथारिटी का गठन। स्टेट डिजास्टर रेस्पोंस फोर्स का गठन । 2300 कांस्टेबलों की भर्ती। राज्य के सभी जिलों में महिला पुलिस थाने स्थापित करने की योजना। हाईकोर्ट और ज्यूडिशियल अकादमी के नए भवनों के निर्माण हेतु आगमी वर्ष में 20 करोड़ रूपये। सात परिवारिक न्यायालयों की स्थापना। टैक्स रेट को 4 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत किया जाना ।
पानी सप्लाई करने वाले टैंको पर से वैट की दर 14 से घटाकर 5 प्रतिशत करना। सभी टिकटों की कीमत 50 रूपये करना ये योजनासिर्फ यू श्रेणी का सर्टिफिकेट मिली फिल्मों के लिए होगा। तिमाही रिटर्न के समय चालान एवं दो अन्य दस्तावेज जमा करने होगें। 9 में से 6 अन्य दस्तावेजों को हटाया जाना प्रस्तावित है।
100 सीसी के दुपहिया वाहनों पर कर की दर 5 से हटाकर 4 किया जाना। 100 सीसी से अधिक के दुपहिया वाहनों पर 6 से बढ़ाकर 8 फीसदी किया जाना।
2010-11 में राजस्व व्यय 43 हजार 561 करोड़ रूपये अनुमानित है। टागामी वर्ष में राजस्व घाटा कुल राजस्व प्राप्तियों का 2.59 प्रतिशत व राजकोषीय घाटा जीएसडीपी का 3.50 प्रतिशत रहना संभावित है। प्रस्तुति- सचिन यादव
आज के समय में आई0टी0 (सूचना तकनीकी ) का अधिकाधिक उपयोग नितांत आवश्यक है। राजकीय विभागों एवं निकायों में शिकायतों अभाव अभियोगों के पंजीकरण एवं निराकरण हेतु।राजकीय भुगतान नकद में नहीं किए जाकर बैंक अथवा डाकघर के खातों के माघ्यम से किया जाना। डिलिवरी आफ सर्विसेज में नवाचार के लिए 5 करोड़ रूपये का कोष गठित करना। सरकारी कर्मचारियों के लिए स्थानान्तरण हेतु एक स्पष्ट नीति बनाना। जनअभाव अभियोग निराकरण आयोग गठन करना जिससे लोकसेवकों से संबंधित शिकायतों पर निश्चित समयावधि में कार्रवाई हो सके। 2010-11 में योजना का आकार 23 हजार 822 करोड़ रूपये है जो कि योजना आयोग की तरफ से अनुमोदित आकार से 37 प्रतिशत अधिक है। सड़को के लिए- बी0ओ0टी0, पी0पी0पी0, टोल, वी0जी0एफ0 एवं सूओमोटो की योजना से सड़को के बनाए जाने की योजना। आरएसआरडीसी 1हजार 350 किलोमीटर की 19 सड़के बनायी जायेंगी जिसकी अनुमानित लागत 2हजार 100 करोड़ रूपये आयेगी।आरआईडीसीओआर 263 किमी की 6 सड़क बनाएगा जिसकी अनुमानित लागत 750 करोड़ आएगी।नाबार्ड के सहयोग से 160 किमी ग्रामीण सड़क बनाई जाएगी जिसकी लागत 76 करोड़ 75 लाख।ऊर्जा 2010-11 में इस क्षेत्र में 12हजार 434 करोड़ रूपये योजनागत प्रस्तावित है, जो राज्य की वार्षिक योजना का 52 प्रतिशत है।बायोमास नीति -2010 को लागू करने की योजना प्रस्तावित।
जल संसाधनजल संसाधन के लिए 777 करोड़ 58 लाख रूपये प्रस्तावित नागौर जिले के छोटे कस्बों में 40 तालाबों के पनुरूद्धार की बात।राज्य के 164 ब्लॉक ओवर एक्सप्लाईटेड , 34 ब्लॉक क्रिटीकल एवं 8ब्लॉक सेमी क्रिटीकल है। केवल 30 ब्लॉक सुरक्षित बचे हैं । इससे निपटने के लिए एक जल नीति बनाएगी जाएगी। पेयजल के लिए 2010-11 में 1 हजार 231 करोड़ रूपये प्रस्तावित।पानी में सल्फाइट और फ्लोराइड को दूर करने के लिए योजना। कलस्टर वितरण प्रणाली।
