अब कल दो दिन बाद गाँधी जयंती माननी है लोगो को। इस दिन का काफ़ी इंतज़ार रहता है। २००७ मई जब लगे रहो मुन्ना भाई को रेअलेअसे किया गया था। उस फ़िल्म मई ड्राई डे का कांसेप्ट आया था। जी हा जब मुन्ना बापू से इम्प्रेस होकर दो ओक्ट्बेर को ड्राई डे मानने को कहता है। वैसे इस ड्राई डे को गाँधी जयंती के दिन मुन्ना को भा गया। तब से गाँधी जयंती बोले तो ड्राई डे का संवाद परसिद्ध हो गया। अब बात करते है की क्या वास्तव में इस तरह की कांसेप्ट की बात लोगो के दिमाग में है की लोग उसको और कुछ ही samagh baaithe है। humane अपने dosto say बात की तो उन्होंने बताया की holidays पर shop close हो जाती है इसका means यह thodi न है की हमको आज का दिन ड्राई डे के किए celebarte करना है। हमारा तो jugaad रहता है waise भी holidays को tho इसकी dimand अपने आप ही बढ़ जाती है और लोग black maaine sell करते है। mere भाई यह इंडिया है yaha woh सब कुछ हो सकता जो others country में सोच भी नही सकते है। जी हाँ अब यह gaahigiri का जमाना नही है। मुन्ना भाई भी अब इस दिन को भी kubh celebrate करते hoge। gadhi जयंती बोले तो ड्राई डे नही बोले तो chuuti का दिन। अब आज मैंने भी फ़ैसला किया है ड्राई को में भी celebrate karooga अगर आप जानता chaate है की किस तरह tho thodha नीचे देखना पड़ेगा
अब आज से chai छोड़ dogna लेकिन गाँधी जयंती के बाद ।
इस को क्या कह सकते हैं जिंदगी में दोस्तों का साथ होना कितना जरूरी होता है. हम सभी अपने काम में बिजी होने के कारण अपने दोस्तों को समय नहीं दे पाते हैं. जिन्होंने हमारे कठिन मोड़ पर हमारा साथ दिया था उन सबको भूल जाते हैं. जिंदगी की उड़ान में दोस्त उन पंखों सरीखे होते हैं जिनके बिना कोई भी उड़ान पूरी नहीं की जा सकती है. शब्द कम पड़ सकते हैं लेकिन उस दोस्ती को किसी भी चीज़ से तौला नहीं जा सकता है...
मंगलवार, 30 सितंबर 2008
रविवार, 27 अप्रैल 2008
मेरे अपने
क्या इस यूनिवर्सिटी को कभी भुलाया जा सकता है जहा हमको इतना कुछ पता चलता है की आप क्या है ? क्यो कभी इस यूनिवर्सिटी को छोड़ने का मन तक नही करता है । शायद इतना प्यार भी अच्छा नही है किसी को इतना प्यार करो लेकिन यह मैंने बहुत कुछ पाया है इसलिए मेरा पहला प्यार मेरी यूनिवर्सिटी ही है.
रविवार, 20 अप्रैल 2008
दोस्ती
दोस्ती बन्धन है, स्वार्थ है या फिर एक एहसास है। आख़िर क्या है, क्यो है और कैसे है दोस्ती दोस्तो की मजबूत दोस्ती को देखा है, परखा है और जाना भी है फिर भी सीने मैं एक shool chubtaa है की क्यो किसी ने mughe अपना नही mana है shayad दोस्ती सिर्फ़ नाम लेने से पता नही chalti है, दो दोस्तो या उनके दोस्तो को मिलन भी देखा है , और मजबूत दोस्तो को कुछ lamho मैं दूर होते देखा है मैंने, कभी aham और tho कभी समय दोस्तो के saiyam की parichaa लेता है, कुछ के समय मैं aham aur kuch ke mai me samay bhaari pad jaata hai, judai किसी को भी achi नही लगती है, फिर भी लोग मिलने के लिए pahal करने से katrate hai , kaiyo ko milana chahaa है उनके दिल और dimag मैं एक कनेक्शन baithana chahaa , है , फिर भी कही न कही उनका aham उनकी दोस्ती पर भारी पड़ jatta है , जो अपना था कुछ समय main paraya ho jaata hai, koshish tho nirantar rahti hai ki asma ko dharti se mila doo, do door ho gayi nadiyo ka sangam kara doo, एक को ganga tho dusari को yamuna bana doo, क्या तुम doge मेरा साथ , अगर हा tho aao चलते है,pargati के path पर निरंतर आगे बढ़ते है।
रविवार, 30 मार्च 2008
अगर पैसा न होता
अगर इस दुनिया ने कभी पैसा न देखा होता उस समय कितना अच्छा होता, न लोग आपसी रंजिश रखते । आज पैसे के लिए अपने पराये हो जाते है। लोग खाना नही खा paate है पता नही कब यह पैसे की bhuk khatam होगी। अगर पैसा न होता
1। dikhave की जिंदगी न होती
२ कोई ameer और कोई gareeb नही होता।
३। लोग एक dusare की इज्जत करते।
४ उस समय talent को kharida न ja सकता।
५ पैसा दुनिया न banata न bigaadta
अभी यह sabh dikhave की जिंदगी चल रही है। और जिसमे kudh को peechey नही छोड़ पाया हो। कभी कभी सोचता hu .इंसान से payre janwar होते है। न यह दुनिया badlegi और न ही लोग । मस्त ram मस्ती मी aag लगे बस्ती मी/
1। dikhave की जिंदगी न होती
२ कोई ameer और कोई gareeb नही होता।
३। लोग एक dusare की इज्जत करते।
४ उस समय talent को kharida न ja सकता।
५ पैसा दुनिया न banata न bigaadta
अभी यह sabh dikhave की जिंदगी चल रही है। और जिसमे kudh को peechey नही छोड़ पाया हो। कभी कभी सोचता hu .इंसान से payre janwar होते है। न यह दुनिया badlegi और न ही लोग । मस्त ram मस्ती मी aag लगे बस्ती मी/
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