सोमवार, 11 अक्टूबर 2010

केसर के दामों में ५० फीसदी से ज्यादा की गिरावट


बिजनेस भास्कर नई दिल्ली
केसर के दामों में ५० फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। दिल्ली की ड्राई फू ट बाजार खारी बावली में केसर के दामों में गिरावट दर्ज की गई है। खारी बावली सर्व व्यापार मंडल के अध्यक्ष ऋषि मंगला ने बताया कि इस बार कश्मीर और ईरान से केसर का आयात काफी मात्रा में हो गया है। इस समय बाजार में केसर की मात्रा काफी अधिक हो जाने से थोक बाजार में के सर के दाम १,३०,००० से १,४०,००० रुपये प्रतिकिलो के स्तर पर चल रहे हैं। जबकि पिछले साल केसर के दाम २,५०,००० रुपये प्रतिकिलो के स्तर पर चल रहे थे। इससे दो साल पूर्व केसर के दाम २५०००-३०,००० रुपये प्रति किलो के स्तर पर थे। लेकिन बाजार में अचानक आई मांग के कारण दाम काफी बढ़ गए थे। उन्होंने बताया कि कश्मीर में बर्फ ज्यादा गिरने से केसर का उत्पादन ज्यादा होता है और कश्मीर में अच्छी बर्फ पडऩे से केसर का उत्पादन अच्छा हुआ जिससे बाजार में केसर की काफी मात्रा में अवाक आ गई। बाजार में औसतन १००० किलो तक केसर प्रतिवर्ष कश्मीर और ईरान से आयात किया जाता है।
लाहौर ड्राई फू्र ट स्टोर के दिनेश चावला ने बताया कि फुटकर बाजार में भी केसर के दाम ४० फीसदी तक गिरे हैं। इस साल फुटकर बाजार में केसर के दाम २४० रुपये प्रति ग्राम तक चल रहे हैं। जबकि पिछले साल केसर के दाम ४०० रुपये प्रति ग्राम तक चल रहे थे। उन्होंने बताया कि बाजार में कश्मीर से आने वाली के सर की डिमांड ५० फीसदी से ज्यादा है। जबकि सस्ते केसर के लिए लोग ईरान से आने वाली केसर की खरीदारी करते हैं। सचिन यादव

गुरुवार, 16 सितंबर 2010

जेमस और ज्वैलरी

जेमस और ज्वैलरी का कुल निर्यात पिछले साल की तुलना में ६३ फीसदी से अधिक बढ़ गया है। खाड़ी देशों के साथ-साथ अमेरिका , हांगकांग में बढ़ती मांग के कारण यह असर देखने को मिला है। जुलाई २०१० में प्राप्त आकड़ो के मुताबिक इस वर्ष अप्रैल से जुलाई २०१० में कुल निर्यात बढ़कर ५२६०४.९९ करोड़ रुपये हो गया है। जबकि पिछले साल इसी अवधि में ३४१४४.०७ करोड़ रुपये का ही निर्यात हो पाया था।दी जेम्स एंड ज्वैलरी प्रमोशन काउसिंल के क्षेत्रीय निदेशक केवल कुमार दुग्गल ने बताया कि इस बार ज्वैलरी उत्पादों का निर्यात काफी अच्छा रहा है और इस बार ज्वैलरी उत्पादों का आयात भी कम किया गया है। जुलाई २०१० में जेमस एंड ज्वैलरी का निर्यात ४० फीसदी बढ़कर १०९७६.३१ करोड़ रुपये हो है जबकि इसी दौरास जुलाई २०१० में ही आयात में १.६६ फीसदी की कमी आई है। पिछले वर्ष जुलाई में ११४६७.३० करोड़ रुपये के जेमस एंड ज्वैलरी उत्पादों का आयात किया गया था। इस वर्ष १०८९५.६० करोड़ रुपये की ही जेमस एंड ज्वैलरी का आयात किया गया है।इस दौरान रफ डायमंड के आयात मेें ४५.५० फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इस बार अप्रैल से जुलाई २०१० के बीच में १८६७९.४९ करोड़ रुपये के रफ डायमंड का आयात किया गया जबकि पिछले साल इसी अवधि में १३४९८.३४ करोड़ रुपये का आयात किया गया था।कट और पॉलसिड डायमंड के बाजार में भी तेजी दर्ज क ी गई है। सिर्फ जुलाई २०१० में ७८६६.५८ करोड़ रुपये के कट और पॉलसिड डायमंड का निर्यात किया किया गया। जोकि पिछले साल की तुलना में ३६.८१ फीसदी अधिक है। पिछले साल इस अवधि में ५९५१.४१ करोड़ रुपये का ही निर्यात किया हुआ था।जेमस एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउसिंल के आकड़ो के मुताबिक अप्रैल २०१० से जुलाई २०१० तक कट एंड पॉलसिड डायमंड का निर्यात और आयात क्रमश: ३५१२२.७० करोड़ और २२४५१.३८ करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है।सोने की ज्वैलरी में निर्यात अप्रैल से जुलाई २०१० के बीच में ३१.१५ फीसदी बढ़ गया है। इस अवधि मेें १३३२०.९७ करोड़ रुपये की सोने की ज्वैलरी का निर्यात किया गया है। इस दौरान रंगीन जेमस्टोन का निर्यात भी ५.२४ फीसदी बढ़कर ३७१.२२ करोड़ रुपये हो गया है।जीजेईपीसी क्षेत्रीय निदेशक के.के. दुग्गल ने बताया कि बढ़ती निर्यात मांग के कारण किसी ओर नीति पर फैसला नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि सूरत में डायमंड , जयपुर में नगीने, दिल्ली,कोलकता, मुंबई,राजकोट में ज्वैलरी और दिल्ली व कोलकता सोने के उत्पादों का निर्माण होता है। इस समय देश के अंदर प्रत्यक्ष रुप से जेमस एंड ज्वैलरी उद्योग ३४ लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है।

