सोमवार, 8 मार्च 2010

विज्ञापन की दुनिया और उसमे फस गए हम और तुम

विज्ञापन ने एक आदमी की जिंदगी को कुछ इस प्रकार प्रभावित किया है जिसकी एक कहानी बानगी के रूप में प्रस्तुत है।
सुबह के पांच बजे थे कि अचानक राहुल की अजन्ता की अलार्म घड़ी ने उसके सपनों को तोड़ते हुए सुबह मार्निंग वाक के लिए उठा दिया। राहुल भी बेमन से उठा और अपनी बाटा की स्लीपर पहन कर फ्रेश होने के लिए बाथरूम में चला गया। उसका बाथरूम ओडिनल की खुशबू से महक रहा था। फ्रेश होकर डिटोल के हंेड वाश से हाथ धोए और ओरल बी के ब्रश पर क्लोज अप पेस्ट लगा लिया । ओरल बी के ब्रश ने उसके दॉतों को चारों दिशाओं में खड़पड़ा दिया और कर दी खूब सफाई । अपना मुंह धोने के लिए उसने ज्ेाक्वार का वाशिंग बेस लगा रखा था। टहलने के लिए जाने से पहले उसने रिबॉक का टैªक सूट निकाला और एडीडास के जूते पहन कर अपनी वेगनार कार में मार्निंग वाक के लिए चल दिया। वापस लौट कर घर आने पर कुर्सी पर बैठ कर अखबारों पर अपनी नजर डालने लगा और अपनी उनको चाय बनाने के लिए भी बोल दिया । अंदर किचन में टाटा टी की बनती चाय की महक बाहर तक आने लगी थी । राहुल के हाथों में कुछ देर बाद चाय का प्याला था जोकि कुछ ही देर में गायब हो गया। कल राहुल शापिंग के लिए बाहर गया और कुछ सामान भी लाया था । अब राहुल नहाने के लिए तैयारी कर रहा था कल ही उसने जॉकी की अंडरवियर और वेस्ट खरीदे थे और बडे़ ही चमकती ऑखों से उन्हें देख रहा था। नहाने से पहले उसने जिलेट के मॉक-3 से शेव बनायी और चल दिया नहाने के लिए। बाथरूम में लगी कजारिया की टाइल्स में वो अपने आप को निहारता और मन ही मन खुश होता । बदन पर पानी पड़ने के बाद सिथॉल का साबुन धीरे-धीरे अपने शरीर पर लगा लेता और बन जाता है बाथरूम सिंगर। दूसरी तरफ राहुल की श्रीमती अनामिका भी राहुल के लिए नाश्ता तैयार करने लगी। एलजी के माइक्रोओवेन में राहुल की मनपंसद डिस पकने के लिए रख दी। राहुल नहाकर बाहर निकला और अपने रूम की ओर कदम बढा़ दिए । पीटर इंग्लैड की शर्ट और ट्राउजर