चिकित्सा और स्वास्थ्य मुख्यमंत्री बी0पी0एल0 जीवन रक्षा कोष योजना पर 65 करोड़ खर्च होने को अनुमान। वृद्धजनों के लिए जेरियाट्रिक केन्द्र स्थापित किए जायेंगे। राजस्व गांवों में 43 हजार 353 ग्राम स्वास्थय समितियां स्थापित की जायेंगी। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थय मिशन के अंतर्गत संविदा पर कार्यरत नर्सों का परिश्रमिक 4500 से बढ़ाकर 7500 किया जाएगा। एएनएम का 3500 से 5500 और टेक्निशियन 3000 से 5500 किया जाएगा। 2010 में 3 हजार 838 करोड़ रूपये की आयुर्वेद दवाइंया उपलब्ध कराई जायेगी। 1000 चिकित्सा शयाओं की मेडिकल कालेजों में बढ़ोत्तरी की जाएगी।
सामजिक न्याय अधिकारिता - निशक्तजन नीति 75 वर्ष से अधिक - 750 रूपये प्रतिमाह 75 वर्ष से कम - 500 रूपये प्रतिमाह पति और पत्नी की उम्र 75 वर्ष से अधिक होने पर 1500 रूपये और कम होने पर 1000 रूपये पेंशन दिए जाने की योजना। सामान्य श्रेणी के उत्तर मेैट्रिक के छात्रों को छात्रवृत्ति के रूप में फीस पुनर्भरण । एससी व एसटी को दिए जाने वाली पोस्टमैट्रिक योजना के अनुरूप विशेष पिछड़ेे वर्ग गुुर्जर, बंजारा, गाड़ियालुहार एवं रेबारी के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए प्रांरम्भ की जायेंगी जिसमें राज्य अधीनस्थ परीक्षओं के लिए 50,000 और अखिल भारतीय सेवाओं की परीक्षा की तैयारी के लिए एक लाख रूपये दिए जायेंगे।अल्पसंख्यक कल्याणअल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में 5 नए आईटीआई खोलनें की योजना ।दस्तकार योजना।जनजाति विकास
जनजाति के कल्याणनिधि के लिए 124 करोड़ रूपये की राशि दी जाएगी।कथोड़ी समुदाय के लिए परिवारों के लिए नाबार्ड 200 पक्के आवासों का निर्माण करेगा।
दसवीं कक्षा में 65 प्रतिशत लानें पर छात्राओं को स्कूटी।बारहवीं कक्षा में 65 प्रतिशत और स्नातक में प्रवेश के समय 20,000 रूपये और दूसरे व तृतीय वर्ष में 10,000 रूपये दिए जाएंगे। विज्ञान में रूचि पैदा करने के उद्देश्य से उदयपुर में सांईस पार्क की स्थापना की जाएगी। अंग्रेजी भाषा में अभिव्यक्ति को बेहतर बनाने के लिए 1 करोड़ 50 लाख की लागत से लिंग्वालैब की स्थापना की जाएगी। महिला एवं बाल विकास प्रसव कराने वाली महिलाओं के गरम भोजन कराने के लिए 10 करोड़ रूपये वार्षिक की योजना। रोजगार स्थापित करने के लिए 10 हजार गैर-अनुदानित महिला स्वयं सहायता समूहों (नजीओ) के ऋणों के ब्याज पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। वनक्लीन डेवलपमेंट मैकेनिज्म सेल स्थापित किया जाएगा। कुछ प्रमुख बिंदु
केन्द्र सरकार द्वारा गठित वैधनाथन कमेटी की सिफारिशों के आधार पर आवश्यक संशोधन कर दिए गए हैं। जिसके फलस्वरूप 241 करोड़ रूप्ये की राशि सहकारी बैंको को प्राप्त हो गई है। कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत 4 करोड़ की लागत से एक फिशरइज कालेज स्थापित किया जाएगा। वर्तमान में लगभग 24 हजार 500 मैट्रिक टन मत्स्य उत्पादन होता है। इस क्षेत्र में प्रशिक्षित तथा योग्य तकनीकी मानव संसाघन की कमी।
