बुधवार, 22 जुलाई 2009

टी आर पी के लिए साला कुछ भी करेगा.

टेलिविज़न का इतिहास बदलता जा रहा है. हम लोग जैसे प्रोग्राम की बुनियाद ख़तम होती जा रही है. टी आर पी के लिए साला कुछ भी करेगा, समय बदल गया साथ ही लोगो की सोच के साथ पसंद भी बदल गयी है. आज राखी का विवाह दिखाया जा रहा है, कल राखी का विवाह पार्ट -२ दिखाया जायेगा, फिर राखी का हनीमून, फिर राखी की डिलिवरी, फिर राखी के बच्चे ,भविष्य में यही प्रोग्राम टीवी पर छाए रहेगे, भाई लोगो की ग्रोथ हो रही है. लोगो के लिए उनके लिए क्या हो रहा है इससे लेना देना ही नही है. वह राखी का विवाह देखने में मस्त है. क्योकि सच का सामना होना अभी भी उनकी जिन्दगी मीलो दूर है, जिन प्रोग्राम की स्क्रिप्ट पहले तैयार है उनके विषय में क्यों नहीं सोच रहे हैं. लोगो को पता नही क्या हो गया है . वह जैसे सब कुछ भूल गए है. मैंने यह भी सुना हैकी उस प्रोग्राम में शामिल होने वाले लड़को के घर वालो की काफी शर्मिंदा होना पड़ता है. आज मीडिया का यूज़ किस तरह से किया जाये, यह भी पता है. कुछ बदलने वाला नही है लगता यही है आप गाँधी जी या भगात सिंह न बने, क्योकि बन भी जायेगे तब भी आपकी मूर्ति पर माला नहीं होगी, बस कौवों और चिडियों की ......................................................

सोमवार, 29 जून 2009

"दिल्ली पर भारी- पानी की मारा मारी"

कहा जा रहा है कि तीसरा विश्व युद्घ पानी के लिए होगा. और इसका एहसास इस गर्मी में सभी भारत वाशियों ने कर भी लिया होगा. हाँ कुछ मुट्ठी भर लोग अभी भी इसको भयानक हालात नहीं मानते है. अभी में २७ जून को दिल्ली अपना भारतीय जनसंचार संस्थान का साछात्कार देने गया था. मैंने तो जेएनयू कैम्पस में रुका था. पर जब २८ तारीख का पेपर नवभारत टाईम्स पढ़ा, तो मेरे रोगंटे खड़े हो गए. नेहा लालचंदानी नाम कि रिपोर्टर ने पानी कि समस्या पर एक रिपोर्ट लिखी थी. जिसमे पानी कि खरीददारी देख कर दीमाग घूम गया. किस तरह से एक आदमी पानी के लिए ३०० रुपये देकर महीने भर का पानी खरीदता था. और उसको टेंकर में भर कर रखता था, और सिर्फ ६ लीटर पानी सप्ताह में अपने ऊपर खर्च करता था. और यहाँ लखनऊ में हम सिर्फ दिन भर में ६ लीटर पानी पी जाते हैं. पानी का आसामान्य वितरण भी एक मुख्या कारन है. फिर भी दिल्ली में भारतीय जनसंचार संस्थान के एक कर्मचारी की भूमिका पानी बचाने में बहुत महतवपूर्ण थी. वह कई बार संस्थान में घूमते थे और जहाँ कही भी पानी खुला मिलता था उससे बंद कर देते थे. वह वास्तव में एक सच्चे भारतीय है.
iimc mein likhi woh kuch is tarah thi
past is a waste paper
present is news paper
future is a question paper
and life is an answer paper, so carefully read and write. यह हमारे लिए कुछ ख़ास है