बुधवार, 8 सितंबर 2010

श्रमिकों की कमी से जूझ रहा स्टील यूटेनस्लिस उद्योग


श्रमिकों की कमी से जूझ रहा स्टील यूटेनस्लिस उद्योग दिल्ली
देश का स्टील उद्योग जगत श्रमिकों की कमी से जूझ रहा है। श्रमिकों की कमी से स्टील उत्पादन में लगे व्यापरियों को दि€कतों का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही जो भी श्रमिक मिलतें हैं वह काफी ऊँ चे दाम वसूल कर रहे हैं। इस समय बाजार में २५ से ३० फीसदी श्रमिकों की कमी आ गई है।
स्टैनलेस स्टील यूटेनस्लिस टे्रडर्स एसोसिएशन दिल्ली के अध्यक्ष सतपाल गुप्ता ने बताया कि इस समय बाजार में ३० फीसदी से अधिक श्रामिकों की कमी है। जबकि श्रमिकों के वेतन को ३००० रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर ५२०० रुपये प्रतिमाह किया जा चुका है। इसके बावजूद बाजार में श्रमिक नहीं मिल रहे हैं।
दिल्ली स्टेनलैस स्टील ट्रेड फेडरेशन के अध्यक्ष जे. के. बंसल ने बताया कि पिछले दो महीनों से अचानक श्रमिकों की कमी में काफी कमी आई है। श्रमिकों की कमी से बाजार में उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है। साथ ही इससे स्टील के उत्पादों के दाम भी बढ़ सकते हैं।
राजस्थान स्टेनलैस स्टील रिरोलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भंवर लाल चोपड़ा ने बताया कि यहां श्रमिकों की समस्या से काफी जूझना पड़ रहा है। साथ ही दूसरे राज्यों से आने वाले मजदूरों का पलायन अपने राज्यों में होता जा रहा है €योंकि अब उनकों अपने राज्यों में ही रोजगार मिलता जा रहा है।
उन्होंने बताया कि श्रमिकों की कमी से स्टील उत्पादों के दाम ७ से १० फीसदी तक बढ़ गए हैं। भविष्य में स्टील के दाम और अधिक बढ़ सकते हैं। उन्होंने बताया कि बाजार में मांग की अधिकता होने के कारण उत्पादन समय से करने पर अधिक जोर रहता है। लेकिन इस बार श्रमिकों की कमी से स्टील उत्पादन में दि€कत आ रही है जिससे समय से आर्डर पूरा करना भी मुश्किल हो सकता है।
गुजरात स्टेनलेस स्टील रीरोलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष उघम राम हुंडिया ने बताया कि बाजार में दो महीने पहले तक ३० से ४० फीसदी तक श्रमिकों की कमी थी। इस समय बाजार में श्रमिक वापस आए हैं लेकिन अभी भी श्रमिकों की कमी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि इस समय बाजार में हेल्पर का मासिक वेतन ४५०० रुपये कर दिया गया है। जबकि अनुभवी श्रमिक को ६००० रुपये प्रतिमाह तक का वेतन भी दिया जा रहा है।
सचिन यादव

