गुरुवार, 26 जुलाई 2012

सिविल सेवा परीक्षा में अंग्रेजी वालों का जलवा





11,984 उम्मीदवार मुख्य परीक्षा में सफल हुए थे घोषित
2,417 उम्मीदवारों को बुलाया गया था साक्षात्कार के लिए
910 सफल उम्मीदवारों में से 800 ने दी थी अंग्रेजी में परीक्षा
87 वे उम्मीदवार अंतिम तौर पर यूपीएससी की इस प्रतिष्ठित सिविल परीक्षाा में उत्तीर्ण हुए जिन्होंने अंग्रेजी को माध्यम अपनाया था

''पूरी आबादी में 40-45 फीसदी लोग हिंदी पट्टी के आते हैं। शिक्षा में भ्रष्टाचार के कारण इन क्षेत्रों में शिक्षा की दशा में तत्काल सुधार होना चाहिए। सिर्फ भाषा के आधार पर टैलेंट को नहीं परखना चाहिए। ऐसे में सीसैट परीक्षा के पैटर्न की समीक्षा करनी होगी। भाषा के आधार पर नौकरी पर देना राष्ट्र निर्माण में बाधक होगा।   -प्रो. आनंद कुमार, समाजशाी

''सिविल सेवा की चयन प्रक्रिया रहस्यात्मक नहीं होनी चाहिए। यूपीएससी की परीक्षा में हिंदी में दिए गए उत्तरों की गुणवत्ता क्या है और इन्हें जांचने के लिए परीक्षकों का चुनाव कैसे करता है। यह अब भी सवालों के घेरे में है। -प्रो.अपूर्व आनंद, हिन्दी विभाग, दिल्ली विवि

आईएएस और अन्य केंद्रीय सिविल सेवाओं की चयन परीक्षा के लिए सिविल सर्विसेज एप्टीट्यूट टेस्टी (सीसेट) का नया पैटर्न क्षेत्रीय भाषाओं के उम्मीदवारों के लिए घाटे का सौदा साबित हो गया है। सिविल सेवा परीक्षा के आखिरी परिणाम में क्षेत्रीय भाषाओं की तुलना में 87 फीसदी वे उम्मीदवार उत्तीर्ण हुए जिन्होंने अंग्रेजी माध्यम से परीक्षा दी थी।

वर्ष 2011 में पहली बार लागू सी सैट के नए पैटर्न से हिंदी समेत अन्य भाषाओं में परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों का बेहद नुकसान हुआ। संघ लोक सेवा आयोग ने सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में बताया कि सूचना के अधिकार के तहत यूपीएससी ने बताया कि इसकी प्रारंभिक परीक्षा 2011 का प्रश्न पत्र वस्तुनिष्ठ था और वह द्विभाषी था लेकिन उत्तर अंकित किए जाने थे इसलिए यह बता पाना संभव नहीं है कि प्रारंभिक परीक्षा में हिंदी और अंग्रेजी माध्यम से कितने छात्र बैठे।

यूपीएससी ने अपने जवाब में बताया कि टॉप 500 उम्मीदवारों ने किस माध्यम से परीक्षा उत्तीर्ण की, यह जानकारी संकलित रूप से उपलब्ध नहीं है। आयोग ने बताया कि आईएएस की मुख्य परीक्षा (लिखित) के लिए हिंदी माध्यम से 1,700 और अंग्रेजी माध्यम से परीक्षा देने वाले 9,324 लोगों ने परीक्षा दी थी।

उनमें से हिंदी माध्यम से 301 और अंगेज माध्यम से 2,047 लोग साक्षात्कार के लिए चुने गए। फाइनल रिजल्ट में अंग्रेजी माध्यम से परीक्षा देने वाले 800 और हिंदी माध्यम से परीक्षा देने वाले 89 लोगों का चयन हुआ। सिविल सर्विसेज परीक्षा 2011 के अंतिम परिणाम में कुल 910 लोगों को सफल घोषित किया गया। हिंदी भाषा के अलावा अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में परीक्षा देने वाले  21 लोग ही सिविल सेवा 2011 की परीक्षा में उत्तीर्ण हो पाए।

सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे आशुतोष ने बताया सिविल सेवा के नए पैटर्न सीसैट में हिंदी माध्यम का उम्मीदवार 40 अंकों की हानि उठाता है। एक अन्य उम्मीदवार प्रवीण ने बताया कि जब मुख्य परीक्षा में 300 नंबर का अंग्रेजी का अनिवार्य पेपर होता है तो प्रारंभिक परीक्षा में अंग्रेजी के प्रश्न देने की क्या आवश्यकता है।

इस बाबत बिहार कैडर के रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी डी.एन.गौतम ने बताया कि सिविल सेवा में होने वाली परीक्षा में स्केलिंग का पैटर्न सही नहीं है। इसलिए सिविल सेवा परीक्षा के पैटर्न की समीक्षा जरूर होनी चाहिए।
http://business.bhaskar.com/article/those-sort-of-civil-service-examinations-in-english-3576671-NOR.html

शुक्रवार, 13 जुलाई 2012

सब्जी वाले अब सब्जी के भाव किलो में नहीं ढाई सौ ग्राम में बताते




थोक बाजार में जहां भिंडी का भाव 18-22 रुपये प्रति किलो है वहीं फुटकर में यह 40 रुपये व रिटेल स्टोरों पर 28-30 रुपये प्रति किलो के भाव पर बेची जा रही है।

दिल्ली और आसपास के उपनगरों में सब्जी वाले अब सब्जी के भाव किलो में नहीं ढाई सौ ग्राम (अधिकतर इस पाव कहते हैं) में बताते हैं। शायद उन्हें ग्राहकों की ढीली जेब का पहले से ही अंदाजा लग गया होता है। पिछले कुछ दिनों में राजधानी व एनसीआर शहरों में सब्जी की ऊंची कीमतों से उपभोक्ताओं का घरेलू बजट बिगड़ चुका है।

किसी भी स्थानीय मंडी में सब्जी के दाम 40 रुपये प्रति किलो के स्तर से कम नहीं रह गए हैं। मात्र 15-20 दिन में ही सब्जी के दाम लगभग दोगुने तक बढ़ गए हैं। मानसून की बारिश शुरू होते ही दिल्ली में आजादपुर, शाहदरा, ओखला व गाजीपुर और गाजियाबाद की साहिबाबाद सब्जी मंडियों में हर जगह सब्जियों के दाम आसमान पर चढ़े हुए हैं।

महंगी सब्जियों से परेशान उपभोक्ताओं के लिए असमंजस की स्थिति यह भी है कि फुटकर दुकानों और रिटेल स्टोरों पर सब्जियां अलग-अलग दामों पर बेची जा रही हैं जबकि आजादपुर मंडी में सब्जियों के थोक भाव समान हैं।

सब्जियों के थोक दाम की तुलना में करीब 50-60 फीसदी अधिक दामों पर स्थानीय फुटकर बाजारों व रिटेल स्टोरों पर सब्जियों की बिक्री हो रही है। थोक बाजार में जहां भिंडी का भाव 18-22 रुपये प्रति किलो है वहीं फुटकर में यह 40 रुपये प्रति किलो और रिटेल स्टोरों पर 28-30 रुपये प्रति किलो के भाव पर बेची जा रही है।

इसी तरह आलू का थोक भाव 10 रुपये प्रति किलो है, जबकि यह फुटकर में 20 रुपये व रिटेल स्टोरों पर 16 रुपये के भाव पर बेचा जा रहा है। सब्जी कारोबारियों का तर्क है कि बारिश के कारण हरी सब्जियों के दाम बढऩे लगते हैं।

