दस साल बाद भी नहीं शिफ्ट हो पाया केमिकल बाजार
बिजनेस भास्कर नई दिल्ली
सचिन यादव नई दिल्ली
दस वर्षों बाद भी खारी बावली के तिलक बाजार स्थित केमिकल मार्केट को हरियाणा बार्डर से लगे होल्ंबीकलां में स्थानान्तिरत करने संबंधित हाईकोर्ट के आदेश का पालन दस वर्षों बाद भी नहीं किया गया है। तिलक बाजार के कैमिकल व्यापारी इसके लिए डीडीए और प्रशासन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
कैमिकल मर्चेटंस एसोसिएशन के प्रधान सुशील गोयल ने बताया कि वर्ष २००० में हाईकोर्ट ने डीडीए को कैमिकल मर्चेंट वालों को हरियाणा बार्डर से लगे होल्मबी कलां में ५० वर्गमीटर जगह दी थी। उन्होंने बताया कि तिलक बाजार से यह जगह पूरी ३० किलोमीटर तक दूर है। सुशील ने कहा कि डीडीए ने प्लॉट लेने के लिए वर्ष २००२ में पैसे जमा करवाएं थे लेकिन जगह का नशा अब वर्ष २०१० में दिया है। इसके बावजूद डीडीए ५३ तरह के एनओसी के कागज मांग रहा है।
उन्होंने बताया कि अभी तक हमें कब्जा नहीं मिला है और वहां प्लॉट नम्बर भी नहीं पड़े हैं। कारोबारियों के लिए वह जगह बिल्कुल भी व्यावहारिक नहीं है। सम्पर्क मार्केट तक सड़क से जाने का रास्ता तक नहीं है। के मिकल मर्चेटंस वालों को शिफ्ट करने से पहले अनिवार्य रूप से फॉयर बिग्रेड की स्थापना होनी चाहिए। इसके अलावा पोस्ट ऑफिस और बैंक की स्थापना होनी चाहिए। उन्होंने पूछा कि आखिर व्यापारी अपना व्यापार कैसे करेंगे।
सुशील ने कहा कि हमारी मांग है कि हमें ५० वर्गमीटर से बड़े प्लॉट दिए जाएं। खतरे की श्रेणी में आने वाले केमिकल को रखने के लिए इससे बड़े प्लॉट चाहिए। साथ ही श्रमिकों के रहने की भी कोई व्यवस्था की जाए। योंकि इतनी दूर से श्रमिकों को अपने रहने के स्थान पर आने-जाने में ही काफी किराया खर्च करना होगा। कारोबारी अपने अनुभवी श्रमिकों को खोना नहीं चाहते हैं योंकि उनकों केमिकल के काम की काफी अच्छी जानकारी है।
उन्होंने कहा कि हमारे ऑफिसों को तिलक बाजार में ही रहने दिया जाए। अगर डीडीए ने जोर जबरदस्ती करी तो अपने अधिकारों के लिए हम लड़ेंगे।
इस को क्या कह सकते हैं जिंदगी में दोस्तों का साथ होना कितना जरूरी होता है. हम सभी अपने काम में बिजी होने के कारण अपने दोस्तों को समय नहीं दे पाते हैं. जिन्होंने हमारे कठिन मोड़ पर हमारा साथ दिया था उन सबको भूल जाते हैं. जिंदगी की उड़ान में दोस्त उन पंखों सरीखे होते हैं जिनके बिना कोई भी उड़ान पूरी नहीं की जा सकती है. शब्द कम पड़ सकते हैं लेकिन उस दोस्ती को किसी भी चीज़ से तौला नहीं जा सकता है...
