सोमवार, 19 नवंबर 2012

श्रमिकों के काम के घंटे नए सिरे से तय होंगे

सचिन यादव नई दिल्ली | Nov 19, 2012, 00:34AM IST
 

 

कमेटी एक महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी

शोषण - श्रमिकों से कार्यावधि के बाद अतिरिक्त समय में काम कराने पर अतिरिक्त भुगतान को लेकर उद्यमियों को परेशानी है। कई बार आठ घंटे की शिफ्ट में काम करने के बाद भी श्रमिक को आधे से एक घंटे अतिरिक्त काम करना पड़ता है। इसके लिए श्रमिकों को दोगुना भुगतान करने का प्रावधान है।

औद्योगिक इलाकों में श्रमिकों के काम के घंटे नए सिरे से तय करने के लिए दिल्ली सरकार के श्रम विभाग ने एक स्पेशल कमेटी बनाई है जो एक महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। इस कमेटी में श्रम विभाग के अधिकारी, औद्योगिक संगठनों और श्रमिकों के प्रतिनिधि होंगे।

राजधानी दिल्ली के औद्योगिक इलाकों में श्रमिकों के काम करने के समय को लेकर अपैक्स चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ एनसीटी से जुड़े लोग श्रम मंत्री डा.ए.के.वालिया से 16 नवंबर को मिले थे। इस चैंबर ने श्रमिकों को होने वाली दिक्कतों को लेकर एक ज्ञापन भी श्रम मंत्री को सौंपा है।

अपैक्स चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ एनसीटी के उपप्रमुख रघुवंश अरोड़ा ने बताया कि श्रमिकों के काम करने के समय और अतिरिक्त समय में काम कराने पर पैसे के भुगतान को लेकर उद्यमियों को काफी दिक्कत है। कई बार आठ घंटे की शिफ्ट में काम करने के बाद श्रमिक को आधे से एक घंटे अतिरिक्त काम करना पड़ता है।

इसके लिए श्रमिकों को दोगुना भुगतान करने का प्रावधान है। ऐसे नियमों को आज भी व्यवहारिक रूप से लागू नहीं किया जा सका है इसलिए हमने श्रम मंत्री से कहा है कि ऐसे नियम बनाएं जिनका पालन किया जा सके।

उन्होंने बताया कि श्रमिकों के काम करने के समय को बढ़ाने को लेकर श्रम विभाग ने 28 अगस्त को हुई बैठक पर अपनी सिफारिश दी थी। उन्होंने अफसोस जताया कि दिल्ली में श्रमिकों की तनख्वाह भी व्यावहारिक तरीके से लागू नहीं है। क्या जितनी तनख्वाह सरकार ने लागू की है, वह श्रमिकों को मिल रही है ? अगर नहीं मिल रही है तो ऐसे निर्णय से क्या फायदा? श्रमिकों की तनख्वाह में बढ़ोतरी से संबंधित मामला हाईकोर्ट भी अभी विचाराधीन है। अरोड़ा ने बताया कि औद्योगिक इलाकों में श्रमिकों के काम के घंटे निर्धारित करने के लिए दिल्ली सरकार के श्रम विभाग ने एक स्पेशल कमेटी बनाई है।

उम्मीद है कि कमेटी एक महीने में अपनी रिपोर्ट सौंप देगी। इस कमेटी में दिल्ली सरकार के श्रम विभाग के अधिकारी, औद्योगिक संगठन और श्रमिकों के प्रतिनिधि होंगे। चैंबर में लेबर रिलेशन कमेटी के चेयरमैन रामानंद गुप्ता ने श्रमिकों और उद्यमियों के बीच आपसी तालमेल बैठाने के लिए श्रम विभाग से नियमों में ढील देने के लिए कहा है। इससे सरकारी निर्णयों को लागू करने में आसानी होगी और बिना कानून तोड़े सभी उद्यमी नियमों का पालन कर सकेंगे।
http://business.bhaskar.com/article/working-hours-of-workers-will-be-renewed-4054901.html