खाद्य पदार्थो की आपूर्ति के लिए शु़द्ध के लिए युद्ध अभियान ।प्रत्येक जिले में मोबाइल टेस्टिंग लैब। राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम की स्थापना। 1 मई से बीपीएल कार्डधारकों को 4.70 पैसे प्रतिकिलो की बजाए 2 रूपये प्रतिकिग्रा। इसमें कूपन व्यवस्था लागू की जाएगी और सरकार 170 करोड़ रूपये का अनुदान देगी।
सेंटर आफ एक्सीलेंस के रूप में राज्य के प्रत्येक संभाग में एक आईटीआई की स्थापना । घेरलु श्रमिक सुरक्षा अधिनियम बनाना प्रस्तावित है। चाईल्ड टेªकिंग योजना को लागू करना।
आठ नए राजकीय विधि महाविद्यालयों के निर्माण के लिए 7 करोड़, 73 लाख का बजट।
ई- सचिवालय, ई संचार पॉयलेट योजना जयपुर में लागू की जाएगी। राजस्थान इंफास्ट्रकचर डेवलपमेंट एक्ट निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए लाया जाएगा। करौली जिला पत्थर के व्यवसाय के लिए प्रसि़द्ध है। जिले में रोजगार के साधन विकसित करने की दृष्टि से मासलपुर कस्बे में स्टोन मार्ट स्थापित करना प्रस्तावित है। राज्य शहरीकरण आयोग का गठन किया जाएगा। जयपुर मेट्रो रेेल कारपोरेशन का गठन। शुरूआती बजट मंें 179 करोड़ रूपये का प्रावधान। 400 करोड़ रूपये से राजस्थान अरबन डेवलपमेंट फण्ड की स्थापना। म्ेाला अथारिटी का गठन। स्टेट डिजास्टर रेस्पोंस फोर्स का गठन । 2300 कांस्टेबलों की भर्ती। राज्य के सभी जिलों में महिला पुलिस थाने स्थापित करने की योजना। हाईकोर्ट और ज्यूडिशियल अकादमी के नए भवनों के निर्माण हेतु आगमी वर्ष में 20 करोड़ रूपये। सात परिवारिक न्यायालयों की स्थापना। टैक्स रेट को 4 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत किया जाना ।
पानी सप्लाई करने वाले टैंको पर से वैट की दर 14 से घटाकर 5 प्रतिशत करना। सभी टिकटों की कीमत 50 रूपये करना ये योजनासिर्फ यू श्रेणी का सर्टिफिकेट मिली फिल्मों के लिए होगा। तिमाही रिटर्न के समय चालान एवं दो अन्य दस्तावेज जमा करने होगें। 9 में से 6 अन्य दस्तावेजों को हटाया जाना प्रस्तावित है।
100 सीसी के दुपहिया वाहनों पर कर की दर 5 से हटाकर 4 किया जाना। 100 सीसी से अधिक के दुपहिया वाहनों पर 6 से बढ़ाकर 8 फीसदी किया जाना।
2010-11 में राजस्व व्यय 43 हजार 561 करोड़ रूपये अनुमानित है। टागामी वर्ष में राजस्व घाटा कुल राजस्व प्राप्तियों का 2.59 प्रतिशत व राजकोषीय घाटा जीएसडीपी का 3.50 प्रतिशत रहना संभावित है। प्रस्तुति- सचिन यादव
शुक्रवार, 12 मार्च 2010
मीडिया में पत्रकारों का हाल