सोमवार, 3 जनवरी 2011
सोमवार, 11 अक्टूबर 2010
केसर के दामों में ५० फीसदी से ज्यादा की गिरावट

बिजनेस भास्कर नई दिल्ली
केसर के दामों में ५० फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। दिल्ली की ड्राई फू ट बाजार खारी बावली में केसर के दामों में गिरावट दर्ज की गई है। खारी बावली सर्व व्यापार मंडल के अध्यक्ष ऋषि मंगला ने बताया कि इस बार कश्मीर और ईरान से केसर का आयात काफी मात्रा में हो गया है। इस समय बाजार में केसर की मात्रा काफी अधिक हो जाने से थोक बाजार में के सर के दाम १,३०,००० से १,४०,००० रुपये प्रतिकिलो के स्तर पर चल रहे हैं। जबकि पिछले साल केसर के दाम २,५०,००० रुपये प्रतिकिलो के स्तर पर चल रहे थे। इससे दो साल पूर्व केसर के दाम २५०००-३०,००० रुपये प्रति किलो के स्तर पर थे। लेकिन बाजार में अचानक आई मांग के कारण दाम काफी बढ़ गए थे। उन्होंने बताया कि कश्मीर में बर्फ ज्यादा गिरने से केसर का उत्पादन ज्यादा होता है और कश्मीर में अच्छी बर्फ पडऩे से केसर का उत्पादन अच्छा हुआ जिससे बाजार में केसर की काफी मात्रा में अवाक आ गई। बाजार में औसतन १००० किलो तक केसर प्रतिवर्ष कश्मीर और ईरान से आयात किया जाता है।
लाहौर ड्राई फू्र ट स्टोर के दिनेश चावला ने बताया कि फुटकर बाजार में भी केसर के दाम ४० फीसदी तक गिरे हैं। इस साल फुटकर बाजार में केसर के दाम २४० रुपये प्रति ग्राम तक चल रहे हैं। जबकि पिछले साल केसर के दाम ४०० रुपये प्रति ग्राम तक चल रहे थे। उन्होंने बताया कि बाजार में कश्मीर से आने वाली के सर की डिमांड ५० फीसदी से ज्यादा है। जबकि सस्ते केसर के लिए लोग ईरान से आने वाली केसर की खरीदारी करते हैं। सचिन यादव
केसर के दामों में ५० फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। दिल्ली की ड्राई फू ट बाजार खारी बावली में केसर के दामों में गिरावट दर्ज की गई है। खारी बावली सर्व व्यापार मंडल के अध्यक्ष ऋषि मंगला ने बताया कि इस बार कश्मीर और ईरान से केसर का आयात काफी मात्रा में हो गया है। इस समय बाजार में केसर की मात्रा काफी अधिक हो जाने से थोक बाजार में के सर के दाम १,३०,००० से १,४०,००० रुपये प्रतिकिलो के स्तर पर चल रहे हैं। जबकि पिछले साल केसर के दाम २,५०,००० रुपये प्रतिकिलो के स्तर पर चल रहे थे। इससे दो साल पूर्व केसर के दाम २५०००-३०,००० रुपये प्रति किलो के स्तर पर थे। लेकिन बाजार में अचानक आई मांग के कारण दाम काफी बढ़ गए थे। उन्होंने बताया कि कश्मीर में बर्फ ज्यादा गिरने से केसर का उत्पादन ज्यादा होता है और कश्मीर में अच्छी बर्फ पडऩे से केसर का उत्पादन अच्छा हुआ जिससे बाजार में केसर की काफी मात्रा में अवाक आ गई। बाजार में औसतन १००० किलो तक केसर प्रतिवर्ष कश्मीर और ईरान से आयात किया जाता है।
लाहौर ड्राई फू्र ट स्टोर के दिनेश चावला ने बताया कि फुटकर बाजार में भी केसर के दाम ४० फीसदी तक गिरे हैं। इस साल फुटकर बाजार में केसर के दाम २४० रुपये प्रति ग्राम तक चल रहे हैं। जबकि पिछले साल केसर के दाम ४०० रुपये प्रति ग्राम तक चल रहे थे। उन्होंने बताया कि बाजार में कश्मीर से आने वाली के सर की डिमांड ५० फीसदी से ज्यादा है। जबकि सस्ते केसर के लिए लोग ईरान से आने वाली केसर की खरीदारी करते हैं। सचिन यादव