गुरुवार, 15 नवंबर 2012

मैनेजमेंट संस्थानों में प्रवेश परीक्षा पर रोक

सचिन यादव नई दिल्ली | Nov 16, 2012, 00:35AM IST
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एआईसीटीई का नया नियम अगले सत्र से लागू

चेतावनी - एआईसीटीई के इस निर्णय का पालन सभी संबंधित संस्थानों के लिए जरूरी है अन्यथा ऐसे पाठ्यक्रमों पर एआईसीटीई की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। बिना प्रवेश परीक्षा के माध्यम से मैनेजमेंट पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले अभ्यर्थी ही इसके जिम्मेदार होंगे।

कार्रवाई - मान्य प्रवेश परीक्षाओं के अलावा किसी अन्य परीक्षा के जरिए मैनेजमेंट कोर्सेज में एडमिशन लेने वाले छात्रों को अयोग्य घोषित किया जाएगा। ऐसे डिप्लोमा को भी अमान्य घोषित किया जाएगा।

मैनेजमेंट पाठ्यक्रमों में बिना प्रवेश परीक्षा के एडमिशन लेने वाले छात्रों आल इंडिया काउंसिल ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) ने आगाह किया है। एआईसीटीई ने मैनेजमेंट पाठ्यक्रमों में एडमिशन लेने वाले छात्रों को सार्वजनिक सूचना के माध्यम से सूचित करते हुए कहा है कि मैनेजमेंट पाठ्यक्रमों में कैट, मैट, एक्स-ऐट, जी-मैट प्रवेश परीक्षा के माध्यम से ही प्रवेश लिया जा सकता है।

एआईसीटीई के इस निर्णय का पालन करना सभी सभी संबंधित संस्थानों के लिए जरूरी है अन्यथा ऐसे पाठ्यक्रमों को लेकर एआईसीटीई की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। साथ ही, बिना प्रवेश परीक्षा के माध्यम से मैनेजमेंट पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले अभ्यर्थी ही इसके जिम्मेदार होंगे।

उपरोक्त प्रवेश परीक्षाओं के अलावा किसी अन्य परीक्षा के माध्यम से मैनेजमेंट कोर्सेज में एडमिशन लेने वाले छात्रों को अयोग्य घोषित किया जाएगा। साथ ही, संस्थान द्वारा दिए जाने वाला डिप्लोमा को भी अमान्य घोषित किया जाएगा। इसके अलावा, ऐसे पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने वाले संस्थानों के खिलाफ एआईसीटीई के नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

एआईसीटीई के चेयरमैन एस.एस.मंथा ने बिजनेस भास्कर को बताया कि वर्ष 2013-14 के लिए मैनेजमेंट पाठ्यक्रमों जैसे पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन एक्जीक्यूटिव मैनजेमेंट , पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन कॉरपोरेट मैनेजमेंट में प्रवेश के लिए कई संस्थानों ने विज्ञापन दिए हैं जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने 1 मार्च, 2012 के निर्णय में सभी संस्थानों को उपरोक्त प्रवेश परीक्षाओं के माध्यम से ही मैनेजमेंट पाठ्यक्रमों में प्रवेश देने के लिए कहा है।

ऐसे में इस समय जो भी संस्थान अपनी प्रवेश परीक्षा का आयोजन कर रहे है, वह सीधे तौर पर सुप्कीम कोर्ट के निर्णय की अवमानना कर रहे हैं।  मंथा ने कहा कि 2013-14 के सत्र में मैनेजमेंट पाठ्यक्रमों में एडमिशन लेने के इच्छुक छात्रों को एआईसीटीई के नियम मानने होंगे। एआईसीटीई के नियमों को न मानने वाले छात्र और संस्थान खुद ही इसके जिम्मेदार होंगे।
http://business.bhaskar.com/article/management-institutions-entrance-test-ban-4043485.html