मंगलवार, 9 जून 2009

मेरा नाम पिंकू श्रीवास्तव है और आप


नमस्कार दोस्तों आज मैं आप को एक मित्र से मिलवाता हूँ , जो इंसान नहीं फिर भी इंसान से बढ़कर है. आज से दो साल पहले जब भारत ने अपना पहला ट्वेंटी ट्वेंटी वर्ल्ड कप जीता था . तब वह पहली बार मेरे सामने आया था. तब वह बहुत छोटा सा था . उसकी उम्र २ या तीन महीने ही होगी. जिसकी बात मैं कर रहा हूँ उनका नाम पिंकू श्रीवास्तव है और वह एक कुत्ता है. यह नाम रखने का एक कारन यह है की जो उस कुत्ते को घर लाये थे उनका नाम पिंकू श्रीवास्तव है और पहले उनके अंदर बहुत जोश था उसको पालने का, पर अचानक सारा जोश काफूर हो गया. और उन्होंने उसे सड़क पर आवारा कुत्ते की तरह छोड़ दिया. आज वह दो साल का चूका है. मुझे ख़राब यह लगा की उन्होंने किसी बच्चे को उसकी माँ से अलग किया और फिर उससे सड़क पर भटकने के लिए छोड़ दिया था. आज वह हमारी कालोनी में काफी मशहूर हो चूका है. क्योकि उसने कुछ दिन पहले ही हमारे घर के पास ही रहने वाले दुसरे श्रीवास्तव जी के घर होने वाली चोरी को रोका था और चोरो को भगा दिया था. आज भी वह अपनी इमानदारी और स्वामिभक्ति नहीं भूला है. और अपने पहले वाले मालिक के साथ मेरे और बाकि सभी के घरो की सुरक्षा करता हैं. उसके अन्दर किसी भी प्रकार का घमंड नही है. वह अब पूरी कालोनी में मशहूर हो चूका है. जो पिंकू श्रीवास्तव उसको लाये थे वह मेरे भैया लगते है. शायद उन्हें इस बात का अंदाजा तक नही है जब वह अपना घर छोड़ कर कही बहार जाते हैं तब वह लगातार उनके घर की सुरक्षा करता है. बस अपना फ़र्ज़ निभाता चला जा रहा है. मैंने बहुत पहले एक हॉलीवुड की फिल्म बीथोवेन देखि थी तब मुझे वह कुत्ता बहुत प्यारा लगा था, बस अब पूरी तरह से पिंकू श्रीवास्तव बीथोवेन की भूमिका निभा रहे है. और अब मुझे भी उससे प्यार हो गया है. जब हम घर पहुचते हैं तब पता नही कैसे पता चल जाता है और वह घर आ जाता है. जब सुबह मैं साइकिल से घर निकलता हूँ तब वह मुझे छोड़ने काफी दूर तक आता है. अब मेरे पापा कहते हैं, तुम इसको जयादा प्यार मत करो वरना जब इसको कुछ हो जायेगा. उस समय तुम्हे काफी पीडा होगी.
बस में यही दुआ करता हु भगवन उसे कोई दर्द न दे और उसे हमेशा ठीक रखे, तुम जियो हजारो साल, और तुम्हारी जैसी इमानदारी सभी को मिले.