गुरुवार, 16 सितंबर 2010
जेमस और ज्वैलरी
जेमस और ज्वैलरी का कुल निर्यात पिछले साल की तुलना में ६३ फीसदी से अधिक बढ़ गया है। खाड़ी देशों के साथ-साथ अमेरिका , हांगकांग में बढ़ती मांग के कारण यह असर देखने को मिला है। जुलाई २०१० में प्राप्त आकड़ो के मुताबिक इस वर्ष अप्रैल से जुलाई २०१० में कुल निर्यात बढ़कर ५२६०४.९९ करोड़ रुपये हो गया है। जबकि पिछले साल इसी अवधि में ३४१४४.०७ करोड़ रुपये का ही निर्यात हो पाया था।दी जेम्स एंड ज्वैलरी प्रमोशन काउसिंल के क्षेत्रीय निदेशक केवल कुमार दुग्गल ने बताया कि इस बार ज्वैलरी उत्पादों का निर्यात काफी अच्छा रहा है और इस बार ज्वैलरी उत्पादों का आयात भी कम किया गया है। जुलाई २०१० में जेमस एंड ज्वैलरी का निर्यात ४० फीसदी बढ़कर १०९७६.३१ करोड़ रुपये हो है जबकि इसी दौरास जुलाई २०१० में ही आयात में १.६६ फीसदी की कमी आई है। पिछले वर्ष जुलाई में ११४६७.३० करोड़ रुपये के जेमस एंड ज्वैलरी उत्पादों का आयात किया गया था। इस वर्ष १०८९५.६० करोड़ रुपये की ही जेमस एंड ज्वैलरी का आयात किया गया है।इस दौरान रफ डायमंड के आयात मेें ४५.५० फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इस बार अप्रैल से जुलाई २०१० के बीच में १८६७९.४९ करोड़ रुपये के रफ डायमंड का आयात किया गया जबकि पिछले साल इसी अवधि में १३४९८.३४ करोड़ रुपये का आयात किया गया था।कट और पॉलसिड डायमंड के बाजार में भी तेजी दर्ज क ी गई है। सिर्फ जुलाई २०१० में ७८६६.५८ करोड़ रुपये के कट और पॉलसिड डायमंड का निर्यात किया किया गया। जोकि पिछले साल की तुलना में ३६.८१ फीसदी अधिक है। पिछले साल इस अवधि में ५९५१.४१ करोड़ रुपये का ही निर्यात किया हुआ था।जेमस एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउसिंल के आकड़ो के मुताबिक अप्रैल २०१० से जुलाई २०१० तक कट एंड पॉलसिड डायमंड का निर्यात और आयात क्रमश: ३५१२२.७० करोड़ और २२४५१.३८ करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है।सोने की ज्वैलरी में निर्यात अप्रैल से जुलाई २०१० के बीच में ३१.१५ फीसदी बढ़ गया है। इस अवधि मेें १३३२०.९७ करोड़ रुपये की सोने की ज्वैलरी का निर्यात किया गया है। इस दौरान रंगीन जेमस्टोन का निर्यात भी ५.२४ फीसदी बढ़कर ३७१.२२ करोड़ रुपये हो गया है।जीजेईपीसी क्षेत्रीय निदेशक के.के. दुग्गल ने बताया कि बढ़ती निर्यात मांग के कारण किसी ओर नीति पर फैसला नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि सूरत में डायमंड , जयपुर में नगीने, दिल्ली,कोलकता, मुंबई,राजकोट में ज्वैलरी और दिल्ली व कोलकता सोने के उत्पादों का निर्माण होता है। इस समय देश के अंदर प्रत्यक्ष रुप से जेमस एंड ज्वैलरी उद्योग ३४ लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है।
बुधवार, 8 सितंबर 2010
श्रमिकों की कमी से जूझ रहा स्टील यूटेनस्लिस उद्योग

श्रमिकों की कमी से जूझ रहा स्टील यूटेनस्लिस उद्योग दिल्ली
देश का स्टील उद्योग जगत श्रमिकों की कमी से जूझ रहा है। श्रमिकों की कमी से स्टील उत्पादन में लगे व्यापरियों को दिकतों का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही जो भी श्रमिक मिलतें हैं वह काफी ऊँ चे दाम वसूल कर रहे हैं। इस समय बाजार में २५ से ३० फीसदी श्रमिकों की कमी आ गई है।