मंगलवार, 6 नवंबर 2012

महंगे बेचे जा रहे हैं ड्राई फ्रूट

आकर्षक पैकिंग में महंगे बेचे जा रहे हैं ड्राई फ्रूट

सचिन यादव नई दिल्ली | Nov 06, 2012, 01:10AM IST
 
 

इस कारोबार में नामी ब्रांड भी बाजार में उतरे

फिर भी भीड़ - बीते वर्ष की तुलना में इस वर्ष ड्राई फ्रूट की कीमतों में 15-25 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। इसके बावजूद बाजार में ड्राईफ्रूट  के प्रति लोगों की चाहत बढ़ती जा रही है। पिछले एक सप्ताह से इसके ग्राहकों को अच्छी खासी भीड़ है बाजारों में। सोमवार को भी ग्राहकों की अच्छी भीड़ थी।

पैकेजिंग का खेल - पैकेजिंग के सहारे 2.50 किलोग्राम तक ड्राई फ्रूट के पैक को 2,800 रुपये की लागत में बेचा जा रहा है जबकि बाजार में इस पैकेजिंग वाले ड्राई फ्रूट पैक की कीमत 1,500 रुपये से अधिक नहीं है। एक किलो ड्राई फ्रूट के नामी ब्रांड 1,230 रुपये ग्राहकों से वसूल कर रहा है।

पैकेजिंग के सहारे एनसीआर में कुछ नामी ब्रांड सस्ते ड्राई फ्रूट को महंगा कर बाजार में ग्राहकों को बेच रहे हैं। पैकेजिंग के सहारे 2.50 किलोग्राम तक ड्राई फ्रूट के पैक को 2,800 रुपये की लागत में बेचा जा रहा है जबकि बाजार में इस पैकेजिंग वाले ड्राई फ्रूट पैक की कीमत 1,500 रुपये से अधिक नहीं है। एक किलो ड्राई फ्रूट के नामी ब्रांड 1,230 रुपये ग्राहकों से वसूल कर रहा है। चांदनी चौके में हल्दीराम के स्टोर पर ऐसे पैकेजिंग पैक की भरमार है। मजेदार की बाते है कि ग्राहकों को छला जा रहा है मगर वे इस पर अपनी आपत्ति भी दर्ज नहीं करा रहे।

पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष ड्राई फ्रूट की कीमतों में 15-25 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। इसके बावजूद बाजार में ड्राईफ्रूट  के प्रति लोगों की चाहत बढ़ती ही जा रही है। पिछले एक सप्ताह के दौरान खारी बावली में ग्राहकों को अच्छी खासी भीड़ उमड़ी है। खारी बावली में लाहौर ड्राई फ्रूट के प्रोपराइटर राकेश चावला ने बताया कि सोमवार का दिन होने के बावजूद आज बाजार में ग्राहकों की अच्छी भीड़ देखने को मिल रही है।

ग्राहकों का रुझान भी मिठाई से हटकर ड्राईफ्रूट की तरफ हुआ है। खारी बावली थोक बाजार में अमेरिकन बादाम का भाव 460-500 रुपये प्रति किलो के स्तर पर है जो पिछले साल दीवाली पर 400-425 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिका था।

इसके अलावा, काजू का भाव भी पिछले साल की तरह 850 रुपये प्रति किलो के स्तर पर चल रहा है। पिस्ता के भाव में भी 150 रुपये प्रति किलो की तेजी आ गई है। दिल्ली ड्राई फ्रूट बाजार में ईरानी पिस्ता का भाव पिछले साल के 600 रुपये के स्तर पर बढ़कर 750 रुपये प्रति किलो हो गया है।
अमेरिकी पिस्ता 500 रुपये से बढ़कर 650 रुपये प्रति किलो में बिक्री की जा रही है। किशमिश का भाव पिछले एक महीने में 220-250 रुपये से बढ़कर 200-325 रुपये प्रति किलो हो गया है।