गुरुवार, 4 जून 2009

बाप अंधरे में बेटा हो गया पॉवर हाउस

लखनऊ यूनिवर्सिटी के पत्रकारिता और जनसंचार डिपार्टमेन्ट का अब भगवान् ही मालिक है।करीब १८ वर्ष पहले शुरू हुआ यह विभाग अपने हाल पर रो रहा है। आज जिस डिपार्टमेन्ट को पूरे देश भर में अपना परचम फैलाना चाहिए, आज वही विभाग काफ़ी निचले निर्णय ले रहा है। सन २००५ में शुरू हुआ बी जे म सी कौर्से रोक दिया गया है । बचेलोर इन जौर्नाल्सिम एंड मॉस कम्युनिकेशन कौर्से आज भारत देश में अधिकतर यूनिवर्सिटी शुरू कर रही है ऐसे समय में डिपार्टमेन्ट ऑफ़ जौर्नालिस्म एंड मॉस कम्युनिकेशन लखनऊ यूनिवर्सिटी का यह फ़ैसला छात्रों के भविष्य से साफ़ साफ़ मजाक जान पड़ता है। अगर विभाग कहता है की उसके पास प्रोफ़ेसर, रीडर और स्पेसिअलिस्ट नही हैं, तोह यह पुरी तरह से बेमानी होगी। क्योकि जब विभाग ने २००५ में इस कौर्से को शुरू किया तब डिपार्टमेन्ट के पास सिर्फ़ एक परमानेंट फेकल्टी थी। जो की डॉ रमेश चंद्र त्रिपाठी जी थे। बाकी सब गेस्ट फेकल्टी थे। अब डिपार्टमेन्ट में डॉ मुकुल श्रीवास्तव के रूप में एक अन्य परमानेंट फेकल्टी भी विभाग में है। आख़िर क्यो यह कौर्से बंद किया गया इसका कोई जवाब अभी तक नही मिल पाया है। जबकि गोमती नगर में माडर्न कॉलेज इस बार भी बीजेमसी में दाखिले लेगा। यह कॉलेज सिर्फ़ लड़कियों के लिए है और सिर्फ़ उन्हें ही दाखिला मिल पायेगा। भविष्य में लखनऊ यूनिवर्सिटी के पत्रकारिता और जनसंचार विभाग में भी सिर्फ़ माडर्न कॉलेज की लड़किया ही पढ़ पायेगी, क्योकि यहाँ मेरिट पर दाखिला होता है और माडर्न कॉलेज की लड़कियों के परसेंटेज भी ७० से ७८ तक होते है। यह कैसा नियम कानून है की जिस बाप ने बेटे को पैदा किया आज और पाला पोषा आज उस बाप की वाट लग गई है। पत्रकारिता विभाग में जिस तरह की राजनीती हो रही है , उससे एक तरफ़ जो छात्र पत्रकारिता में अपना भविष्य सर्च कर रहे थे , आज वोह लोग इस दोड़ से तरह अलग जान पड़ते है। दूसरी तरफ़ छोटे सहरो में किस तरह की पत्रकारिता होती होगी, उसका अंदाजा इससे ही लग जाता है। एक तरफ़ छात्र और छात्रा की बराबरी की वकालत की जाती है और दूसरी तरफ़ छात्रों को शूली पर लटकाने की तयारी की जा रही है। जो लोग छात्रों के भविष्य से खेल रहे हैं उन्हें जवाब देना होगा। और अब समय आ गया है की लखनऊ यूनिवर्सिटी अपना स्टैण्डर्ड भी चेक कर ले , क्योकि जिस कौर्से को वह पढ़ा रहे है वोह काफी पुराना हो गया है, अब बारी हैं कौर्से को अपडेट एंड नया करने की।

गुरुवार, 14 मई 2009

मंगल पर भारी पड़ेगा शनि

वैसे मैं ज्योतिष शास्त्र में विश्वास नही करता हूँ, फिर भी भारतीय राजनीती मुझे इसे अपनाने पर मजबूर कर देती है । मेरा एक अनुमान है की १५ वे लोकसभा चुनाव की तस्वीर साफ़ होने में अभी २४ घंटो से अधिक का समय है।
आइये अब आते हैं मुद्दे पर कल १६ मई,२००९ दिन शनिवार है और २ जून २००९ को दिन मंगलवार है। कई ज्योतिषशास्त्र अपने मत दे चुके है और कई स्वयम सेवी संगठन के अनुसार सरकारे भी बन चुकी है। पर असलियत सामने आने में अभी कुछ वक्त है और यह वक्त अच्छे अच्छे को पानी पिलाने के लिए काफ़ी है। वास्तव में इस बार शनि लोगो के होश उड़ा देगा और लोगो को पता भी नही चल पायेगा की वास्तव में उनके साथ क्या हो गया।
कुल मिला कर सातवी बार गठबंधन की सरकार बनेगी और भगवान् भी भारतीय राजनीती में इस करिश्मे को नही रोक सकते हैं । यह करिश्मा सिर्फ़ भारत जैसे देश में ही हो सकता है। चार मोर्चे बन चुके है। भारतीय जनता पार्टी , कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया इन पार्टियों की भूमिका होगी।
२ जून वह दिन हैं जब सबसे बड़ी पार्टी अपने बहुमत साबित कर देश को नया pradanmantri देगी । सबसे बड़े लोकतंत्र के खिलाड़ी शनिवार को मंदिरों, मस्जिदों गुरुद्वारों और चर्च में जाकर अपने लिए इबादत करेगे की इस लोकतंत्र के महासमर में उनकी नाव भी नदी के उस पार पहुच जाए।
यह महासमर युवा वर्ग की भूमिका के लिए भी जाना जाएगा। अनुमानों की राजनीती जोरो पर है और सब अपनी सरकार बनने में लगे है। फिर आप किस बात का इंतज़ार कर रहे है आप भी अपनी सरकार बना डालिए क्या पता आप भी कभी प्रधान मंत्री बन जाए । वैसे यह जरूर धयान कर लीजिएगा का शनि और मंगल दोनों आप के साथी हो।
क्योकि पता नही कब जय हो और कब भय हो .