निकाल कर पहनने की तैयारी करने लगा। उसने अपनी गोदरेज की अलामारी खोली और प्लेेबाय का स्प्रे निकाल कर उसका ऊपर से नीचे तक तक पूरा धुंआ निकाल दिया। उसके स्प्रे से इतनी महक आ रही थी जैसे वो अभी उसमें डुबकी लगा कर आया हो। अब नाश्ते की टेबल पर बैठा नाश्ते का इंतजार करने लगा, वहीं अनामिका ने राहुल को पहले ट्रोपिकाना का जूस दिया और फिर धारा रिफांइड में बने गरमा-गरम पराठे खिलाए। अनामिका ने राहुल के लिए सिएलो के हॉट केस में खाना भी लगा दिया था। राहुल अब आफिस जाने के लिए तैयार था। राहुल ने अपना रे-बेन का चश्मा , हांडा सिटी गाड़ी की चाभी और टिफिन उठाकर आफिस के लिए चल दिया। कड़ी धूप और तगड़े टेªफिक जाम के कारण रास्ते में ही राहुल का गला सूखने लगा। आफिस पहुॅचकर तुंरत चपरासी को बिसलेरी की एक ठंडी बोतल लाने के लिए कहा और अपनें केबिन में लगे वीडियोकॉन के एसी का टम्परेर्चर डाउन कर दिया। अपने सोनी के लेपटॉप को ऑन किया और एयरटेल के अनप्लग नेट सर्विस को अपने नेट से कंनेट कर दिया। दिन भर काम में व्यस्त रहने के बाद जैसे ही राहुल खाली हुआ तभी अनमिका ने अपने रिलायंस के फोन से राहुल के बीएसएनल पर फोन किया लेकिन राहुल अपने ब्लैकबेरी पर अपने बॉस से बात कर रहा था। राहुल ने बॉस से बात करने के बाद अपने रिलायंस के फोन से अनामिका को फोन किया। अनामिका ने एक लंबी-चौड़ी लिस्ट राहुल को बता दी। राहुल आफिस से निकला और सीधे बिग बाजार पहुँच गया। उसने अनामिका को खुश करने के लिए लेकमे की नेल्स पालिस और लिपिस्टक ली साथ ही घर में बाकी समान भी ले गया। घर पहुँच कर उसने अनामिका को सरप्राइज दिया तो अनामिका ने भी रात के खाने में राहुल को आशीर्वाद आटे की फार्च्यून रिफांइड में बनी गरमा -गरम पूड़ियां और छोले खिलाएं। अब रात को टेलीविजन पर कुछ प्रोग्राम देखने के बाद दोनों सोने चल दिए। गर्मी के मौसम में मच्छरों से बचने के लिए आल आउट का प्लगी लगा लिया और स्पीलवेल के मुलायम गद्दे पर ऑख बंद अपने हसीन सपनों मे खो गए।
प्रस्तुति- सचिन यादव