खारी बावली थोक बाजार में ड्राई फ्रूट्स के थोक कारोबारी रमेश शर्मा ने बताया कि पिछले दो सालों से लगातार ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में तेजी दर्ज की जा रही है। अभी बाजार में ड्राई फ्रूट की मांग अच्छी आ रही है। उम्मीद है कि आगे के दिनों भी मांग अच्छी रहेगी क्योंकि सर्दियों में अक्सर मांग बढ़ जाती है।
http://business.bhaskar.com/article/dry-fruits-are-sold-in-attractive-packing-expensive-4013037-NOR.html

शनिवार, 3 नवंबर 2012

सिर्फ19% इंजीनियरिंग कॉलेज ही निकले मानकों पर खरे

सिर्फ19% इंजीनियरिंग कॉलेज ही निकले मानकों पर खरे

  Sachin Yadav नई दिल्ली | Nov 03, 2012, 01:18AM IST
 
 
 
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 ''ये आंकड़े देखकर वाकई मैं खुश नहीं हूं। लेकिन देश में अब तक इस तरह का कोई भी सर्वेक्षण नहीं किया गया है। इस सर्वेक्षण की जरिए हम यह जान पाएंगे कि हमें इंजीनियरिंग शिक्षा के क्षेत्र में कहां पर हस्तक्षेप करना है। अभी देश में 3,600 इंजीनियरिंग संस्थान हैं जबकि पिछले पांच वर्षों के दौरान इस संख्या में से 50 फीसदी संस्थान खुले हैं।
एस.एस.मंथा एआईसीटीई चेयरमैन

शुरुआती नतीजे - इस सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वाले 156 इंजीनियरिंग कॉलेज में से 28 कॉलेजों ने उच्च स्तर इंडेक्स स्कोर 46 से अधिक प्राप्त किया है। मध्यम स्तर इंडेक्स स्कोर 15-46 प्राप्त करने वालों की संख्या 99 है जबकि लो लेवल इंडेक्स स्कोर 15 से कम प्राप्त करने वाले संस्थानों की संख्या 29 है। अभी यह शुरुआती चरण के नतीजे है ।

सर्वेक्षण क्यों - सर्वेक्षण से पता चला कि देश भर में दस वर्ष से पुराने इंजीनियरिंग संस्थानों की संख्या सिर्फ1,070 है जबकि सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वाले संस्थानों की संख्या मात्र 156 थी जोकि मौजूदा इंजीनियरिंग संस्थानों की संख्या का मात्र 14.6 फीसदी है। बहरहाल, सर्वेक्षण से इन संस्थानों में शिक्षा की गुणवत्ता का पता चला।

क्या दे शके पुराने इंजीनियरिंग कॉलेजों की शिक्षा में गिरावट आ रही है?एक सर्वेक्षण से पता चला है कि दस वर्ष से पुराने इंजीनियरिंग संस्थानों में मात्र 19 फीसदी संस्थान ही उच्च स्तर के हैं। देश भर में इंजीनियरिंग शिक्षा को लेकर कॉलेजों की गुणवत्ता जानने के लिए एआईसीटीई और सीआईआई की और से आयोजित ऑनलाइन सर्वेक्षण के नतीजों में यह बात सामने आई है ।

इस सर्वेक्षण में 31 अगस्त, 2012 की अवधि तक 10 वर्ष पुराने और इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, केमिकल, सिविल और कंप्यूटर व आईटी में से कम से कम तीन ट्रेड में दाखिला देने वाले इंजीनियरिंग संस्थान हिस्सा ले सकते थे। एआईसीटीई और सीआईआई दोनों ने इंडस्ट्री लिंक्ड इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूशन 2012 सर्वेक्षण का आयोजन किया था। इस सर्वेक्षण की जानकारी सभी संस्थानों को पहले ही दे दी गई थी।

एआईसीटीई और सीआईआई की ओर से आयोजित इस सर्वेक्षण में ऑनलाइन हिस्सा लेने के लिए इंजीनियरिंग संस्थानों को 7 जून से 7 सितंबर के दौरान गवर्नेंस, पाठ्यक्रम, फैकल्टी, इंफ्रास्ट्रक्चर, सर्विसेज, प्लेसमेंट, सोशल डेवलपमेंट से संबंधित जानकारी ऑनलाइन अपलोड करनी थी।