शनिवार, 2 मई 2009

बान ने की पत्रकारों पर हमलों की निंदा

आज अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस के मौके पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने दुनिया भर में पत्रकारों की मौतों, उनकी गिरफ़्तारी और डराए धमकाए जाने की कड़ी निंदा की है.

बान ने अपने वक्तव्य में कहा है कि पत्रकारों पर हमलों की संख्या दहलाने वाले स्तर तक ऊंची बनी हुई है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने वैश्विक समस्याओं के समाधान में मीडिया की भूमिका पर बल दिया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से प्रेस की आज़ादी का सख्ती से पालन करने की अपील की है.

संस्था 'कमिटी टू प्रोटैक्ट जर्नलिस्ट्स' सी पी जे के अनुसार 2008 में 41 पत्रकारों की हत्या कर दी गई और 2009 में अब तक 11 पत्रकारों को मार दिया गया है. पैरिस स्थित संगठन 'रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स' ने 2008 में मार दिए गए पत्रकारों की संख्या 60 बताई है. संगठन ने कहा है कि पिछले वर्ष 929 पत्रकारों पर हमले किए गए या उन्हें धमकियां दी गईं.Bildunterschrift: Großansicht des Bildes mit der Bildunterschrift:

संगठन सी पी जे के अनुसार, पहली दिसंबर, 2008 को 125 पत्रकार जेल में थे, जिनमें से कुछ वर्षों से क़ैद हैं, और कुछ एक दशक से भी अधिक समय से.

बान ने कहा है कि उनमें से आधे क़ैदी तीन देशों में हैं - चीन, क्यूबा और एरिट्रिया में. संगठन 'रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स' का कहना है कि इन तीन देशों को मिलाकर, प्रेस स्वाधीनता की दृष्टि से सबसे अधिक ख़तरे वाले दस देशों में उत्तर कोरिया, बर्मा, लाओस, वियतनाम, ईरान, तुर्कमेनिस्तान और श्रीलंका शामिल हैं.

बान ने अपने वक्तव्य में कहा है, "मैं उन सभी सरकारों से, जिन्होंने पत्रकारों को क़ैद कर रखा है, आग्रह करता हूं कि वे सुनिश्चित करें कि पत्रकारों के अधिकारों का पूरा सम्मान किया जाए, जिनमें अपील करने और आरोपों के ख़िलाफ़ अपने बचाव के अधिकार भी शामिल हैं."

क़ैद रखे जा रहे पत्रकारों में, इस समय एक बहुचर्चित मामला अमरीकी-ईरानी पत्रकार रुख़्साना साबरी का है, जिन्हें पिछले महीने तेहरान में 8 वर्ष की क़ैद की सज़ा सुनाई गई थी.

विश्व प्रेस स्वाधीनता दिवस के अवसर पर एक वक्तव्य में अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि वह विदेशों में क़ैद अमरीकी नागरिकों के बारे में विशेष रूप से चिंतित हैं. ओबामा ने कहा कि यह उन पत्रकारों की बढ़ती संख्या के बारे में अलख जगाने का अवसर है, जिन्हें मौत या क़ैद के रास्ते ख़ामोश कर दिया जाता है, जबकि वे जनता को रोज़मर्रा के समाचार पहुंचाने की कोशिश कर रहे होते हैं."रोक्साना साबरी को ईरान ने क़ैद कर रखा है रोक्साना साबरी को ईरान ने क़ैद कर रखा है

अमरीकी विदेशमंत्री हिलरी क्लिंटन ने अपने लिखित संदेश में कहा कि अमरीका, विश्व प्रेस स्वाधीनता दिवस, और पत्रकारों द्वारा मानव के आत्मसम्मान, स्वाधीनता और समृद्धि के उन्नयन में अंशदान को मनाने में शामिल होकर गर्वित महसूस कर रहा है. क्लिंटन ने कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता को राष्ट्रसंघ की मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा का संरक्षण प्राप्त है.