स्टैनलेस स्टील यूटेनस्लिस टे्रडर्स एसोसिएशन दिल्ली के अध्यक्ष सतपाल गुप्ता ने बताया कि इस समय बाजार में ३० फीसदी से अधिक श्रामिकों की कमी है। जबकि श्रमिकों के वेतन को ३००० रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर ५२०० रुपये प्रतिमाह किया जा चुका है। इसके बावजूद बाजार में श्रमिक नहीं मिल रहे हैं।
दिल्ली स्टेनलैस स्टील ट्रेड फेडरेशन के अध्यक्ष जे. के. बंसल ने बताया कि पिछले दो महीनों से अचानक श्रमिकों की कमी में काफी कमी आई है। श्रमिकों की कमी से बाजार में उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है। साथ ही इससे स्टील के उत्पादों के दाम भी बढ़ सकते हैं।
राजस्थान स्टेनलैस स्टील रिरोलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भंवर लाल चोपड़ा ने बताया कि यहां श्रमिकों की समस्या से काफी जूझना पड़ रहा है। साथ ही दूसरे राज्यों से आने वाले मजदूरों का पलायन अपने राज्यों में होता जा रहा है योंकि अब उनकों अपने राज्यों में ही रोजगार मिलता जा रहा है।
उन्होंने बताया कि श्रमिकों की कमी से स्टील उत्पादों के दाम ७ से १० फीसदी तक बढ़ गए हैं। भविष्य में स्टील के दाम और अधिक बढ़ सकते हैं। उन्होंने बताया कि बाजार में मांग की अधिकता होने के कारण उत्पादन समय से करने पर अधिक जोर रहता है। लेकिन इस बार श्रमिकों की कमी से स्टील उत्पादन में दिकत आ रही है जिससे समय से आर्डर पूरा करना भी मुश्किल हो सकता है।
गुजरात स्टेनलेस स्टील रीरोलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष उघम राम हुंडिया ने बताया कि बाजार में दो महीने पहले तक ३० से ४० फीसदी तक श्रमिकों की कमी थी। इस समय बाजार में श्रमिक वापस आए हैं लेकिन अभी भी श्रमिकों की कमी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि इस समय बाजार में हेल्पर का मासिक वेतन ४५०० रुपये कर दिया गया है। जबकि अनुभवी श्रमिक को ६००० रुपये प्रतिमाह तक का वेतन भी दिया जा रहा है।
देश का स्टील उद्योग जगत श्रमिकों की कमी से जूझ रहा है। श्रमिकों की कमी से स्टील उत्पादन में लगे व्यापरियों को दिकतों का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही जो भी श्रमिक मिलतें हैं वह काफी ऊँ चे दाम वसूल कर रहे हैं। इस समय बाजार में २५ से ३० फीसदी श्रमिकों की कमी आ गई है।
स्टैनलेस स्टील यूटेनस्लिस टे्रडर्स एसोसिएशन दिल्ली के अध्यक्ष सतपाल गुप्ता ने बताया कि इस समय बाजार में ३० फीसदी से अधिक श्रामिकों की कमी है। जबकि श्रमिकों के वेतन को ३००० रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर ५२०० रुपये प्रतिमाह किया जा चुका है। इसके बावजूद बाजार में श्रमिक नहीं मिल रहे हैं।
दिल्ली स्टेनलैस स्टील ट्रेड फेडरेशन के अध्यक्ष जे. के. बंसल ने बताया कि पिछले दो महीनों से अचानक श्रमिकों की कमी में काफी कमी आई है। श्रमिकों की कमी से बाजार में उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है। साथ ही इससे स्टील के उत्पादों के दाम भी बढ़ सकते हैं।