लेकिन इस बार मानसून में देरी के कारण अन्य सब्जियों की कीमतों में भी तेजी आई है। इनमें टमाटर जैसी सब्जियां हैं जो लंबी गर्मी के कारण सडऩे की कगार पर पहुंच गई थी। इसी तरह बारिश के असर से आलू में भी तेजी दर्ज की जा रही है। रिटेल स्टोर्स में कुछ सब्जियों के दाम भले ही स्थानीय फुटकर बाजार से कम हैं लेकिन उनकी गुणवत्ता का स्तर भी फुटकर बाजार की तुलना में अच्छा नहीं है।

http://business.bhaskar.com/article/vegetable-prices-sky-come-rain-on-the-climb-3516671.html

शनिवार, 7 जुलाई 2012

टीपीडीडीएल नेटवर्क पर निवेश करेगी 450 करोड़


100 प्रोफेशनल की भर्ती करेगी टीपीडीडीएल चालू वर्ष में

सलाहकार सेवाएं - कंपनी सलाहकार के तौर पर भी सेवाएं देगी। शुरूआत में इसके लिए राजस्थान, जम्मू और कश्मीर, यूपी से बातचीत चल रही है। टाटा की यह कंपनी जल्द ही बिजली वितरण को लेकर इन तीनों प्रदेशों को अपनी सेवाएं देने लगेगी।

टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (टीपीडीडीएल) अपने बिजली वितरण नेटवर्क को और अधिक मजबूत बनाने के लिए वर्ष 2012-13 में 450 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। कंपनी वर्ष 2013 के लिए भी अभी से तैयारियों में जुट गई है।

कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी व कार्यकारी निदेशक प्रवीर सिन्हा ने बिजनेस भास्कर को बताया कि चालू वर्ष में टीपीडीडीएल के क्षेत्र में बिजली की अधिकतम मांग 1,585 मेगावाट के स्तर पर पहुंच गई है। अगले वर्ष यह मांग 2,000 मेगावाट के स्तर पर पहुंच सकती है।  इस चुनौती से निपटने के लिए कंपनी वित्त वर्ष 2012-13 में 450 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।

सिन्हा ने बताया कि इस निवेश के जरिए नए ग्राहकों को जोडऩे, एग्रीगेट टेक्नीकल एंड कॉमर्शियल घाटे का कम करने के लिए और सर्विसेज को बेहतर बनाने में किया जाएगा। जब कंपनी शुरू हुई थी तो कंपनी के पास सिर्फ6-7 लाख ग्राहक थे जिनकी संख्या अब 14 लाख से अधिक हो गई है। उन्होंने दावा किया कि बिजली की किल्लत नहीं होने दी जाएगी।

इसके लिए कंपनियों से लांग टर्म पॉवर परचेज एग्रीमेंट किए गए हैं। ग्राहकों की सुविधाओं के लिए इस वर्ष 20 कस्टमर केयर सेंटर खोले जाएंगे ,जहां पर ग्राहक अपनी समस्याओं का हल पा सकेंगे।

इसके लिए हम बिजली की निर्बाध आपूर्ति करना चाहते हैं जिससे हमारे ग्राहकों को इनवर्टर का प्रयोग न करना पड़े। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए कंपनी का 100 मेगावाट का पॉवर प्लांट रिठाला में स्थित है जिसने काम करना शुरू कर दिया है। पूरी मात्रा में गैस मिलते ही बिजली का उत्पादन शुरू हो जाएगा।
सिन्हा ने बताया कि कंपनी सलाहकार के तौर पर भी अपनी सेवाओं को शुरू करने जा रही है।

अभी शुरूआत में इसके लिए राजस्थान, जम्मू और कश्मीर, यूपी से बात हो रही है। जल्द ही बिजली वितरण को लेकर इन तीनों प्रदेशों को अपनी सेवाएं देने लगेगी। टीपीडीडीएल 2012-13 में 100 प्रोफेशनल की भर्ती भी करेगा। उन्होंने बताया कि आगे के दस वर्षों के लिए टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन को लेकर यूनाइटेड स्टेट टेक्निकल अथॉरिटी के साथ मिलकर टीपीडी डीएल एक अध्ययन कर रहा है जिसकी रिपोर्ट बाद में लागू होगी।

सिन्हा ने बताया कि हर वर्ष बिजली की मांग 8-10 फीसदी बढ़ रही है और उस हिसाब से हमें तैयार रहना होगा। इसके अलावा मानसून में होनी वाली दिक्कतों से बचने के लिए अभी से स्विच गियर, इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट, ट्रांसफार्मर से धूल हटाने का काम शुरू कर दिया गया है जिससे इलेक्ट्रिक इक्विपमेंट में कोई दिक्कत न आए.
http://business.bhaskar.com/article/teepeedeediel-network-will-invest-450-million-3487368.html
TPDDL

सोमवार, 2 जुलाई 2012

देश के फायदे से मेरा घर नहीं चलता है...