सर्वेक्षण के मुताबिक पता चला कि देश भर में दस वर्ष से पुराने इंजीनियरिंग संस्थानों की संख्या संख्या 1,070 है जबकि सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वाले संस्थानों की संख्या मात्र 156 है जोकि मौजूदा इंजीनियरिंग संस्थानों की संख्या का मात्र 14.6 फीसदी है। सर्वेक्षण में पूरे देश में सेंट्रल जोन जिसके अंदर मध्य प्रदेश, गुजरात और छत्तीसगढ़ राज्य आते है, वहां इंजीनियरिंग संस्थानों की संख्या 76 है जबकि इस सर्वेक्षण में मात्र 11 इंजीनियरिंग संस्थानों ने हिस्सा लिया।

इसी तरह पूर्वी जोन में पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, झारखंड में 79 संस्थान है जिसमें से 10 संस्थानों ने प्रतिभाग किया। इस सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वाले 156 इंजीनियरिंग कॉलेज में से 28 कॉलेजों ने उच्च स्तर इंडेक्स स्कोर 46 से अधिक को प्राप्त किया है। मध्यम स्तर इंडेक्स स्कोर 15-46 प्राप्त करने वालों की संख्या 99 है जबकि लो लेवल इंडेक्स स्कोर 15 से कम प्राप्त करने वालों की संख्या 29 है। अभी यह पहले चरण के नतीजे है । इस सर्वेक्षण की फाइनल रिपोर्ट 8 नवंबर को सीआईआई द्वारा आयोजित चौथी ग्लोबल हायर एजुकेशन समिट दिल्ली में पेश की जाएगी।

''यूनेस्को की रिपोर्ट के मुताबिक चीन में रिसर्च एंड डेवलपमेंट क्षेत्र में 16 लाख इंजीनियर कार्यरत हैं जबकि भारत में मात्र 3.6 लाख इंजीनियर ही इस क्षेत्र में कार्यरत हैं। योग्य इंजीनियर्स की कमी देश में है। इस सर्वेक्षण के जरिए 156 इंजीनियरिंग संस्थान की अच्छाई और खामियां सामने आएंगी। आजादी के बाद से पहली बार देश में ऐसा सर्वेक्षण हुआ है। इस सर्वेक्षण में आगे बहुत सी नई चींजे जोड़ी जाएंगी।
पी.राजेन्द्रन-एनआईआईटी सह-संस्थापक, चेयरमैन नेशनल कमेटी हायर एजुकेशन सीआईआई



http://business.bhaskar.com/article/only-19-engineering-colleges-live-up-to-the-standards-set-out-4001624-NOR.html



सोमवार, 15 अक्टूबर 2012

बिल्डिंग प्लान मंजूर न होने से फिर अटका बपरौला का केबीआई पार्क

सचिन यादव नई दिल्ल� | Oct 12, 2012, 02:12AM IST
 

 

 डीएसआईडीसी ने इस पार्क के निर्माण पर 1,800 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान लगा रखा है। इससे 100,000 लोगों को सीधे जबकि 170,000 लोगो को अपरोक्ष रूप से रोजगार मिलेगा।

कई इंडस्ट्रीज - डीएसआईआईडीसी की ओर से शुरूआत में 1,450 करोड़ की लागत से वाले बहुप्रतिक्षित बपरौला नॉलेज बेस्ड इंडस्ट्रियल पार्क के निर्माण करने की योजना थी। दिल्ली सरकार ने इस पार्क में आईटी, आईटीईएस और मीडिया समेत कई अन्य इंडस्ट्रीज को लगाने की योजना बना रखी है।