हाथी की ताकत का एहसास कराएंगी माया

हाथी की ताकत का एहसास कराएंगी माया। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव भले ही 26 माह बाद होने हैं। पर चुनावों की जमीन और सत्ता पर काबिज़ होने की धमक अभी से कानों में सुनाई पड़ने लगी है। फरवरी से उत्तर प्रदेश में प्रर्दशनों की बौछार विपक्षी पार्टियों की तरफ से राज्य में शासित बहुजन समाज पार्टी के लिए एक नई मुसीबत बनती जा रही है। कानपुर में हुए बलात्कार को लेकर कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी के नेतृत्व में किए गए प्रदर्शन से इसकी शुरूआत हुई । वहीं 25 फरवरी को भाजपा ने प्रदेश बंद का ऐलान कर एक नई चुनौती पेश की। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह भी पानी की मोटी बौछारों के बीच 1 मार्च को राजधानी लखनऊ में महगांई को लेकर कुर्सी पटकते नजर आए। कांग्रेस और भाजपा का प्रदर्शन समाजवादी पार्टीं को कुछ बैचेन कर रहा था तो उसने भी 8 मार्च से गाँवों मे साइकिल रैली करने की घोषणा कर कर दी है। देश के सबसे बड़े राज्य पर राज करने वाली और हाथी को लखनऊ से नोएडा तक पत्थरों में सजाने वाली मुख्यमंत्री मायावती कैसे न अपनी हनक दिखातीं। रही सही कसर उन्होनें पूरी कर दी और 15 मार्च को बसपा पार्टी के स्थापना की रजत जयंती समारोह के मनाने के बहाने लखनऊ में एक विशाल रैली का आयाेिजत करने जा रही है जिससे विरोधी दलो को अपनी ताकत का एहसास कराया जा सके और विरोधी दल किसी तरह की गफलत में न दिखें। 1984 में बनी बसपा को अपनी रजत जयंती पिछले वर्ष 2009 में ही मनानी थी लेकिन लोकसभा चुनाव होने के कारण ये समोराह टाल दिया गया था। इस वर्ष 2010 में पार्टी के संस्थापक स्वर्गीय काशीराम के जन्म दिवस के अवसर पर विशाल रैली के साथ ही रजत जयंती समारोह मनाने की घोषणा की है। माया की नजर राहुल गांधाी पर भी है और राहुल की नजर अब रायबरेली, अमेठी से आगे जाकर कैफी आजमी के शहर आजमगढ़ और सूखे की मार झेल रहे बुदेलखंड पर इनायत हो गई है। अभी हाल में ही सोनिया गांधाी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में एक पुल के शिलान्यास से मचे विवाद की गूंज भी संसद में गूंजना दोनो पर्टियों के बीच सत्ता में काबिज रहने के लिए प्रयोग किए जाने वाले हथियारों की कहानी कह रही है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी के 226 विधायक हाथी पर सवार है, समाजवादी पार्टी के साइकिल के पहिए की हवा कम है पर 87 विधायक साइकिल चला रहे हैं। कमल के 48 फूल लिए भाजपा विधायक विधानसभा में हैं।कांग्रेस हाथ के पंजे के रूप में 20 विधायक और गन्ना किसानों का रस चूसने वाले राष्ट्रीय लोकदल के 10 विधायक हैं। नौ विधायकों जिसमें से कुछ बाहुबली का दर्जा पाए है को किसी पार्टी का साथ न मिला तो वो निर्दलीय ही हो गए। मायावती ने दरकिनार किया तो अपनी अलग राष्ट्रीय स्वाभिमान पार्टी बनाकर अपना स्वाभिमान बचाए रखे हुए आर0 के0 चौधरी हैं। डुमरियागंज की सीट अभी भी अपने विधायकों की राह आंखे लगायी बैठी है जबकि सी0वी0इन्निस इलाहाबाद से एंग्लो इंडियन सीट पर काबिज है। सचिन यादव छात्र हिंदी पत्रकारिता भारतीय जनसंचार संस्थान, नयी दिल्ली. 09716559699