राजस्थान स्टेनलैस स्टील रिरोलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भंवर लाल चोपड़ा ने बताया कि यहां श्रमिकों की समस्या से काफी जूझना पड़ रहा है। साथ ही दूसरे राज्यों से आने वाले मजदूरों का पलायन अपने राज्यों में होता जा रहा है योंकि अब उनकों अपने राज्यों में ही रोजगार मिलता जा रहा है।
उन्होंने बताया कि श्रमिकों की कमी से स्टील उत्पादों के दाम ७ से १० फीसदी तक बढ़ गए हैं। भविष्य में स्टील के दाम और अधिक बढ़ सकते हैं। उन्होंने बताया कि बाजार में मांग की अधिकता होने के कारण उत्पादन समय से करने पर अधिक जोर रहता है। लेकिन इस बार श्रमिकों की कमी से स्टील उत्पादन में दिकत आ रही है जिससे समय से आर्डर पूरा करना भी मुश्किल हो सकता है।
गुजरात स्टेनलेस स्टील रीरोलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष उघम राम हुंडिया ने बताया कि बाजार में दो महीने पहले तक ३० से ४० फीसदी तक श्रमिकों की कमी थी। इस समय बाजार में श्रमिक वापस आए हैं लेकिन अभी भी श्रमिकों की कमी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि इस समय बाजार में हेल्पर का मासिक वेतन ४५०० रुपये कर दिया गया है। जबकि अनुभवी श्रमिक को ६००० रुपये प्रतिमाह तक का वेतन भी दिया जा रहा है।
सचिन यादव
शुक्रवार, 13 अगस्त 2010
घडिय़ों के बाजार में ३० फीसदी की गिरावट

घडिय़ों के बाजार में ३० फीसदी की गिरावट नई दिल्ली
न्यू लाजपत राय स्थित घड़ी बाजार में ३० फीसदी की गिरावट आई है। घड़ी बाजार को चीन से आए उत्पादों से बहुत अधिक नुकसान हो रहा है। गौरतलब है कि मशहूर घड़ी ब्रांडों के अलावा देश में स्थित लोकल बं्राड की गाडिय़ों की बिक्री प्रभावित हुई है।
न्यू लाजपत राय मार्के ट टे्रडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज शर्मा ने बताया कि गाड़ी बाजार में मंदी आई हुई है। सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि चीन से माल बहुत अधिक मात्रा में मंगाया जा रहा है जिससे बाजार में प्रतियोगिता बहुत अधिक बढ़ गई है।
उन्होंने बताया कि देश में घडिय़ों के सैकड़ो लोकल बं्राड पंजीकृत हैं। जोकि खुद ही घड़ी तैयार करते हैं। चीन के उत्पादों के सस्ते और आक र्षक होने की वजह से लोगों का रुझान लोक ल ब्रांडो से कम हो रहा है। साथ ही दिल्ली में वैट की दर भी १२.५ फीसदी है जिससे लोकल बं्राड की घडिय़ों के दाम भी बढ़ गए हैं जबकि चीनी घडिय़ों के दाम उसी स्तर पर हैं।
््््््््््््््््््््््््््बाहर से आना वाला व्यापारी भी अधिक लाभ कमाने के चकर में चीनी घडिय़ों की खरीददारी कर रहा है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जीएसटी(गुड्स एंड सर्विस टैस)के लागू होने से गाडिय़ों की कालाबाजारी भी बढ़ सकती है। योंकि बीजेपी शासित राज्यों ने जीसटी लागू करने से मना कर दिया है।
न्यू लाजपत राय मार्के ट टे्रडर्स एसोसिएशन के सचिव नीरज चोपड़ा ने कहा कि मोबाइल फोन के बढ़ते उपयोग से भी लोगों ने घड़ी की खरीदारी कम की है। साथ ही बं्राडेड घडिय़ों की सेल में भी गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि लोग अब घडिय़ों के ब्रांड को ध्यान में रखकर नहीं खरीदारी कर रहे हैं। उनको आक र्षक घडिय़ां ही पंसद आ रही हैं।
एक अन्य व्यापारी अरविंद बताते हैं कि आजकल के युवा आक र्षक घडिय़ों को ही पंसद करते हैं। चीनी घडिय़ां सस्ती होती हैं और खराब होने पर युवा दूसरी घड़ी खरीदने चले आते हैं।