शुक्रवार, 13 अगस्त 2010

घडिय़ों के बाजार में ३० फीसदी की गिरावट


घडिय़ों के बाजार में ३० फीसदी की गिरावट नई दिल्ली
न्यू लाजपत राय स्थित घड़ी बाजार में ३० फीसदी की गिरावट आई है। घड़ी बाजार को चीन से आए उत्पादों से बहुत अधिक नुकसान हो रहा है। गौरतलब है कि मशहूर घड़ी ब्रांडों के अलावा देश में स्थित लोकल बं्राड की गाडिय़ों की बिक्री प्रभावित हुई है।
न्यू लाजपत राय मार्के ट टे्रडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज शर्मा ने बताया कि गाड़ी बाजार में मंदी आई हुई है। सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि चीन से माल बहुत अधिक मात्रा में मंगाया जा रहा है जिससे बाजार में प्रतियोगिता बहुत अधिक बढ़ गई है।
उन्होंने बताया कि देश में घडिय़ों के सैकड़ो लोकल बं्राड पंजीकृत हैं। जोकि खुद ही घड़ी तैयार करते हैं। चीन के उत्पादों के सस्ते और आक र्षक होने की वजह से लोगों का रुझान लोक ल ब्रांडो से कम हो रहा है। साथ ही दिल्ली में वैट की दर भी १२.५ फीसदी है जिससे लोकल बं्राड की घडिय़ों के दाम भी बढ़ गए हैं जबकि चीनी घडिय़ों के दाम उसी स्तर पर हैं।
््््््््््््््््््््््््््बाहर से आना वाला व्यापारी भी अधिक लाभ कमाने के च€कर में चीनी घडिय़ों की खरीददारी कर रहा है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जीएसटी(गुड्स एंड सर्विस टै€स)के लागू होने से गाडिय़ों की कालाबाजारी भी बढ़ सकती है। €योंकि बीजेपी शासित राज्यों ने जीसटी लागू करने से मना कर दिया है।
न्यू लाजपत राय मार्के ट टे्रडर्स एसोसिएशन के सचिव नीरज चोपड़ा ने कहा कि मोबाइल फोन के बढ़ते उपयोग से भी लोगों ने घड़ी की खरीदारी कम की है। साथ ही बं्राडेड घडिय़ों की सेल में भी गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि लोग अब घडिय़ों के ब्रांड को ध्यान में रखकर नहीं खरीदारी कर रहे हैं। उनको आक र्षक घडिय़ां ही पंसद आ रही हैं।
एक अन्य व्यापारी अरविंद बताते हैं कि आजकल के युवा आक र्षक घडिय़ों को ही पंसद करते हैं। चीनी घडिय़ां सस्ती होती हैं और खराब होने पर युवा दूसरी घड़ी खरीदने चले आते हैं।
गौरतलब है कि न्यू लाजपत राय मार्केट एसोसिऐशन में ४४० से अधिक दुकानें और ४० से अधिक स्टाल है। इस दुकानों से सरकार को २० करोड़ से अधिक का राजस्व प्राप्त होता है।