बिल्डिंग प्लान पास न होने के चलते एक बार फिर दिल्ली सरकार की बहुप्रतीक्षित बपरौला नॉलेज बेस्ड इंडस्ट्रियल पार्क बनाने की योजना अधर में पड़ गई है। बपरौला नॉलेज बेस्ड इंड्रस्ट्रियल पार्क का काम जुलाई 2012 में शुरू होना था लेकिन बिल्डिंग प्लान पास न होने से इस योजना का निर्माण कार्य अभी नहीं शुरू हो पाया है।

दिल्ली राज्य औद्योगिक व अवसंरचना विकास निगम (डीएसआईआईडीसी) के इस प्रोजेक्ट का ले आउट प्लान पास हो चुका है। लेकिन बिल्डिंग प्लान को मंजूरी न मिलने के चलते अभी इस प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है।

डीएसआईआईडीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि केबीआई पार्क के लिए 26 मीटर ऊंची बिल्डिंग बनाने की अनुमति मांगी है। पर नेशनल बिल्डिंग कोड के नियमों के मुताबिक 18 मीटर से ज्यादा बड़ी बिल्डिंग बनाने की अनुमति ने होने के कारण मामला केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय में पहुंच गया है। इस परियोजना के लिए मंत्रालय ने अभी एक कमेटी का गठन किया है।

अब इस पर लोगों के सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे और उसके बाद जाकर इस परियोजना को मंजूरी मिलेगी। अधिकारी ने बताया कि कम से कम छह से सात माह बाद ही यह प्रोजेक्ट शुरू हो पाएगा। इससे पहले दिल्ली स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड द्वारा बनवाए जाने वाले बपरौला नॉलेज बेस्ड इंडस्ट्रियल पार्क के मॉडल का चयन तय भी समय सीमा तक नहीं हो पाया था।

डीएसआईआईडीसी द्वारा शुरूआत में 1,450 करोड़ की लागत से वाले बहुप्रतिक्षित बपरौला नॉलेज बेस्ड इंडस्ट्रियल पार्क के निर्माण करने की योजना थी। दिल्ली सरकार ने वित्त वर्ष 2012-13 के बजट में इस नॉलेज बेस्ड इंडस्ट्रियल पार्क के निर्माण के लिए 1,800 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। इस पार्क में आईटी, आईटीईएस और मीडिया समेत कई अन्य इंडस्ट्रीज को लगाने की योजना है। 

डीएसआईआईडीसी ने वर्ष 2006 में दिल्ली सरकार के ग्रामीण विकास निदेशालय से बपरौला में 130.7 एकड़ जमीन का अधिग्रहण 99 साल की लीज पर बपरौला नॉलेज बेस्ड इंडस्ट्रियल पार्क को स्थापित करने के लिए किया था। डीएसआईआईडीसी के बपरौला में नॉलेज बेस्ड इंडस्ट्रियल पार्क को स्थापित करने के प्रस्ताव को दिल्ली सरकार की मंजूरी भी मिल चुकी है। डीएसआईआईडीसी ने इसके लिए 70.6 एकड़ जमीन के दो भागों क्रमश 65.62 एकड़ व 4.99 एकड़ में नॉलेज बेस्ड इंडस्ट्रियल पार्क का नांगलोई-नजफगढ़ रोड पर निर्माण करने का निर्णय किया है।

इस पार्क के पहले फेज में होने वाले डेवलपमेंट वर्क को अगस्त 2012 ,बिल्डिंग वर्क को दिसंबर 2012, दूसरे फेज में होने वाले बिल्डिंग वर्क को अप्रैल 2014 व  तीसरे फेज में बिल्डिंग वर्क व बचे हुए काम को करने को पूरा करने की अंतिम तिथि दिसंबर 2014 थी लेकिन अब परियोजना की रफ्तार देखते हुए समय पर इस पार्क निर्माण कार्य पूरा होना संभव नहीं है।