मीडिया का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है और मीडिया मालिकों की आमदनी में भी बढ़ोत्तरी हुई है। पर मीडिया में काम करने वालों पत्रकारों की आमदनी में कोई भी बढ़ोत्तरी का कोई भी पैमाना नही है। श्रमजीवी पत्रकार अधिनियम 1955 पत्रकारों के लिए बनाया गया जिसमें बदलते समय के साथ कोई भी परिवर्तन नहीं किया गया। कोई भी मीडिया संस्थान चाहे प्रिंट, रेडियो और टेलीविजन कोई भी हो, युवाओं को सपनों को तोड़ते हुए आगे बढ़ते जा रहे हैं। सभी मीडिया संस्थानों में इंटरर्नशिप के नाम पर महीनों काम कराया जा रहा है। सबसे पहले रेडियो सिटी के विषय में आप जानिए हर महीने तीन लोगों को तीन महीनें की इंटरर्नशिप पर रखता है। मजदूरो से भी बुरी तरह काम कराया जाता है क्योंकि उन्हें इन तीन महीनो में एक भी रूप्या नहीं दिया जाता है जबकि मजदूर कम से कम अपरी दिहाड़ी तो पा जाते हैं। चैनल के लोगों को कहना है कि हम थोड़ी न बुलाते हैं लोग खुद चलकर आते हैं। मतलब साफ है कि तीन महीने जमकर कर काम कराओ और फिर तीन महीने बाद नए इंटरर्न ले लो। एक इंगलिश न्यूज चैनल न्यूज एक्स लोगो को पहले इंटरर्न के नाम पर लेता है दो महीने काम लेता है और फिर बाहर का रास्ता दिखा देता है। मीडिया की पढ़ाई करने वाले को साफ बता देना चाहिए कि यह एक व्यावसायिक पाठ्यक्रम है। पढ़ाने वाले को साफ तस्वीर रखनी चाहिए। इसी बात को लेकर मेरी कई बार हमारे पूर्व शिक्षकों से काफी बात हो चुकी है। बात स्नातक के स्तर पर पत्रकारिता को लेकर थी हमनें साफ कह दिया कि स्नातक में पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद कम से कम ये तो समझ जाता है कि वो खुद पत्रकारिता कर पाएगा या नहीं। बल्कि जिनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है और पोस्ट गेएजुएट स्तर पर ही पत्रकारिता करने के बाद अपना सिर पीटते नजर आते हैं। एक सुनिश्चित करियर लोगों के लिए दूसरी राह भी खोलता है पर यहाँ एक करियर ही सुनिश्चित नजर नहीं आता है। कुछ समय पहले लोगों को मीडिया से आर्थिक मंदी के नाम पर जमकर निकाला गया। यही नहीं समूह के विस्तार के नाम पर सिर्फ़ 150 लोगों को सीएनबीसी आवाज से निकाल दिया गया। एक काम ये भी तो किया जा सकता था कि उनकी सैलरी को घटा दिया जाता। कम से कम सड़क पर आने से पहले अपने और अपने परिवार के लिए कुछ तो इंतजाम कर लेते। आपका परिवार आप पर निर्भर रहता है और आप मीडिया मालिकों पर जो पता नहीं कब लात मार कर आप को निकाल दें। आप अंग्रेजी और हिंदी के मीडिया में भी ये अंतर देख सकते हैं। लाभ सबसे ज्यादा हिंदी के मालिक कमा रहे हैं और वेतन के मामले में अंग्रेजी अखबारों से मीलों दूर दिखते हैं। काम करने की आजादी भी अंग्रेजी वाले दे रहे हैं। गलती हमसे ही कही हुई है कि हम क्यों नहीं समझ पाए कि क्या कुछ हमारे साथ हो रहा है । कट, कापी और पेस्ट की दुनिया अब सिमटी हुई तो नजर आती है पर हर सख्स परेशान सा क्यों है इसको समझना आसान होकर भी मुश्किल होता जा रहा है। देश के बाकी तीन खम्भों की हर प्रक्रिया सुनिश्चित की गयी है आखिर चोथे खम्बे के अर्थात क्यों पत्रकारिता में पत्रकारों की जॉब के लिए कोई नियम कानून क्यों नही बनाये गए हैं।
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