गुरुवार, 12 अगस्त 2010

मुन्ने का दूध कब होगा सस्ता


नईदिल्लीमाहंगाईके इस दौर में पैकैट बंद दूध बेचने वाली फर्म आम आदमी को १० रुपये अधिक दाम में दूध बेच रही हैं। पैकेट बंद दूध बेचने वाली फर्म मदर डेयरी, अमूल, पारस आदि फॅर्म लोगों से अधिक पैसा वसूल कर रही हैं। देशी घी प्रोडेक्ट एसोसिऐशन के अध्यक्ष अशोक अरोड़ा ने बताया कि बाजार में इस समय कच्चा दूध २१ रुपये से २२ रुपये प्रति लीटर की दर पर मिल रहा है। लेकिन सरकार अधिक दामों पर बिक रहे दूध के दाम करने संबंधी कोई फैसला नही कर रही है।खारी बावली सर्व व्यापार मंडल के अध्यक्ष मृदुल राजीव बत्रा का कहना है कि इस समय बाजार में दूध का उत्पादन पिछले साल की तुलना में २० फीसदी से अधिक के स्तर तक बढ़ गया है जिससे बाजार में मिल्क पाउडर की मांग भी घट गई है। त्यौहारी मौसम में दूध की मांग अधिक रहती है। इस बार रमजान और रक्षाबंधन के मौके पर पैकेट बंद दूध के दाम गिरने चाहिए जिससे आम लोगों को भी दूध पीने को मौका मिल सके।उन्होंने बताया कि इस त्यौहारी मौसम में दूध के दाम को घटाकर लोगों को त्यौहारी तोहफा दिया जा सकता है। इस बढ़ती महंगाई के कारण आम आदमी की पहुंच से दूध और दूध से बने उत्पाद दूर होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मई माह में गर्मी के मौसम में दूध के उत्पादन में कमी थी जिसके कारण मिल्क पाउडर और उनसे बने उत्पादों की मांग में इजाफा हुआ था।इंडियन डेयरी एसोसिऐशन के अध्यक्ष डा० एन आर भसीन का कहना है कि इस समय गुजरात में ही ८० लाख लीटर से अधिक दूध इकट्ठा हो चुका है। अधिक दूध उत्पादन के ऐसे ही भंडार महाराष्ट्र में भी हैं। ऐसे में निश्चित है कि दूध के दामों में गिरावट की जाए । उन्होंने कहा कि आने वाले दो महीनों के अंदर दूध के दामों में भी गिरावट देखने को मिल सकती है। गर्मी के दौरान दूध के उत्पादन में कमी के कारण ७० से ८० हजार टन मिल्क पाउडर का आयात न्यूजीलैंड से किया जाना था। लेकिन दूध बढ़ते उत्पादन के कारण मिल्क पाउडर का आयात घटाकर ५ से ६ हजार टन तक कर दिया गया है।

बुधवार, 4 अगस्त 2010

फ्लैट न बिकने से सेनेटरी उत्पादों की बिक्री में गिरावट

सचिन यादव नई दिल्ली
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र(एनसीआर) में फ्लेटों की बिक्री न होने से चावड़ी बाजार के सेनेटरी उद्योग में गिरावट आई है। चावड़ी बाजार के सेनेटरी उद्योग में यह गिरावट लगातार दूसरे वर्ष भी देखी जा रही है।
दिल्ली आयरन एंड मर्चेंटस एसोसिऐशन के सदस्य राकेश गुप्ता ने बताया कि सेनेटरी उद्योग व्यापरियों की खरीदारी पर टिका रहता है। लेकिन एनसीआर इलाकों में खासकर नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बने फ्लेटों को खरीदार न मिलने से सेनेटरी के माल की आपूर्ति एकदम ठप है। जब तक बने हुए फ्लेट बिकेगें नहीं, तब तक नए फ्लैट बनेंगे नहीं। नए फ्लेट न बनने से माल की आपूर्ति भी एक दम ठप है।
बाजार में इस समय फुटकर विक्रेता ही आते हैं। आने वाले समय में भी सेनेटरी बाजार में तेजी आने की उम्मीद कम ही है। उन्होंने बताया कि महंगाई के कारण खरीददार कम हैं जिससे सेनेटरी उत्पादों की कीमत २० फीसदी तक बढ़ गई है। उन्होंने बताया कि हमारे उत्पादों को चीन से आए सेनेटरी माल से भी क ड़ा मुकाबला करना पड़ रहा है। अधिकांश बड़े व्यापारी जिन्हें बल्क में माल खरीदना होता है। अब चीनी उत्पादों की बुकिंग भी करवा रहे हैं।
वहीं एसोसिऐशन के अध्यक्ष सत्येन्द्र जैन ने बताया कि मार्के ट में इस समय गिरावट देखी जा सकती है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने वैट की दर भी सेनेटरी उत्पादों पर ४ फीसदी से बढ़ाकर १२.५ फीसदी के स्तर पर कर दी है। मार्केट में खरीदारों ने सेनेटरी उत्पादों के बढ़ते दामों से कदम पीछे खींच लिए हैं।
हौज काजी में पिछले कई सालों से सेनेटरी उत्पादों का व्यापार कर रहे मो.हुसैन कहते हैं कि बाजार में सेनेटरी उत्पादों की मांग बिल्कुल कम है। कम मांग के कारण हमें अपने खर्चों में कटौती भी करनी पड़ रही है। इसका असर बाजार में काम करने वाले मजदूरों की तनख्वाह पर भी पड़ता है।