बुधवार, 3 मार्च 2010

raj pichle janam ka jaari hai



raj pichle janam ka jaari hai

रविवार, 21 फ़रवरी 2010

संभल जाओ दोस्तों , क्योंकि पिक्चर अभी बाकी है।

इतना सन्नाटा क्यों है भाई , शोले फिल्म का ये डॉयलाग आईआईएमसी में हिन्दी जर्नलिज्म के छात्रों के बीच के माहौल को बयां कर रहा था। लोगों के चेहरों पर हंसी तो थी मगर उस हंसी के पीछे छुपे गम को भी साफ देखा जा सकता था। क्लास से लेकर कैंटीन और लैब से लेकर जावेद की दुकान तक ,हर तरफ हवा में ख़ामोशी थी। ग्रुप मेल पर ब्रेकिंग न्यूज की तरह दिखने वाली सूचना को पढ़कर लोग फेसबुक और ऑरकुट का रास्ता भूल गए थे। वहीं बज़ की जगह लोगों के कान बज रहे थे। ग्रुप मेल पर आया संदेश अपने वॉयस ओवर में कह रहा था कि पीटीआई में चार का सलेक्शन,पीटीआई में चार का सलेक्शन । अब सिलसिला शुरू हो रहा था अपने सफल साथियों को बेमन से बधाई देने का । जो लोग आमने-सामने मिलकर बधाई नहीं देना चाहते थे तो उन्होंनें कम्पूयटर के की-बोर्ड पर उंगलियाँ खड़पड़ायी और ग्रुप मेल के माथे पर दे मारा बधाई हो । कुछ लोगों के चेहरे देखकर थ्री इडियट फिल्म का वो डायलॉग याद आ रहा था जिसमें हीरों कहता है कि अगर दोस्त फेल हो जाए तो दुख होता है लेकिन अगर टॉप कर जाए तो उससे भी ज्यादा दुख होता है। बहरहाल कैंपस में नजारें कुछ और भी थे । लोग ये भी कहते मिलें और अपने आप को कोस रहे थे कि काश कॉनवेंट स्कूल में पढ़े होते तो ये हाल न होता । एक तो नौकरी नहीं है ओर दूसरा नौकरी है तो पैसा नहीं। कुछ लोगों को इस बात का मलाल था कि उन्होनें पहली वरीयता पीटीआई को क्यों दी थी। करम फूटे पीटीआई के उन्होनें हमें नहीं चुना। हमेशा सज-धज के एकदम चकाचक निकलने वाले साहब का आज सिलवटों भरा कुर्ता मन कि निराशा को पढने के लिए काफी था .केन्टीन को चलने वाले महिपाल के सामने आज यक्ष प्रश्न ये था कि एच.जे वाले आज खाना क्यों नहीं खा रहे हैं ओर तिस पर से उधारी मांगने पर ये नाराजगी क्यों है . आज क्लास के ज्योतिषों कि पों -बारह थी वे हाथ कि रेखाओं को पढ़कर आने वाले प्लेसमेंट कि दशा ओर दिशा बता रहे थे .साथ ही कुछ लोगों का ये कहना कि हमने तो जानबूझकर उत्तर गलत लिखे थे ताकि इलेक्ट्रानिक मीडिया का गन माइक हमारे हाथ में आ सके ओर कह सकें कि मै 10 जनपथ से ...........। उतरे हुए चेहरों कि कतार यहीं नहीं थमती है दोस्तों कारवां अभी लम्बा है .गाहे बगाहे शायरियों से ग्रुप मेल पर जबाव देने वाले साहब भी आज बिन जबाव दिए लैब से चलते बने . जाने कि वजह पूछी तो कहने लगे कि यार आज तबियत कुछ ठीक नहीं है . आज कई प्रतिमान टूट रहे थे तो कई लोगों कि आस्था डगमगा रही थी कल तक जो किसी विशेष माध्यम में ही आपने को उपयुक्त मानते थे आज वे कहीं भी काम करने को तैयार हैं , 5 मिलें या 8 भाई हम तो चले जायेंगे . हालात ये थे कि लोग इंड़िया न्यूज को इंड़िया टीवी समझ रहे थे, अच्छा हुआ बात एनडीटीवी तक नहीं पहुँची। शाम ढलते-ढलते माहौल और ज्यादा उदासीन हो चला था क्लास में गहरी ख़ामोशी थी और सीट परे बिखरे अंग्रेजी अखबार के पन्ने अपनी अहमियत की कहानी खूब कह रहे थे- संभल जाओ दोस्तों , क्योंकि पिक्चर अभी बाकी है। प्रस्तुति सचिन & परीक्षित