गौरतलब है कि न्यू लाजपत राय मार्केट एसोसिऐशन में ४४० से अधिक दुकानें और ४० से अधिक स्टाल है। इस दुकानों से सरकार को २० करोड़ से अधिक का राजस्व प्राप्त होता है।
न्यू लाजपत राय स्थित घड़ी बाजार में ३० फीसदी की गिरावट आई है। घड़ी बाजार को चीन से आए उत्पादों से बहुत अधिक नुकसान हो रहा है। गौरतलब है कि मशहूर घड़ी ब्रांडों के अलावा देश में स्थित लोकल बं्राड की गाडिय़ों की बिक्री प्रभावित हुई है।
न्यू लाजपत राय मार्के ट टे्रडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज शर्मा ने बताया कि गाड़ी बाजार में मंदी आई हुई है। सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि चीन से माल बहुत अधिक मात्रा में मंगाया जा रहा है जिससे बाजार में प्रतियोगिता बहुत अधिक बढ़ गई है।
उन्होंने बताया कि देश में घडिय़ों के सैकड़ो लोकल बं्राड पंजीकृत हैं। जोकि खुद ही घड़ी तैयार करते हैं। चीन के उत्पादों के सस्ते और आक र्षक होने की वजह से लोगों का रुझान लोक ल ब्रांडो से कम हो रहा है। साथ ही दिल्ली में वैट की दर भी १२.५ फीसदी है जिससे लोकल बं्राड की घडिय़ों के दाम भी बढ़ गए हैं जबकि चीनी घडिय़ों के दाम उसी स्तर पर हैं।
््््््््््््््््््््््््््बाहर से आना वाला व्यापारी भी अधिक लाभ कमाने के चकर में चीनी घडिय़ों की खरीददारी कर रहा है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जीएसटी(गुड्स एंड सर्विस टैस)के लागू होने से गाडिय़ों की कालाबाजारी भी बढ़ सकती है। योंकि बीजेपी शासित राज्यों ने जीसटी लागू करने से मना कर दिया है।
न्यू लाजपत राय मार्के ट टे्रडर्स एसोसिएशन के सचिव नीरज चोपड़ा ने कहा कि मोबाइल फोन के बढ़ते उपयोग से भी लोगों ने घड़ी की खरीदारी कम की है। साथ ही बं्राडेड घडिय़ों की सेल में भी गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि लोग अब घडिय़ों के ब्रांड को ध्यान में रखकर नहीं खरीदारी कर रहे हैं। उनको आक र्षक घडिय़ां ही पंसद आ रही हैं।
एक अन्य व्यापारी अरविंद बताते हैं कि आजकल के युवा आक र्षक घडिय़ों को ही पंसद करते हैं। चीनी घडिय़ां सस्ती होती हैं और खराब होने पर युवा दूसरी घड़ी खरीदने चले आते हैं।
गौरतलब है कि न्यू लाजपत राय मार्केट एसोसिऐशन में ४४० से अधिक दुकानें और ४० से अधिक स्टाल है। इस दुकानों से सरकार को २० करोड़ से अधिक का राजस्व प्राप्त होता है।
गुरुवार, 12 अगस्त 2010
मुन्ने का दूध कब होगा सस्ता

बुधवार, 4 अगस्त 2010
फ्लैट न बिकने से सेनेटरी उत्पादों की बिक्री में गिरावट
सचिन यादव नई दिल्ली
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र(एनसीआर) में फ्लेटों की बिक्री न होने से चावड़ी बाजार के सेनेटरी उद्योग में गिरावट आई है। चावड़ी बाजार के सेनेटरी उद्योग में यह गिरावट लगातार दूसरे वर्ष भी देखी जा रही है।
दिल्ली आयरन एंड मर्चेंटस एसोसिऐशन के सदस्य राकेश गुप्ता ने बताया कि सेनेटरी उद्योग व्यापरियों की खरीदारी पर टिका रहता है। लेकिन एनसीआर इलाकों में खासकर नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बने फ्लेटों को खरीदार न मिलने से सेनेटरी के माल की आपूर्ति एकदम ठप है। जब तक बने हुए फ्लेट बिकेगें नहीं, तब तक नए फ्लैट बनेंगे नहीं। नए फ्लेट न बनने से माल की आपूर्ति भी एक दम ठप है।