फ़्रीडम हाउस संगठन ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में आरोप लगाया है कि लगातार सातवें साल प्रेस स्वतंत्रता की बाधाएं बढ़ी हैं. निरंकुश देशों के अलावा इटली, इस्राएल और हांगकांग जैसे देश भी पत्रकारों के काम को मुश्किल बना रहे हैं. बर्लिन में रिपोर्टर विदाउट बोर्डर्स ने एक विरोध प्रदर्शन कर रिपोर्टिंग को दबाए जाने के परिणामों की ओर ध्यान दिलाया है और कहा है कि रिपोर्टिंग के बिना पीड़ित अदृश्य रहते हैं.

राष्ट्रसंघ के शिक्षा और संस्कृति संगठन यूनेस्को ने श्रीलंकाई पत्रकार लसंथा विक्रमतुंग को मरणोपरांत 2009 के प्रैस स्वाधीनता पुरस्कार से सम्मानित करने का फ़ैसला किया है. यूनेस्को के महानिदेशक कोइचीरो मतसूरा यह पुरस्कार आज क़तर में एक आयोजन में विधिवत प्रस्तुत करेंगे. विक्रमतुंग की जनवरी में हत्या कर दी गई थी.

साबेरी मामले की समीक्षा करेगा ईरान

अमेरिकी ईरानी पत्रकार ऱुख़्साना साबेरी को सुनाई गई सज़ा की समीक्षा करने के लिए ईरान सरकार तैयार है. जापानी विदेश मंत्री हिरोफ़ूमी नाकासोने के साथ एक साझा प्रेस कांफ्रेंस में ईरानी विदेश मंत्री ने इस बात के संकेत दिए.

साबेरी की मां जापान की हैं और जापान ने भी इस मामले में चिंता जताई है. पिछले दिनों साबेरी के पिता के हवाले से कहा गया था कि साबेरी जेल में भूख हड़ताल पर है. उन्हें ईरानी सरकार ने अमेरिका के लिए जासूसी करने के आरोपों में पांच साल जेल की सज़ा सुनाई है.

अमेरिका और यूरोपीय देशो ने ईरान से साबेरी की रिहाई की अपील की थी. इस बीच जापान ने भी अपनी चिंताएं ज़ाहिर की हैं. जापानी विदेश मंत्री हिरोफूमी नाकासोने ने तेहरान में ईरानी विदेश मंत्री मनोशेर मुतक्क़ी के साथ साझा कांफ्रेंस में इस बारे में अपनी राय ज़ाहिर की. समाचार एजेंसी रायटर्स के मुताबिक मुतक्क़ी ने पत्रकारों को बताया कि साबेरी मामले की समीक्षा के लिए सरकार के पास आग्रह आए हैं और सरकार इन पर विचार कर रही है.रुख़्साना साबेरी के पिता रज़ा साबेरी

ईरानी विदेश मंत्री के मुताबिक़ मामले की समीक्षा न्याय और मानवीय और इस्लामी दयालुता के आधार पर की जाएगी. समाचार एजेंसी रायटर्स ने ईरानी न्यायिक अधिकारियों के हवाले से बताया कि साबेरी का स्वास्थ्य बेहतर है और वह अनशन पर भी नहीं है. साबेरी के पिता रज़ा साबेरी ने आरोप लगाया था कि उनकी बेटी कमज़ोर हो गई है.

साबेरी स्वतंत्र पत्रकार हैं और कुछ अमेरिकी और ब्रिटिश टीवी चैनलों के लिए ईरान से रिपोर्टिग करती रही हैं. उनके पास ईरान और अमेरिका दोनों देशों की नागरिकता है. उन्हें जनवरी महीने के आखिर में उस वक़्त गिरफ़्तार किया गया था जब उनके प्रेस दस्तावेज़ों की मियाद ख़त्म हो चुकी थी. ईरान का आरोप है कि साबेरी अपने काम की आड़ में अमेरिका के लिए जासूसी करती थी. अमेरिका ने इन आरोपों को सिरे से ख़ारिज किया है.