शिष्य, गुरू से - गुरू जी जेआरएफ की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली, अब तो अपने अंडर में पीएचडी करा दीजिए
गुरू, शिष्य से - शिष्य मेरे पास अभी सीट नहीं बची है, सारी सीटों पर पहले से ही शिष्य पीएचडी कर रहे हंैं,
शिष्य, गुरू से-  गुरू जी लेकिन आपके सारे शिष्य तो नौकरी कर रहे हैं, ऐसे में वो पीएचडी कैसे कर सकते हैं.
गुरू, शिष्य से-  मैं चाहता हूं इसलिए वो कर सकते हैं.
शिष्य,गुरू से- गुरू जी आप मुझे दाखिला दे दो, मैं १८ महीने में पीएचडी पूरी कर लूंगा.
गुरू, शिष्य से- मुझे १८ महीने में ५-७ साल में पीएचडी पूरे करने वाले होनहार शिष्य चाहिए. जो लंबे समय तक मेरे स्वार्थों को पूरा करते रहें.
शिष्य, गुरू से - तो क्या मैं फिर ५ साल के बाद आऊं पीएचडी करने.
गुरू,शिष्य से- नहीं, तुम पीएचडी मत करो, मैं तुम्हें पीएचडी क्यों कराऊं , इसमें मेरा क्या फायदा है।
शिष्य, गुरू से- गुरू जी इसमें आप का नहीं, देश का फायदा है।
गुरू , शिष्य से - देश के फायदे से मेरा घर नहीं चलता है, मेरे फायदे से मेरा घरा चलता है।

शनिवार, 30 जून 2012

बोतलबंद पानी से खूब बुझ रही है मुनाफे की प्यास







8,000 - करोड़ रुपये का है फिलहाल देश में बोतलबंद पानी का कारोबार
10,000 - करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा यह चालू वित्त वर्ष के अंत तक
15,000 - करोड़ रुपये होगा इस बाजार का आकार वर्ष 2015 तक
36,000 - करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है वर्ष 2020 तक

देश में बोतलबंद पानी के बाजार को लेकर मैं काफी उत्साहित हूं। स्वच्छ पेयजल की बढ़ती कमी, बदलती जीवनशैली और इस बाजार में मौजूद ब्रांड्स का आक्रामक विस्तार आने वाले दशकों में इस उद्योग को तेल उद्योग के बाद सबसे बड़ी इंडस्ट्री बना सकता है।
एजाज मोतीवाला संस्थापक एवं प्रमुख सलाहकार आइकॉन मार्केटिंग कंसल्टेंट्स

बाजार के बड़े खिलाड़ी
आसान उपलब्धता और जेब के मुताबिक होने के कारण फिलहाल एक लीटर जैसे छोटे पैक की बाजार हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। बिसलरी 36 फीसदी बाजार हिस्सेदारी के साथ बोतलबंद पानी के कारोबार में सबसे आगे है। किनले और एक्वाफिना भी तेजी से बढ़ रहे हैं। किनले की 25 और एक्वाफिना की करीब 15 फीसदी हिस्सेदारी बाजार में है। पार्ले एग्रो की बेली की करीब 6 फीसदी हिस्सेदारी है। किंगफिशर, ऑक्सीरिच आदि बाकी सभी संगठित ब्रांड्स की हिस्सेदारी करीब 18 फीसदी है।