गुरुवार, 11 अक्टूबर 2012

औद्योगिक इलाकों में होने चाहिए हाउसिंग प्रोजेक्ट

सचिन यादव नई दिल्ल� | Oct 10, 2012,
 
जमीन की कमी से निपटने के साथ-साथ औद्योगिक इलाकों में एक ही स्थान पर सभी सुविधाएं लोगों को उपलब्ध हो जाएं, इसके लिए दिल्ली राज्य औद्योगिक अवसंरचना विकास निगम (डीएसआईआईडीसी) ने डीडीए को औद्योगिक इलाकों में हाउसिंग प्रोजेक्ट होने चाहिए। डीएसआईआईडीसी ने बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में हाउसिंग प्रोजेक्ट शुरू करने के साथ औद्योगिक इलाकों की कनेक्टिविटी को भी मेट्रो से जोडऩे संबंधित प्रस्ताव डीडीए को दिया है।

डीएसआईआईडीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दिल्ली में जमीन की कमी से निपटने के लिए अभी से ही इंतजाम करने होंगे। इसके लिए औद्योगिक इलाकों को सर्विस इंडस्ट्री के तौर पर भी विकसित किया जाएं।

अधिकारी ने बताया कि अगर औद्योगिक इलाकों में आईटी, बीपीओ और केपीओ सेंटर स्थापित किया जाए, साथ ही हाउसिंग प्रोजेक्ट भी शुरू किए जाएं तो वहां लोगों को परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी। लोग अपनी सुविधा अनुसार इंडस्ट्रियल क्षेत्रों में शुरू हुई हाउसिंग प्रोजेक्ट में भी रह सकेंगे। इससे शहर में बढ़ते अधिक जनसंख्या घनत्व को कम करने में भी मदद मिलेगी। इसके अलावा औद्योगिक इलाकों में इमारतों की ऊंचाई बढ़ाने को लेकर भी मास्टर प्लान-2021 में संशोधन करने को कहा गया है।

इमारतों की ऊंचाई के कारण कई प्रोजेक्ट के बिल्डिंग प्लान पारित नहीं हो पाते हैं। इससे प्रोजेक्ट के पूरे होने की अवधि बढ़ जाती है। इसके साथ ही बसों के अलावा दूसरे ट्रांसपोर्ट के साधनों के जरिए औद्योगिक इलाकों का यातायात बढिय़ा हो, इसको भी मास्टर प्लान-2021 में शामिल करने के लिए कहा गया है। दिल्ली विकास प्राधिकरण मास्टर प्लान-2021 को पिछले कई वर्षों से तैयार कर रही है लेकिन अभी तक मास्टर प्लान तैयार नहीं हो पाया है।
इनका भी सुझाव
औद्योगिक इलाकों में इमारतों की ऊंचाई बढ़ाने को लेकर भी मास्टर प्लान-2021 में संशोधन करने को कहा गया है। इमारतों की ऊंचाई के कारण कई प्रोजेक्ट के बिल्डिंग प्लान पारित नहीं हो पाते हैं। इससे प्रोजेक्ट के पूरे होने की अवधि बढ़ जाती है। इसके साथ ही बसों के अलावा दूसरे ट्रांसपोर्ट के साधनों के जरिए औद्योगिक इलाकों का यातायात बढिय़ा हो, इसको भी मास्टर प्लान-2021 में शामिल करने के लिए कहा गया है।
http://business.bhaskar.com/article/housing-projects-in-industrial-areas-should-be-3900859.html

दिल्ली में कम बिजली खपत करने वालों को राहत संभव


सचिन यादव नई दिल्ल� | Oct 09, 2012,
 
 

छूट संभव - बिजली यूनिट के स्लैब में बढ़ोतरी की जा सकती है। इस बढ़ोतरी के बाद अब तक 200 यूनिट तक बिजली की खपत करने वाले उपभोक्ताओं के बिल में अधिकतम 20 फीसदी तक और 300 यूनिट से अधिक प्रयोग करने वाले लोगों को 5 फीसदी तक बिजली बिल कम आ सकता है।

महंगी बिजली और मनमाने बिजली बिलों से जूझती दिल्ली की जनता को जल्द ही थोड़ी राहत मिल सकती है। बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए बिजली टैरिफ स्लैब में निश्चित यूनिट की संख्या में बढ़ोतरी की जा सकती है।