गुरुवार, 11 फ़रवरी 2010

प्राण के 90वें जन्म दिन पर विशेष


किस्मत होती है कि नही, इस बारे में कहना संभव नही है लेकिन अगर आप पान खाते है , तो खाइए क्या पताआपकी किस्मत भी पान की दुकान खुल जाए। भारत में हिन्दी सिनेमा के मशहूर अभिनेता प्राण कृष्ण सिकंद कीकिस्मत भी पान की दुकान पर पान खाते समय ही खुली थी। 12 फरवरी को पुरानी दिल्ली में जन्में प्राण आज 90वर्ष के हो गए।प्राण की किस्मत लाहौर की हीरा मंडी स्थित पान की दुकान पर लेखक और फिल्म निर्माता वली मुहम्मद वली केरूप में पीछे पड़ी। ये किस्मत कभी उनकों गालियों मे ढूंढती तो कभी सिनेमाहाल में मिल जाती । आखिरकार प्राणको पहली फिल्म यमला जट करनी पड़ी। ये फिल्म पंजाबी थी। प्राण को इस फिल्म में हास्यपद रोल था। प्राणको इस फिल्म में मेहनतानें को लेकर काफी कशमकश थी क्योंकि इस फिल्म को करने से पहले प्राण अपनेफोटोग्राफी के पेशे से 200 रू प्रतिमाह सन् 1940 के दौर में कमाते थे जबकि प्राण को इस फिल्म के लिए प्रतिमाह50 रूपये का मेहनताना मिल रहा था। वली मुहम्मद वली साहब ने प्राण के पान चबाने के स्टाइल और बोलतीआँखो को देखकर उनको ये रोल सौंपा था। इस तरह से प्राण फिल्मों के अपने सुहाने सफर पर निकल चुके थे।प्राण का विवाह 18 अप्रैल, 1945 में शुक्ला आहूवालिया से हुआ।प्राण की कई व्याक्तिगत चीजों को भी फिल्म निर्देशकों ने शमिल किया। प्राण अपनी सिगरेट के धुएं से गोल-गोलछल्ले बनाने में माहिर थे जब फिल्म निर्माता को उनके इस हुनर के बारें में पता चला तो उन्होनें प्राण की इण्ट्रीअपनी फिल्म में उनकों न दिखाकर नहीं बल्कि फिल्म की हीरोइन पर पड़ने वाले सिगरेट के छल्ले से कैमरा शुरूकर बाद पर प्राण पर क्लोअप शाॅट के साथ रूकता है।प्राण ने शीश महल, आन-बान, हलाकू, व राजतिलक जैसी काॅस्ट्यूम ड्रामा फिल्में भी की। साथ ही कुछ परीकथाओंमें भी हाथ आजमाया जैसे सिंदबाद-द सेलर , अलिफ लैला , डाॅटर आॅफ सिंदबाद। प्राण के रिश्ते देव आंनद ,राजकपूर , दिलीप कुमार से अच्छे सम्बन्ध भी है। प्राण ने देवानंद के साथ पहली बार जिद्दी फिल्म में काम किया।इस फिल्म ने प्राण हिंदी सिनेमा में चल रहे खराब वक्त को भी दूर किया। इस फिल्म में प्राण को अच्छी हिंदीबोलने का अभ्यास खूद देवानंद साहब ने कराया था। प्राण ने तीनों के साथ काम किया था लेकिन एक बात रोचकहै कि देवानंद , दिलीप कुमार और राजकपूर क तिकड़ी ने कभी साथ काम नही किया था। प्राण हीरा- रांझााफिल्म से भी जुडे़ रहे। इस फिल्म की खासियत थी िकइस फिल्म के सारे संवाद तुकबंदी में थे, जिन्हें कैफीआजमी साहब ने लिखा था। फिल्म शहीद में केहर सिंह और उपकार में मंलग चाचा की भूमिका उनके कॅरियर काएक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुई।हिन्दी फिल्मों में अपनी किस्मत के राजा प्राण को हिन्दी फिल्मों के शंहशाह अमिताभ बचपन को बुलंदियों का रास्तादिखाने में प्राण की अहम भूमिका थी। अमिताभ बच्चन खुद स्वीकारते हैं कि उनकी सिफारिश से उन्हें जं़जीर फिल्ममें लिया गया था। अमिताभ और प्राण साहब ने इसके बाद अमर, अकबर, एंथोनी, कसौटी, मजबूर, , उाॅन, कालिया,नसीब, नास्तिक , शराबी, अंधा कानून , इनक़लाब आदि फिल्में की।प्राण अन्याय के खिलाफ भी खड़े हो जाते थे उन्होनें 1973 में फिल्म फेयर अवार्ड कमेटी को पत्र लिख कर कहाकि श्रेष्ठ संगीतकार का अवार्ड पाकीजा फिल्म के लिए गुलाम मोहम्मद को न मिलने पर रोष व्यक्त किया। उन्होनेंअपने जीवन में 346 से अधिक फिल्मों में काम किया। उनकी फिल्म वसन्त सेना , लालकिला ,ताला चाबी पूरी नहींहो पायी। उन्हें जब 2000 में सहस्रसाब्दि का खलनायक अवार्ड स्टारडस्ट ने दिया तो उन्होनें अपने जीवन भर काइसे सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण अवार्ड बताया। प्राण साहब किस्मत को बखूबी मानते थे। इसलिए उन्होनें कहा किखुदा तौफ़ीक देता है जिन्हें, वो ये समझते हैंके खुद अपने ही हाथो से बना करती हैं तक़दीरें।।

सचिन यादव