देश में बोतलबंद पानी का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है और इस बिजनेस में उतर चुकी कंपनियों के लिए खूब मुनाफा उगल रहा है। प्रमुख मार्केटिंग कंसल्टिंग फर्म आइकॉन मार्केटिंग कंसल्टेंट्स की ओर से घरेलू बाजार में बोतलबंद पानी के कारोबार पर जारी ताजा रिपोर्ट में यह बात कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक चालू वित्त वर्ष (2012-13) में बोतलबंद पानी का कारोबार 10,000 करोड़ रुपये रह सकता है। यह बिजनेस सालाना 19 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रहा है।

'द इंडियन बोटल्ड वाटर मार्केट : अनवीलिंग इट्स थस्र्ट' नाम से जारी इस रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि फिलहाल देश में बोतलबंद पानी का कारोबार करीब 8,000 करोड़ रुपये का है जो चालू वित्त वर्ष के अंत तक 10,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। यह कारोबार 19 फीसदी सालाना की रफ्तार से बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में यह रफ्तार बरकरार रह सकती है।

देश में बोतलबंद पानी का बाजार 2015 तक 15,000 करोड़ रुपये होगा और 2020 तक इस बाजार का आकार 36,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। बोतलबंद पानी के वैश्विक बाजार का विस्तार और भी तेजी से हो रहा है और यह पिछले पांच साल में 40-45 फीसदी की रफ्तार से बढ़कर 85 से 90 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।

बोतलबंद पानी के इस बाजार में तीन तरह के खिलाड़ी हैं। देशभर में मौजूदगी रखने वाले नेशनल ब्रांड्स की हिस्सेदारी करीब 4,000 करोड़ रुपये की है। क्षेत्रीय बाजारों में काम कर रहे लोकल ब्रांड्स की हिस्सेदारी 2400 करोड़ रुपये की है। असंगठित लोकल ब्रांड्स की हिस्सेदारी भी करीब 1600 करोड़ रुपये की है। बोतलबंद पानी के कारोबार में देश में करीब 2500 ब्रांड्स हैं, जिनमें से 80-85 फीसदी लोकल हैं। गैर परंपरागत (जैसे 5 लीटर से ज्यादा के बल्क पैक) वाली श्रेणी की हिस्सेदारी बाजार में 44 फीसदी है।

आइकॉन के मुताबिक 20 लीटर वाले जार में पानी का बिजनेस करने वालों की हिस्सेदारी 3,500 करोड़ रुपये है और यह 28 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रहा है। घरों और संस्थागत क्षेत्र में बल्क पैक की मांग लगातार जोर पकडऩे से अगले 4-5 साल में बोतलबंद पानी का कारोबार और भी तेजी से बढ़ेगा। बाजार में ग्रामीण और शहरी भारत की हिस्सेदारी को देखें तो इसमें शहरी क्षेत्र की 84 फीसदी और ग्रामीण बाजार की 16 फीसदी हिस्सेदारी है।

http://business.bhaskar.com/article/there-is-plenty-of-bottled-water-out-of-the-thirst-for-profits-3448763.html

शुक्रवार, 29 जून 2012

खाओ मक्खन लगाओ मक्खन"- मक्खनबाज़

इश्क को बढ़ाने के साथ दुश्मनी को कम करने का काम भी मक्खन ही करता है 
छोटी सी जिन्दगी है यारोंदुश्मनों को भी दोस्त बनाओ.
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खाओ कम लगाओ ज्यादा"- मक्खनबाज़

अधिक मक्खन खाने से स्वस्थ्य को नुकसान हो सकता है!
लेकिन मक्खन लगाने से फायदे के सिवा कुछ नही होता,
मक्खन लगाओ फायदा ही फायदा पाओ!
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खाओ कम लगाओ ज्यादा" मक्खनबाज़