अगर दिल्ली सरकार 200 यूनिट से ऊपर उपभोग करने वाले उपभोक्ताओं को सब्सिडी देती है तो और भी अधिक राहत मिल सकती है। दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (डीईआरसी) के चेयरमैन पी.डी.सुधाकर ने सोमवार को बताया कि बिजली यूनिट के स्लैब में बढ़ोतरी की जा सकती है।

इस बढ़ोतरी के बाद अब तक 200 यूनिट तक बिजली की खपत करने वाले उपभोक्ताओं के बिल में अधिकतम 20 फीसदी तक और 300 यूनिट से अधिक प्रयोग करने वाले लोगों को 5 फीसदी तक बिजली बिल कम आ सकता है।

सुधाकर ने बताया कि इस बाबत आयोग बाद में एक बैठक बुलाकर फैसला करेगा। उन्होंने बताया कि पॉवर परचेज के तहत हर तीन महीने बाद होने वाली बढ़ोतरी भी शायद इस बार न हो क्योंकि अब तक पॉवर परचेज का रुझान देखते हुए यही कहा जा सकता है। पॉवर परचेज के हिसाब से बिजली टैरिफ में बढ़ोतरी करने को लेकर डिस्कॉम कंपनियों ने अब तक कोई आवेदन नहीं किया है।

सोमवार को बिजली यूनिट के स्लैब को लेकर होने वाली मीटिंग विरोध-प्रदर्शन के कारण टल जाने पर उन्होंने कहा कि आयोग के सभी सदस्यों के सलाह मशविरा के बाद अगली जनसुनवाई कब आयोजित की जाए, इस पर फैसला किया जाएगा। इस बात पर भी उन्होंने जोर दिया कि दिल्ली में घरेलू बिजली की दरें आज भी काफी सस्ती हैं।

अरविंद केजरीवाल ने कहा, भाजपा को सब पता था
बिजली टैरिफ में बढ़ोतरी को लेकर डीईआरसी के बाहर प्रदर्शन करते हुए अरविंद केजरीवाल ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि बिजली टैरिफ से संबंधित सारी जानकारी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता के पास थी।

डीईआरसी ने यह जानकारी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को मई 2010 में ही मिल गई थी जिसमें बिजली टैरिफ घटाने का प्रस्ताव था। ऐसे में जब दो साल से भी अधिक का समय बीत गया तब भाजपा अब नींद से जागी है।

बिजली टैरिफ पर भाजपा और कांग्रेस दोनों राजनीति कर रही हैं। शायद डीईआरसी के अधिकारियों ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन करेंगे। आईएसी के समर्थक तिरंगों के साथ डीईआरसी हाय-हाय, चेयरमैन हाय-हाय करते रहे।

इस दौरान कई बार आईएसी के समर्थकों ने पुलिस को चकमा देकर अंदर घुस गए। करीब सौ से अधिक लोगों ने गलत बिजली बिलों के बारे में सड़क पर ही लोगों को जानकारी दी। पुलिस वीडियो ग्राफी :दिल्ली पुलिस के आला अधिकारियों के पहुंचने के बाद दिल्ली पुलिस से जुड़ा कर्मचारी सिविल ड्रेस में वीडियोग्राफी में लगा रहा।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि ऐसे आयोजनों के समय कई बार कुछ उपद्रवी बवाल करते हैं। ऐसे अराजक तत्वों से निपटने के लिए वीडियोग्राफी की जा रही है। जिन सड़क पर ट्रैफिक पुलिस का कभी नामोनिशां नहीं होता था आज वहां ट्रैफिक पुलिस की लगी हुई थी। मालवीयनगर में अरविंदो कॉलेज से लेकर शिवालिक तक की रोड पूरी तरह से ट्रैफिक जाम में फंस गई।

http://business.bhaskar.com/article/low-power-consumption-possible-relief-to-those-in-delhi-3896038.html