सोमवार, 7 जून 2010

भोपाल गैस त्राशादी

विश्व की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदी 'भोपाल गैस कांड के घटित होने के तकरीबन २६ साल बाद आठ दोषियों को सजा सुनाई गई है। इस त्रासदी का घटनाक्रम कुछ इस तरह से है :
३ दिसंबर,१९८४- यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड के भोपाल स्थित पेस्टीसाइड प्लांट से मिथाइल आइसोसाइनेट नामक जहरीली गैस के रिसाव के कारण लगभग १५ हजार लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी और कम से कम पांच लाख लोग इस गैस की चपेट में आए। साथ ही लाखों लोग बीमार पड़ गए। उनकी आने वाली पीढिय़ां भी गैस के हानिकारक असर से बच नहीं पाईं।
४ दिसंबर,१९८४- यूनियन कार्बाइड के चेयरमैन वारेन एंडरसन समेत नौ लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया। लेकिन वारेन एंडरसन को २ हजार डॉलर का जुर्माना भरने पर जमानत दे दी गई। वारेन एंडरसन ने जमानत लेते समय भारत लौटने का वादा किया था। इससे जुड़े फौजदारी मामले में १०वां अभियुक्त यूनियन कार्बाइड को बनाया गया, जिस पर सामूहिक नरसंहार का आरोप लगाया गया।
फरवरी, १९८५- भारत सरकार ने यूनियन कार्बाइड से ३.३ अरब डॉलर का मुआवजा पाने के लिए एक अमेरिकी अदालत में दावा ठोंका।
१९८६- अमेरिका जिला अदालत के जज ने भोपाल गैस त्रासदी के सारे मामलों को भारत स्थानांतरित कर दिया।
दिसंबर १९८७- सीबीआई ने वारेन एंडरसन और यूनियन कार्बाइड कॉर्पोरेशन (यूएसए), यूनियन कार्बाइड (ईस्टर्न) हांगकांग और यूसीआईएल के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। एंडरसन और यूसीसी को सामूहिक नरसंहार के मामले में सम्मन भी भेजा गया।
फरवरी,१९८९- भोपाल के सीजेएम ने सम्मन की बार-बार अवेहलना करने के कारण वारेन एंडरसन के खिलाफ गैर जमानती वांरट जारी किया।
फरवरी, १९८९- यूनियन कार्बाइड द्वारा ४७ करोड़ डालर की क्षतिपूर्ति भरने संबंधी सौदा भारत सरकार और यूनियन कार्बाइड के बीच अदालत के बाहर हुआ।
फरवरी-मार्च,१९८९- इस समझौते को गैर वाजिब करते देते हुए भारी जनविरोध हुआ। इसके साथ ही भोपाल गैस पीडि़त महिला उद्योग संगठन और भोपाल गैस पीडि़त संघर्ष सहयोग समिति समेत कई संगठनों ने इस समझौते के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में ढेर सारी याचिकाएं दाखिल कीं।
१९९२- सरकार ने ४७ करोड़ डालर के मुआवजे का एक हिस्सा भोपाल गैस पीडि़तों के बीच वितरित किया।
फरवरी,१९९२- अदालत ने कोर्ट के सम्मनों की अवेहलना करने के कारण वारेन एंडरसन को भगोड़ा घोषित किया।
नवंबर,१९९४- अदालत में कई याचिकाएं दाखिल होने के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने यूनियन कार्बाइड को यूसीआईएल में अपना हिस्सा क ोलकाता स्थित मैकलियॉड रसेल (इंडिया) लिमिटेड को बेचने की अनुमति दे दी।