लगातार दो टेस्ट सीरीज में सफाया होने के बाद टीम इंडिया की चौतरफा आलोचना हो रही है। कोई भी उनका साथ देने को तैयार नहीं है। ऐसे में मक्खनबाज़ से उम्मीद की जा रही है। मकखनबाजों के बोर्ड ऑफ डाइरेक्टर्स ने फैसला किया है कि न सिर्फ सीनियर टेस्ट खिलाड़ियों को रिसीव करने मक्खनबाजों को भेजेंगे। बल्कि मकखनबाजों का एक दल वन डे सीरीज में टीम इंडिया का मनोबल बढ़ाने के लिए स्टेडियम में भी मौजूद रहगा।
"
खाओ कम लगाओ ज्यादा" मक्खनबाज़

मक्खनबाज़ ब्यूरो ऑफ इनवेस्टीगेशन(एमबीआई) सू़त्रों के मुताबिक आर्मी चीफ जनरल वी़.के. सिंह द्वारा 10 किलो मक्खन खरीदने का मामला प्रकाश में आया है। मक्खनबाज़ जांच एंजेसी के मुताबिक वी.के. सिंह ने जिंदगी में पहली बार इतनी बड़ी मात्रा में मक्खन खरीदा और वो भी 26 जनवरी से ठीक पहले। एमबीआई के मुताबिक 10 किलो मक्खन लेकर जनरल साहब 26 जनवरी को परेड देखने पहुंच थे लेकिन वापस लौटते समय उनका सारा मक्खन खत्म हो गया। मक्खनबाज़ एजेंसी के अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि जनरल साहब ने सारा मक्खन कहां खत्म कर दिया। इस बात की भी जांच की जा रही है कि जनरल ने सारा मक्खन खिलाने में या फिर लगाने में खर्च किया ।
"
खाओ कम लगाओ ज्यादा" मक्खनबाज़

अशिकी में भी मक्खन ही काम आता है 
जब गर्लफ्रेंड रूठ जाए, 
मक्खन लगाओउसे मनाओ. 
"
खाओ कम लगाओ ज्यादा"-मक्खनबाज़

अभी-अभी मक्खनबाजों ने एक मक्खनबाज़ शहर बनाने की घोषणा की है.
"
खाओ कम लगाओ ज्यादा"- मक्खनबाज़


मक्खनबाज़ी में सुनहरा भविष्य देखते हुए
कैम्ब्रिजऑक्सफोर्डएमआईटी यूनिवर्सिटी
यहाँ तक कि लदंन स्कूल ऑफ इॅकानमिक्स
ने अपने सभी नियमों को तोड़कर 
"
मास्टर प्रोग्राम इन मक्खनबाजी" कोर्स को 
जल्द ही शुरू करने का फैसला किया है.
अब सभी मक्खनबाजों को पढ़ने और पढ़ाने का मौका मिलेगा.
"
खाओ कम लगाओ ज्यादा"-मक्खनबाज

देश के पांच राज्यों में विधान सभा चुनाव है.
कई मक्खन बनाने वाली कंपनियों ने
राजनीतिक पार्टियों से संपर्क किया है कि 
अपने राज्य कि जनता को हमारी कंपनी का मक्खन लगायें.
"
खाओ कम लगाओ ज्यादा"-मक्खनबाज़


खाते और लगाते समय 
सही मक्खन का चुनाव ज़रूरी है 
क्योकि बाज़ार में मक्खन तो बहुत हैं
पर 'अमूलकी बात ही कुछ और है
"
खाओ मक्खन लगाओ मक्खन"- मक्खनबाज़

जिन्दगी जीने के सिर्फ दो ही तरीके हैं
पहला गधे के बारे में सोचे बिना
मेहनत करते जाओ
या फिर चुपचाप होले-होले मक्खन लगाओ
"
खाओ मक्खन लगाओ मक्खन"- मक्खनबाज़

बहुत से जीरो भी हीरो बन गए हैं मक्खनबाज़ी से 
"
खाओ कम लगाओ ज्यादा"  मक्खनबाज़

सभी मक्खन बाज़ एक दूसरे को मक्खन लगा रहे हैं.
"
खाओ कम लगाओ ज्यादा" :- मक्खनबाज़

रविवार, 3 जून 2012

कानून तोड़ा तो प्लेसमेंट एजेंसियों पर 50,000 जुर्माना


बिल अगले सत्र में
द दिल्ली प्राइवेट प्लेसमेंट एजेंसीज (रेग्युलेशन बिल) 2012 का ड्राफ्ट तैयार है। दिल्ली सरकार के श्रम विभाग ने यह ड्राफ्ट तैयार किया है। श्रम विभाग के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक यह बिल मानसून सत्र में पेश होने की उम्मीद है।