बाजार में इस समय फुटकर विक्रेता ही आते हैं। आने वाले समय में भी सेनेटरी बाजार में तेजी आने की उम्मीद कम ही है। उन्होंने बताया कि महंगाई के कारण खरीददार कम हैं जिससे सेनेटरी उत्पादों की कीमत २० फीसदी तक बढ़ गई है। उन्होंने बताया कि हमारे उत्पादों को चीन से आए सेनेटरी माल से भी क ड़ा मुकाबला करना पड़ रहा है। अधिकांश बड़े व्यापारी जिन्हें बल्क में माल खरीदना होता है। अब चीनी उत्पादों की बुकिंग भी करवा रहे हैं।
वहीं एसोसिऐशन के अध्यक्ष सत्येन्द्र जैन ने बताया कि मार्के ट में इस समय गिरावट देखी जा सकती है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने वैट की दर भी सेनेटरी उत्पादों पर ४ फीसदी से बढ़ाकर १२.५ फीसदी के स्तर पर कर दी है। मार्केट में खरीदारों ने सेनेटरी उत्पादों के बढ़ते दामों से कदम पीछे खींच लिए हैं।
हौज काजी में पिछले कई सालों से सेनेटरी उत्पादों का व्यापार कर रहे मो.हुसैन कहते हैं कि बाजार में सेनेटरी उत्पादों की मांग बिल्कुल कम है। कम मांग के कारण हमें अपने खर्चों में कटौती भी करनी पड़ रही है। इसका असर बाजार में काम करने वाले मजदूरों की तनख्वाह पर भी पड़ता है।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र(एनसीआर) में फ्लेटों की बिक्री न होने से चावड़ी बाजार के सेनेटरी उद्योग में गिरावट आई है। चावड़ी बाजार के सेनेटरी उद्योग में यह गिरावट लगातार दूसरे वर्ष भी देखी जा रही है।
दिल्ली आयरन एंड मर्चेंटस एसोसिऐशन के सदस्य राकेश गुप्ता ने बताया कि सेनेटरी उद्योग व्यापरियों की खरीदारी पर टिका रहता है। लेकिन एनसीआर इलाकों में खासकर नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बने फ्लेटों को खरीदार न मिलने से सेनेटरी के माल की आपूर्ति एकदम ठप है। जब तक बने हुए फ्लेट बिकेगें नहीं, तब तक नए फ्लैट बनेंगे नहीं। नए फ्लेट न बनने से माल की आपूर्ति भी एक दम ठप है।
बाजार में इस समय फुटकर विक्रेता ही आते हैं। आने वाले समय में भी सेनेटरी बाजार में तेजी आने की उम्मीद कम ही है। उन्होंने बताया कि महंगाई के कारण खरीददार कम हैं जिससे सेनेटरी उत्पादों की कीमत २० फीसदी तक बढ़ गई है। उन्होंने बताया कि हमारे उत्पादों को चीन से आए सेनेटरी माल से भी क ड़ा मुकाबला करना पड़ रहा है। अधिकांश बड़े व्यापारी जिन्हें बल्क में माल खरीदना होता है। अब चीनी उत्पादों की बुकिंग भी करवा रहे हैं।
वहीं एसोसिऐशन के अध्यक्ष सत्येन्द्र जैन ने बताया कि मार्के ट में इस समय गिरावट देखी जा सकती है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने वैट की दर भी सेनेटरी उत्पादों पर ४ फीसदी से बढ़ाकर १२.५ फीसदी के स्तर पर कर दी है। मार्केट में खरीदारों ने सेनेटरी उत्पादों के बढ़ते दामों से कदम पीछे खींच लिए हैं।
हौज काजी में पिछले कई सालों से सेनेटरी उत्पादों का व्यापार कर रहे मो.हुसैन कहते हैं कि बाजार में सेनेटरी उत्पादों की मांग बिल्कुल कम है। कम मांग के कारण हमें अपने खर्चों में कटौती भी करनी पड़ रही है। इसका असर बाजार में काम करने वाले मजदूरों की तनख्वाह पर भी पड़ता है।
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