सितंबर,१९९६- सुप्रीम कोर्ट ने यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) के भारतीय अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को थोड़ा कम कर दिया। नरसंहार के लिए मुख्यत: यूनियन कार्बाइड कॉर्पाेरेशन (यूसीसी) को जिम्मेदार माने जाने के कारण ही ये आरोप कम किए गए। यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड की बहुमत हिस्स्ेदारी उस समय यूसीसी के पास ही थी।
अगस्त,१९९९- यूनियन कार्बाइड ने अमेरिका की डो केमिकल्स में विलय की घोषणा की।
नवंबर,१९९९- अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संस्था ग्रीनपीस ने यूनियन कार्बाइड फैक्टरी के आसपास जांच में पाया कि वहां १२ वाष्पशील आर्गेनिक केमिकल्स और मरकरी की मात्रा अपेक्षा से ६० लाख गुना तक अधिक है।
नवंबर,१९९९- यूनियन कार्बाइड और इसके पूर्व सीईओ के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार उल्लघंन, पर्यावरण कानून, और अंतर्राष्ट्रीय क्रिमिनल लॉ के अंतर्गत भोपाल गैस त्रासदी के भुक्तभोगी व बचे हुए लोगों ने न्यूयार्क के फेडरल कोर्ट पर याचिका दाखिल की7
फरवरी,२००१- यूनियन कार्बाइड ने भारत में यूसीआईएल की देनदारियों की जिम्मेदारी लेने से मना कर दिया।
जून,२००२- भोपाल गैस त्रासदी के भुक्तभोगियों ने भारत सरकार के खिलाफ तब प्रदर्शन किया जब उन्हें पता चला कि सरकार एंडरसन के खिलाफ लगे आरोपों को वापस लेने पर विचार कर रही है।
अगस्त,२००२- भारतीय अदालत ने एंडरसन के खिलाफ लगाए गए सामूहिक नरसंहार के आरोपों को बरकरार रखा। भारतीय अदालत ने एंडरसन के प्रत्यर्पण की मांग की ताकि उसके खिलाफ सुनवाई हो सके। इस बीच, एक ब्रिटिश अखबार ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि एंडरसन अमेरिका में ही मौजूद है।
अक्टूबर,२००२-यूसीआईएल फैक्टरी को साफ करने को लेकर एक बार फिर से विरोध प्रदर्शन किया गया। सामजिक कार्यकताओं का कहना था कि फैक्टरी में अभी भी हजारों टन जहरीला पदार्थ है।
मई, २००३- भारत ने अमेरिका से एंडरसन के प्रत्यर्पण के लिए निवेदन किया।
मार्च,२००४- अमेरिका अदालत ने कहा कि वह डो केमिकल्स को भारत की जमीन से जहरीला केमिकल साफ करने के निर्देश दे सकती है अगर इसके लिए भारत सरकार नो आब्जेक्शन सर्टिफिकेट दे। इसके बाद भारत सरकार ने सर्टिफि केट अमेरिका भेजा।
जून,२००४-अमेरिका ने एंडरसन के भारत प्रत्यर्पण को ये कहकर ठुकरा दिया कि द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि के अनुसार एंडरसन का प्रत्यर्पण संभव नही है।
१९,जुलाई २००४- भारत की उच्चतम न्यायालय ने सेंट्रल बैंक को आदेश दिया कि सन् १९९२ से जमा ४७ करोड़ डालर के आधार पर १५ अरब रुपये का लोगों को मुआवजा वितरित करें।
२५ अक्टूबर,२००४- भोपाल गैस त्रासदी के पीडि़तों ने सरकार के मुआवजा न बांटने को लेकर विरोध किया।
२६ अक्टूबर,२००४- सुप्रीम कोर्ट ने ४७ करोड़ डालर का मुआवजा १५ नंवबर तक बांटे जाने की अंतिम तारीख घोषित की।
७ जून, २०१०- कोर्ट ने यूनियन कार्बाइड के चेयरमैन केशब महिंद्रा समेत आठ लोगों को भोपाल गैस त्रासदी के लिए दोषी ठहराया ।
अनुवाद- सचिन यादव सन्दर्भ पीटीआई