प्लेसमेंट एजेंसियों की मनमानी रोकने और घरेलू नौकरों को उनके अधिकार को दिलाने वाला द दिल्ली प्राइवेट प्लेसमेंट एजेंसीज (रेग्युलेशन बिल) 2012 का ड्राफ्ट तैयार हो गया है। दिल्ली सरकार में श्रम विभाग ने यह ड्राफ्ट तैयार किया है।

श्रम विभाग के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक यह बिल मानसून सत्र में पेश हो जाने की उम्मीद है।  दिल्ली प्राइवेट प्लेसमेंट एजेंसीज (रेग्युलेशन बिल) 2012  कानून के पास होने के बाद तीन महीने के भीतर सभी प्लेसमेंट एजेंसियों को लेना होगा है। सरकार ने 16 पेज का जो ड्राफ्ट तैयार किया है, उसके मुताबिक बिना लाइसेंस लिए कोई प्लेसमेंट एजेंसी अपना कारोबार नहीं कर सकेगी।

प्लेसमेंट एजेंसियों के लिए लाइसेंस फीस  5,000 रुपये होगी। प्लेसमेंट एंजेसियों को लाइसेंस पांच वर्ष के लिए जारी होगा। लाइसेंस की अवधि समाप्त होने पर 45 दिन के भीतर ही लाइसेंस को फिर से पंजीकरण कराना होगा।

ड्राफ्ट के मुताबिक एक कंट्रोलिंग अथॉरिटी को भी नियुक्त किया जा जाएगा जिसमें श्रम विभाग के संयुक्त आयुक्त पद के अधिकारी को नियुक्त किया जाएगा। प्लेसमेंट एजेंसियां कंट्रोलिंग अथॉरिटी की मंजूरी के बगैर घरेलू नौकरों को विदेश नहीं भेज सकेंगी। प्लेसमेंट एजेंसियां घरेलू वर्कर्स से किसी भी प्रकार की फीस वसूल नहीं कर सकेंगी।

तैयार किए गए ड्राफ्ट के मुताबिक सरकारी नौकरी से निकाले गए, निजी कंपनी में किसी कार्य में दोषी पाए गए, महिलाओं के खिलाफ अपराधी लोगों को प्लेसमेंट एजेंसियों के लाइसेंस नहीं दिए जाएंगे।

प्लेसमेंट एजेंसियों को एक रजिस्टर बनाना होगा जिसमें घरेलू नौकर का नाम व पता होगा। प्लेसमेंट एजेंसी को सुनिश्चित करना होगा कि सभी घरेलू नौकरों को फोटो पहचान पत्र उपलब्ध कराएं।  किसी भी विदेशी बच्चे को घरेलू नौकर के तौर पर रखने पर प्लेसमेंट एजेंसी पर कार्रवाई होगी। इस कानून का उल्ल्घंन करने पर प्लेसमेंट एजेंसियों के मालिक पर 50,000 रुपये का जुर्माना या दो वर्ष तक की कैद हो सकती है।

पूर्व में दिल्ली सरकार के श्रम विभाग ने प्लेसमेंट एजेंसियों को लेकर एक सर्वे किया था जिसमें प्लेसमेंट एजेंसियों पर कानून के उल्ल्घंन के मामले सामने आए थे। श्रम विभाग के अधिकारी के मुताबिक  राजधानी दिल्ली में 300 से कुछ अधिक प्लेसमेंट एजेंसियां ही पंजीकृत हैं जबकि दिल्ली के अंदर 5,000 से अधिक प्लेसमेंट एजेंसियां अवैध रूप से कारोबार कर रही है।
http://business.bhaskar.com/article/broken-the-law-on-the-placement-agencies-50000-fine-3363441.html